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Stammering in Children: बच्चे को है हकलाने की समस्या तो न करें नजरअंदाज, नहीं कराया इलाज तो होगा पछतावा
Sat, 01 Feb 2025 01:58 PM IST
दीक्षा पाठक
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: दीक्षा पाठक
Updated Sat, 01 Feb 2025 01:58 PM IST
सार
Stammering: इस आदत को रोकने के लिए आपको शुरू से ही एहतियात बरतने की जरूरत है। अगर आपका भी बच्चा बात करने के दौरान हकलाता है तो आपको अपने बच्चे में यह समस्या दिखे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर बच्चे को दिखाना चाहिए। सही समय पर इलाज कराने से यह समस्या खत्म भी हो जाती है।
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बच्चे के हकलाने की समस्या को न करें नजरअंदाज
- फोटो : Adobe Stock
विस्तार
Treatment of Stammering: बचपन में बच्चों के हकलाने या तुतलाने की समस्या बहुत ही सामान्य है। माता-पिता और परिवार वालों को यह आदत काफी क्यूट भी लगती है और वह अपने बच्चे का बार-बार ऐसे बात करते हुए सुनते हैं, लेकिन जब वह बड़े होते हैं तो यही आदत बड़ी समस्या बन जाती है और बच्चे का हर जगह मजाक उड़ाया जाता है। माता-पिता भी बच्चे को दूसरों से बात करने से रोकते हैं, जिससे उन्हें शर्मिंदा न होना पड़े। ऐसे में इस आदत को रोकने के लिए आपको शुरू से ही एहतियात बरतने की जरूरत है। अगर आपका भी बच्चा बात करने के दौरान हकलाता है तो आपको अपने बच्चे में यह समस्या दिखे तो तुरंत डॉक्टर के पास जाकर बच्चे को दिखाना चाहिए। सही समय पर इलाज कराने से यह समस्या खत्म भी हो जाती है।
क्यों हकलाते हैं बच्चे?
सही से शब्द न बोले पाना- हकलाने की समस्या बच्चों में तब होती है, जब वह किसी शब्द को ठीक से नहीं बोल पाते हैं
मानसिक तनाव- कभी -कभी यह समस्या बच्चों में मानसिक तनाव के कारण भी होता है
तांत्रिक यंत्र की दिक्कत- अगर बच्चे के तांत्रिक यंत्र में कोई समस्या होती है तो भी उन्हें हकलाने की समस्या होने लगती है
क्या है हकलाने के लक्षण?
1. बार-बार शब्दों को दोहराना: हकलाने की समस्या में बच्चा शब्दों को दोहराता है और उन्हें ठीक से नहीं बोल पाता है
2. बात पूरी नहीं कर पाना: आपका बच्चा पात पूरी नहीं कर पाता या फिर वाक्यों को अधूरा छोड़ देता है
3. बोलने में झिझक: बच्चा लोगों के सामने बोलने में झिझकता है या फिर रुक-रुक कर बोलता है
क्या है इसका इलाज?
डॉक्टर से कराएं जांच
अगर आपका भी बच्चा हकलाता है तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। इसके साथ ही तुरंत इसका इलाज भी शुरू करा दें।
स्पीक थैरेपिस्ट में मिलें
हकलाने के समस्या से निजात पाने के लिए बच्चे से बोलने की एक्सरसाइज करवानी चाहिए। साथ ही लगभग रोज एक स्क्रिप्ट पढ़वानी चाहिए। यही नहीं, आप स्पीक थैरेपिस्ट से भी मिलकर अपनी समस्या बता सकते हैं।
मानसिक तनाव कम करना
हकलाने की समस्या के कारण अगर बच्चे को किसी प्रकार का मानसिक तनाव हो रहा है तो आप उससे बात करें और उसका ध्यान बाकी चीजों जैसे-खेल, संगीत आदि में लगाएं।
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क्यों हकलाते हैं बच्चे?
सही से शब्द न बोले पाना- हकलाने की समस्या बच्चों में तब होती है, जब वह किसी शब्द को ठीक से नहीं बोल पाते हैं
मानसिक तनाव- कभी -कभी यह समस्या बच्चों में मानसिक तनाव के कारण भी होता है
तांत्रिक यंत्र की दिक्कत- अगर बच्चे के तांत्रिक यंत्र में कोई समस्या होती है तो भी उन्हें हकलाने की समस्या होने लगती है
क्या है हकलाने के लक्षण?
1. बार-बार शब्दों को दोहराना: हकलाने की समस्या में बच्चा शब्दों को दोहराता है और उन्हें ठीक से नहीं बोल पाता है
2. बात पूरी नहीं कर पाना: आपका बच्चा पात पूरी नहीं कर पाता या फिर वाक्यों को अधूरा छोड़ देता है
3. बोलने में झिझक: बच्चा लोगों के सामने बोलने में झिझकता है या फिर रुक-रुक कर बोलता है
क्या है इसका इलाज?
डॉक्टर से कराएं जांच
अगर आपका भी बच्चा हकलाता है तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। इसके साथ ही तुरंत इसका इलाज भी शुरू करा दें।
स्पीक थैरेपिस्ट में मिलें
हकलाने के समस्या से निजात पाने के लिए बच्चे से बोलने की एक्सरसाइज करवानी चाहिए। साथ ही लगभग रोज एक स्क्रिप्ट पढ़वानी चाहिए। यही नहीं, आप स्पीक थैरेपिस्ट से भी मिलकर अपनी समस्या बता सकते हैं।
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मानसिक तनाव कम करना
हकलाने की समस्या के कारण अगर बच्चे को किसी प्रकार का मानसिक तनाव हो रहा है तो आप उससे बात करें और उसका ध्यान बाकी चीजों जैसे-खेल, संगीत आदि में लगाएं।
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