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शराब के शौकीन जरूर पढ़ें ये खबर और जान लें किसके लिए हैं ये ज्यादा खतरनाक

Mon, 02 Jul 2018 04:29 PM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 02 Jul 2018 04:29 PM IST
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Why Alcohol Affects Women Differently Than Men
कवि हरिवंश राय बच्चन की मशहूर कृति मधुशाला की ये पंक्तियां बताती हैं कि मयखाना हर इंसान को बराबरी का दर्जा देता है। इंसानों में भेद नहीं करता। मगर, हालिया रिसर्च ने मय यानी शराब की तमाम बुराइयों में एक और बुराई जोड़ दी है। वो ये है कि शराब औरतों और मर्दों में भेदभाव करती है। दुनिया भर में शराब पीने वालों में मर्दों की संख्या औरतों के मुक़ाबले हमेशा ही ज़्यादा रही है। लेकिन अब महिलाओं में भी इसकी लत बढ़ती जा रही है। हालांकि मर्दों के मुकाबले आज भी औरतों की संख्या कम ही है। लेकिन, नई पीढ़ी के लिए ये बात नहीं कही जा सकती।
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खासतौर से 1991 से 2000 के दरमियान पैदा होने वाली लड़कियां आज लड़कों के बराबर ही शराब का सेवन कर रही हैं। कई बार तो वो इस रेस में बाजी ही मार ले जाती हैं। शराब का सेहत पर बुरा असर पड़ता है, ये तो हम सब जानते हैं। लेकिन, गौर करने वाली बात ये है कि शराब महिलाओं की सेहत ज़्यादा तेजी से खराब करती है।
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-अमरीका में साल 2000 से 2015 के बीच शराब पीने वाली करीब 57 फीसद महिलाओं की मौत लिवर खराब होने की वजह से हुई।
-मरने वाली औरतों की उम्र 45 से 64 साल के बीच थी।
-जबकि मर्दों की संख्या 21 फीसद थी।
-25 से 44 साल की उम्र वाली औरतों में ये ग्राफ 8 फीसद ऊपर चढ़ गया था जबकि मर्दों की बात करें, तो दस फीसद की कमी आई थी।

रिसर्च बताती हैं कि महिलाओं में शराब पीने के अजीब-ओ-गरीब तरीकों में भी तेजी से इजाफा हो रहा है। साथ ही अस्पताल के इमरजेंसी वॉर्ड में आने वाले मरीजों में अल्कोहल की ओवरडोज लेने वाली महिलाओं की तादाद पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा होती है।
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क्या है टेलिस्कोपिंग?
मसला ये नहीं है कि औरतें मर्दों के मुकाबले ज़्यादा शराब पी रही हैं। बल्कि चिंता की बात ये है कि औरतों के शरीर पर इसका बुरा असर ज़्यादा जल्दी और तेजी से होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अल्कोहल पचाने के लिए लिवर से अल्कोहल डी-हाइड्रोजिनेस नाम का एंजाइम निकलता है। महिलाओं में ये एंजाइम कम निकलता है। इसकी वजह से उनके लिवर को शराब पचाने के लिए ज़्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इसके अलावा जो औरतें ज़्यादा शराब पीती हैं, उनमें दूसरे नशों की लत पनपने की संभावना भी पुरुषों के मुकाबले ज़्यादा हो जाती है। साइंस की जबान में इसे टेलिस्कोपिंग कहते हैं।

महिलाओं के शरीर पर होने वाले प्रभाव
ज़्यादा शराब पीने से महिलाओं का ना सिर्फ लिवर खराब होता है, बल्कि उनका दिल और नसें भी जल्दी निष्क्रिय होने लगती हैं। हाल के कुछ दशकों तक ये किसी को नहीं पता था कि शराब मर्द और औरत पर अलग-अलग तरह से असर डालती है। इस संबंध में सबसे पहली रिसर्च साल 1990 में की गई थी। असल में सच तो ये है कि 1990 तक मर्दों को जहन में रख कर ही अल्होकल के प्रभावों पर रिसर्च की गई थीं।

