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बच्चों की आंखों का पानी सुखा रहा कंप्यूटर

Sat, 02 Feb 2013 10:22 AM IST
रजा शास्त्री
रजा शास्त्री Updated Sat, 02 Feb 2013 10:22 AM IST
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computer and mobiles cause eyes problems in kids

घंटों कंप्यूटर या मोबाइल पर गेम खेलने की लत से बच्चों की आंखों का पानी सूख रहा है। पलक कम झपकाने के कारण पुतली की नमी खत्म हो जाती है। इसका दुष्प्रभाव कॉर्निया पर भी पड़ रहा है, साथ ही आंखों की पुतली की मांसपेशियां कमजोर हो रही हैं। इस मामले में सस्ते लोकल मोबाइल और कंप्यूटर अधिक घातक हैं। इनसे हीट अधिक निकलती है। स्क्रीन से निकली तरंगों के कारण सिरदर्द, मिचली आदि की शिकायत होती है और मरीज आंख मिचमिचाया करता है।

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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर के नेत्र रोग विभाग के ताजा ओपीडी सर्वेक्षण में ये तथ्य उजागर हुए हैं। विभाग इस सर्वेक्षण रिपोर्ट को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करने की तैयारी कर रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस बावत लोगों में जागरूकता की जरूरत है, नहीं तो आने वाले दिनों में स्थिति और विकट हो सकती है।
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रिपोर्ट में कहा गया है कि ड्राई आई की जो समस्या अभी तक 40 साल की उम्र में होती थी, वह अब 14 साल के लड़कों को भी हो रही है। दिक्कत यह है कि कम उम्र के मरीज देर से आते हैं। वे अपनी समस्या घरवालों को ढंग से बता नहीं पाते।
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नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रोफेसर आर.सी. गुप्ता का कहना है कि ब्रांडेड मोबाइल और कं प्यूटर के स्क्रीन पर कंपनियां विद्युतीय तरंगे नियंत्रित करने के लिए ब्लॉकर्स लगाते हैं। लोकल उत्पादों में ब्लॉकर्स नहीं होते। इससे ये अधिक खतरनाक होते हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि जिन बच्चों को ड्राई आई की समस्या थी उनकी आंखों की रोशनी कम हो रही थी। वीडियो गेम के लती पलकें कम झपकाते हैं जिसकी वजह से पुतली की नमी उड़ जाती है। इससे पुतली पर खराशें पड़ जाती हैं जिससे आंखों की पुतली गल सकती है।
 
इन लक्षणों को पहचानें
- आंखों में खुजली होना।
- आंखों से पानी आना।
- आंखें मिचमिचाना।
- सिर और आंखों के आसपास भारीपन होना।
- मिचली लगना।
 
ऐसे करें बचाव
- स्क्रीन की ब्राइटनेस कम कर लें।
- लंबे समय तक टकटकी न लगाए रखें।
- आंखों में लुब्रीकेंट (आइ ड्रॉप्स) डालें।
- पलकें झपकाते रहें।
- हर आधे घंटे में आंखों को रेस्ट देते रहें।

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