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अब कैंसर की पहचान करने का बेहद आसान उपाय
धर्मेंद्र त्यागी/अमर उजाला, आगरा
Updated Mon, 29 Dec 2014 11:34 AM IST
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चिकित्सकों के लिए चुनौती बनी कैंसर बीमारी पर फतह की तैयारी है। निकट भविष्य में बीमारी की संभावनाएं तक जांच की जद में होंगी। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) ने इस ओर क्रांतिकारी कदम बढ़ाए हैं।
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‘डीएनए चिप फॉर कैंसर’ प्रोजेक्ट को देश के टॉप चिकित्सा वैज्ञानिकों की टास्क फोर्स बनी है। साल 2016 के अंत तक चिप उपलब्ध होगी। इससे गला, अंडाशय, सर्वाइकल, स्तन समेत छह तरह के कैंसर का पता लगाना संभव होगा।
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कैंसर देश की टॉप टेन किलर डिजीज में शामिल है। बीमारियों से होने वाली सात फीसदी मौत के पीछे कैंसर है। भामा ऑटोमिक रिसर्च सेंटर की स्टडी के मुताबिक, 70 फीसदी मृतक 60 साल से कम रहे, इसमें 15 प्रतिशत बच्चे और युवा थे।
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तंबाकू के बढ़ते चलन को देख वर्ष 2025 में स्थिति और भयावह होगी। आईसीएमआर वैज्ञानिक ढंग से इसकी जांच और इलाज करेगा। इसके लिए ‘डीएन चिप फॉर कैंसर’ की रूपरेखा तय हुई। यह वर्तमान में कैंसर जांच की रेडियोथैरेपी से ज्यादा सटीक और कारगर होगी।
लैब में वैज्ञानिक चिप के जरिए मनुष्य के जींस का डाइग्नोसिस कर कैंसर पर नेगेटिव और पॉजीटिव की रिपोर्ट देंगे। राष्ट्रीय जालमा कुष्ठ एवं अन्य माइकोबैक्टेरियल रोग संस्थान के स्थापना दिवस पर आगरा आए आईसीएमआर के जनरल डायरेक्टर डा. विश्वमोहन कटौच ने यह खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि मुनष्य के डीएनए की जांच कर कैंसर को शुरू में ही पकड़ा जा सकेगा। इससे कीटाणु की ताकत का पता लगा डाक्टरों के लिए कीमोथैरेपी करना भी आसान होगा।
संक्रामक बीमारियों से निपटने को 160 लैब
संक्रामक बीमारियों से निपटने को देश में 160 वायरोलॉजी लैब बनाई जाएंगी। लैब मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल में स्थापित होंगी। इसमें डेंगू, मलेरिया, स्वाइन फ्लू और वायरल की जांच संभव होगी।
संबंधित बीमारियों की तत्काल जांच कर इलाज शुरू हो सकेगा। आगरा के एसएन मेडिकल कालेज में भी वायरोलॉजी लैब के लिए आईसीएमआर की टीम ने बीते महीनों में निरीक्षण किया था।
गांवों में मिलेगी इलाज की उच्च तकनीकी
असाध्य रोगों के लिए ग्रामीणों को शहर का रुख नहीं करना होगा। इलाज की उच्च तकनीकी गांव के पास ही मिलेगी। इसके लिए माडल रूरल रिसर्च यूनिट स्थापित होंगे। इसमें लेटेस्ट विधियां और उपकरणों से उपचार होगा।
शुरूआत में उत्तर प्रदेश सहित 15 राज्यों में विस्तार हो रहा है। कानपुर के घाटमपुर में इसकी शुरुआत हो चुकी है। इसमें केंद्र और प्रदेश सरकार के अलावा स्वास्थ्य विभाग का साझा प्रयास होगा।