फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Lifestyle ›   Health & Fitness ›   world mental health day 2025 and karwa chauth mens mental health challenge in india

World Mental Health Day 2025: करवा चौथ और मानसिक स्वास्थ्य दिवस, देश के पुरुषों का मेंटल हेल्थ कितना ठीक?

Fri, 10 Oct 2025 08:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अभिलाष श्रीवास्तव Updated Fri, 10 Oct 2025 08:08 PM IST
सार

  •  भारतीय समाज में बचपन से ही पुरुषों को सिखाया जाता है कि उन्हें मजबूत, कमाऊ और भावनात्मक रूप से कठोर होना चाहिए। उन्हें अपनी कमजोरियों को छिपाना पड़ता है, भावनाओं को व्यक्त करना कमजोरी समझा जाता है।

विज्ञापन
world mental health day 2025 and karwa chauth mens mental health challenge in india
मेंटल हेल्थ से संबंधित चुनौतियां - फोटो : Amarujala.com

विस्तार

Mental Health Issues: मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं सभी उम्र के लोगों को गंभीर रूप से प्रभावित करती हुई देखी जा रही हैं। पुरुष हो या महिला, सभी इसका शिकार हो रहे हैं। आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस है। दुनियाभर में मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के बारे में लोगों को शिक्षित करने, जागरूकता बढ़ाने और मानसिक स्वास्थय में सुधार के प्रयासों को गति प्रदान करने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।

विज्ञापन


मेंटल हेल्थ डे के साथ आज करवाचौथ का भी त्योहार है। करवाचौथ में महिलाएं पति के लंबे और स्वस्थ जीवन के लिए व्रत रखती हैं। ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि क्या वास्तव में भारतीय पुरुष शारीरिक-मानसिक रूप से स्वस्थ हैं?
विज्ञापन


पुरुषों का मानसिक स्वास्थ्य कितना ठीक है, उन्हें स्वास्थ्य से संबंधित किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है और पुरुषों के मेंटल हेल्थ में सुधार के लिए आगे क्या प्रयास किए जाने आवश्यक हैं? 

विज्ञापन
विज्ञापन

world mental health day 2025 and karwa chauth mens mental health challenge in india
पुरुषों में मेंटल हेल्थ की समस्याएं - फोटो : Adobe stock photos

भारत में पुरुषों की मेंटल हेल्थ

हम अक्सर सुनते हैं कि पुरुष नहीं रोते, मर्द को दर्द नहीं होता लेकिन क्या कभी सोचा है कि इस समाजिक सोच ने कितने पुरुषों की मानसिक सेहत को तोड़ दिया है? भारत में पुरुषों की मेंटल हेल्थ गंभीर मुद्दा बन चुकी है, जिसको लेकर कई रिपोर्ट्स में स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंता जताते रहे हैं। 

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़ों के अनुसार, भारत में आत्महत्या करने वालों में लगभग 70% पुरुष हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि मानसिक रूप से पुरुष कितने दबाव में हैं। इसके अलावा भारतीय समाज में बचपन से ही पुरुषों को सिखाया जाता है कि उन्हें मजबूत, कमाऊ और भावनात्मक रूप से कठोर होना चाहिए। उन्हें अपनी कमजोरियों को छिपाना पड़ता है, भावनाओं को व्यक्त करना कमजोरी समझा जाता है।

मनोचिकित्सकों का कहना है कि ये सभी स्थितियां उन्हें मानसिक रूप से कमजोर बनाती जा रही हैं। 
 

पुरुषों में आत्महत्या की दर


अमेरिकन फाउंडेशन फॉर सुसाइड प्रिवेंशन के वाइस प्रेसिडेंट रहे मनोवैज्ञानिक जिल हरकावी-फ्रीडमैन कहते हैं, पुरुषों में अधिक आत्महत्या के मामलों का ट्रेंड लंबे समय से देखा जाता रहा है। इसमें पुरुषों के आत्महत्या के तरीकों पर भी गौर करना जरूरी है। आत्महत्या का प्रयास में पुरुष-महिला दोनों के तरीके को देखें तो पता चलता है कि पुरुष आत्महत्या के तरीके अक्सर अधिक हिंसक होते हैं, जिसमें किसी के हस्तक्षेप करने से पहले मृत्यु की आशंका भी अधिक होती है।

यूके की एक रिपोर्ट के अनुसार वैसे तो साल 1981 के बाद से पुरुष आत्महत्या दर में काफी सुधार है, प्रति एक लाख पर करीब 15.5 मौतें, लेकिन आत्महत्या अभी भी 45 वर्ष से कम आयु के पुरुषों में मौत का एक प्रमुख कारण है, महिलाओं में यह आंकड़ा केवल 5 है। महिलाओं की तुलना में, ऑस्ट्रेलिया में पुरुषों की आत्महत्या दर तीन गुना, अमेरिका में 3.5 गुना, रूस-अर्जेंटीना में चार गुना से अधिक है। 

world mental health day 2025 and karwa chauth mens mental health challenge in india
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां - फोटो : Adobe stock

