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Guru Nanak Jayanti 2025: घर पर करवाएं सुख और शांति देने वाला कीर्तन-पाठ, ऐसे करें तैयारी

Sat, 01 Nov 2025 12:20 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sat, 01 Nov 2025 12:20 PM IST
सार

Guru Nanak Jayanti 2025: आइए जानते हैं कि घर पर गुरु नानक जयंती के अवसर पर कीर्तन-पाठ कैसे करवाएं, किन बातों का ध्यान रखें और इसे भक्ति भाव से संपन्न करें

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Guru Nanak Jayanti 2025 How to Organize Path and Kirtan at Home kirtan path kaise karwaye
गुरु नानक जयंती पर कीर्तन पाठ - फोटो : Instagram

विस्तार

Guru Nanak Jayanti 2025: गुरु नानक जयंती सिख धर्म के पहले गुरु, श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के रूप में मनाई जाती है। यह दिन केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सत्य, सेवा और समानता की भावना का प्रतीक है। साल 2025 में गुरु नानक जयंती 5 नवंबर, बुधवार को मनाई जाएगी। इस दिन श्रद्धालु घरों और गुरुद्वारों में कीर्तन-पाठ और लंगर सेवा का आयोजन करते हैं। अगर आप चाहते हैं कि इस पवित्र दिन अपने घर में शांति, सकारात्मक ऊर्जा और भक्ति का माहौल बने, तो घर पर कीर्तन-पाठ का आयोजन एक श्रेष्ठ तरीका है। आइए जानते हैं कि घर पर गुरु नानक जयंती के अवसर पर कीर्तन-पाठ कैसे करवाएं, किन बातों का ध्यान रखें और इसे भक्ति भाव से संपन्न करें।

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घर पर कीर्तन-पाठ करवाने की विधि
 

शुभ दिन और समय तय करें

गुरु नानक जयंती के दिन सुबह स्नान कर घर को साफ करें और गुरुग्रंथ साहिब के लिए पवित्र स्थान चुनें। यदि गुरुग्रंथ साहिब नहीं है, तो फोटो या प्रतीक रूप में स्थापना करें।

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आरंभ करें जूबजी साहिब पाठ से

गुरु नानक देव जी के “जपजी साहिब” पाठ से दिन की शुरुआत करें। यह शांति, एकाग्रता और दिव्यता का अनुभव देता है।

कीर्तन का आयोजन करें

परिवार के सदस्यों या स्थानीय रागी जत्था को बुलाकर "सतनाम श्री वाहेगुरु" और “गुरबाणी कीर्तन” गाएं। भक्ति संगीत से पूरा वातावरण आध्यात्मिक बन जाता है।

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प्रसाद और लंगर की तैयारी करें

कीर्तन के बाद "कड़ा प्रसाद" जिसमें घी, आटा और शक्कर का भोग लगाएं और फिर सभी को वितरित करें। चाहें तो साधारण लंगर जैसे खिचड़ी, दाल और पूड़ी भी बना सकते हैं।

श्रद्धा और सादगी रखें मुख्य भाव

यह पर्व दिखावे का नहीं, बल्कि भक्ति, विनम्रता और समानता का है। सभी धर्मों के लोगों को आमंत्रित कर ‘एकता और सेवा’ का संदेश दें।

कीर्तन-पाठ के लिए टिप्स

धूप, दीया और शुद्ध वातावरण रखें। फोन, टीवी आदि से दूरी बनाएं। कीर्तन के समय बच्चों को शामिल करें, यह संस्कारों की शिक्षा देता है। कीर्तन के बाद अरदास जरूर करें।

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