वजह ये थी कि अमूमन शराब मर्दों के सेवन की चीज मानी जाती थी। औरतें इसके इस्तेमाल से दूर ही रहती थीं। माना जाता था कि शराब के इफेक्ट के जो रिसर्च मर्दों से जुड़े होंगे, उनसे इसके महिलाओं पर असर का अंदाजा लगाया जा सकता है। कई बरस से ऐसा होता आ रहा था।

रिसर्च में जेंडर गैप पर ध्यान
लेकिन जैसे-जैसे जीवन स्तर बदला, वैसे-वैसे शराब का सेवन करने वालों का आंकड़ा भी बदला। बड़ा बदलाव तो तब आया जब अमरीकी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ ने क्लिनिकल रिसर्च में महिलाओं और किशोरों को शामिल करना जरूरी कर दिया।

इसके साथ ही रिसर्च में जेंडर गैप पर भी ध्यान दिया गया। साल 1970 की एक रिसर्च से ये भी पता चलता है कि जो महिलाएं ख़ुद को पूरी तरह शराब में डुबो लेती हैं, वो अक्सर बचपन में यौन हिंसा का शिकार हुई होती हैं। इस रिसर्च के बाद ही जेंडर आधारित अल्कोहल रिसर्च पर तेजी से काम किया गया। साल 2000 तक ब्रेन मैपिंग से ये बात भी साबित हो गई कि मर्दों के मुकाबले औरतों का जहन शराब को लेकर ज़्यादा संवेदनशील होता है।

 

क्या इसमें कोई पेंच है?
लेकिन बोस्टन यूनिवर्सिटी मेडिकल स्कूल की प्रोफेसर मर्लिन ऑस्कर बर्मन को इसमें पेंच नजर आता है।उन्होंने लंबे समय तक शराब का सेवन करने वालों की ब्रेन मैंपिंग की। उन्होंने पाया कि मर्दों के दिमाग़ में रिवॉर्ड सेंटर छोटा होता है। रिवॉर्ड सेंटर दिमाग का वो हिस्सा है, जो किसी चीज के लिए इंसान को उकसाता है। दिमाग के इसी हिस्से में इंसान फैसले भी करता है, लेकिन शराब पीने वाली महिलाओं में, नॉन अल्कोहलिक महिलाओं के मुकाबले रिवॉर्ड सेंटर ज़्यादा बड़ा था।इससे साबित होता है कि शराब पीने वाली औरतों के दिमाग को कम नुक़सान पहुंचता है। हालांकि वैज्ञानिकों को अभी भी इस अंतर की सटीक वजह पता नहीं चल पाई है।

सामाजिक दबाव में शराब पीना
हाल की रिसर्च से एक और नई बात पता चलती है कि जब शराब की आदी महिलाओं का इलाज होता है तो उनका बर्ताव ज़्यादा बेहतर होता है। शराब पीने की लत पड़ने की वजह भी पुरुषों और औरतों में अलग-अलग होती हैं। औरतें अपना जज़्बाती दर्द दबाने के लिए शराब का सेवन करती हैं। जबकि मर्द सामाजिक दबाव में शराब पीना शुरू करते हैं। दोनों के शराब पीने की वजह समान नहीं हैं, तो दोनों का इलाज भी समान तरीके से नहीं हो सकता।

मिसाल के लिए यौन हिंसा की शिकार महिलाओं में शराब की लत छुड़ाने के लिए उन्हें शराबखोर मर्दों के साथ नहीं रखा जा सकता। वो उनकी मौजूदगी में ख़ुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर सकतीं। ऐसी महिलाओं को प्रेरणादायक कहानियों के जरिये ये एहसास दिलाकर ठीक किया जा सकता है कि इस परेशानी से जूझने वाली वो अकेली नहीं हैं। अब वो दिन भी नहीं रहे, जब माना जाता था कि मर्दों के लिए की गई रिसर्च के नतीजे महिलाओं पर भी लागू कर दिए जाएंगे। अब महिलाओं के लिए अलग से रिसर्च हो रही है।
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