आत्महत्या में महिलाओं के प्रयास ज्यादा, लेकिन पुरुष गंवाते हैं जान

अब भारत के संदर्भ में देखें तो किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के मनोचिकित्सक डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने एक शोध के आधार पर बताया कि आत्महत्या के प्रयास में महिलाओं की संख्या पुरुषों से अधिक है, लेकिन आत्महत्या कर जान गंवाने वालों में पुरुषों की संख्या ज्यादा है। इसके पीछे वजह यह है कि पुरुष क्षणिक आवेश में फैसला लेकर आत्महत्या कर गुजरते हैं, जबकि महिलाएं भावनात्मक सोच के कारण अंतिम कदम तक नहीं पहुंच पातीं। आत्महत्या से होने वाली मौतों में करीब 75 प्रतिशत पुरुष होते हैं और 25 प्रतिशत महिलाएं।

युवाओं में अवसाद का कारण अधिकतर भविष्य की चिंता, वर्तमान से निराशा और शैक्षणिक दबाव होता है। वहीं, महिलाओं में अवसाद का बड़ा कारण घरेलू हिंसा है। महिलाएं पुरुषों की तुलना में सात से आठ गुना अधिक आत्महत्या का प्रयास करती हैं लेकिन पुरुष अधिक जान गंवाते हैं।

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ डॉ आदर्श कहते हैं,  हर 10 में से तीन व्यक्ति जीवन में किसी न किसी मानसिक समस्या से जूझ रहे हैं। अक्सर लोग तनाव और परिस्थितियों 'का सामना नहीं कर पाते। क्षणिक आवेश में आकर आत्महत्या का 'कदम उठा लेते हैं। डॉ. आदर्श त्रिपाठी ने बताया कि अगर समय रहते उनकी बात समझी जाए. समाधान बताया जाए और भावनात्मक सहारा दिया जाए तो अधिकांश मामलों को रोका जा सकता है। मानसिक बीमारियों का इलाज संभव है। दवाइयों व काउंसलिंग से 99 प्रतिशत मामलों में सुधार देखा गया है।

world mental health day 2025 and karwa chauth mens mental health challenge in india
पुरुषों का मानसिक स्वास्थ्य - फोटो : Freepik.com

मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित चुनौतियां

पुणे स्थित एक अस्पताल में मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट डॉ सुरभि गोस्वामी कहती हैं, पुरुषों के मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित स्थितियां काफी तेजी से बढ़ रही हैं, जिसे टियर-2, टियर-3 वाले शहरों में अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। मेंटल हेल्थ को लेकर अब भी लोगों में जागरूकता की कमी है।

अधिकांश पुरुषों को यह भी नहीं पता होता कि थेरेपी या काउंसलिंग लेना एक सामान्य और प्रभावी उपाय है। भारत में पुरुष मानसिक स्वास्थ्य के लिए सहायता लेने से हिचकते हैं क्योंकि उनमें सामाजिक कलंक का भाव देखा जाता रहा है। अधिकतर पुरुषों को डर रहता है कि अगर वह डॉक्टर के पास जाते हैं तो लोग क्या कहेंगे, उन्हें मानसिक रोगी कहा जाएगा।

world mental health day 2025 and karwa chauth mens mental health challenge in india
मेंटल हेल्थ को न करें अनदेखा - फोटो : Freepik.com

लक्षणों को पहचानें और समय पर लें इलाज

मनोचिकित्सक कहते हैं, लक्षणों की समय रहते पहचान मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए जरूरी है। अकारण नींद न आना, भूख न लगना, चिड़चिड़ापन, अकेलापन महसूस करना, लोगों से दूरी बनाना और मौत की बातें करना, ये ऐसे लक्षण हैं जो दिखते ही तुरंत व्यक्ति को मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए।

विशेषज्ञों का कहना है कि नियमित व्यायाम और अपनों से संवाद, तनाव को काफी हद तक कम कर देता है। सही समय पर काउंसलिंग और दवाओं से जीवन बचाया जा सकता है।




----------------
स्रोत
Why is men’s mental health important


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

विज्ञापन
विज्ञापन

सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें  लाइफ़ स्टाइल से संबंधित समाचार (Lifestyle News in Hindi), लाइफ़स्टाइल जगत (Lifestyle section) की अन्य खबरें जैसे हेल्थ एंड फिटनेस न्यूज़ (Health  and fitness news), लाइव फैशन न्यूज़, (live fashion news) लेटेस्ट फूड न्यूज़ इन हिंदी, (latest food news) रिलेशनशिप न्यूज़ (relationship news in Hindi) और यात्रा (travel news in Hindi)  आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़ (Hindi News)।  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed