Sonam Raghuwanshi: पहले शादी फिर पति की हत्या, बढ़ते जा रहे इस तरह के मामले; मनोचिकित्सक से समझिए इसका कारण
- इंदौर के राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी का केस इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर मीम्स की भरमार है और कहीं न कहीं लोगों के मन में एक डर भी कि क्या शादी के बाद हम सुरक्षित हैं?
- इस तरह की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं, इसे कैसे रोका जा सकता है, आइए मनोचिकित्सकों से समझते हैं।
विस्तार
Sonam-Raja Raghuwanshi Case: भारतीय समाज में शादी के बंधन को सात जन्मों का साथ माना जाता रहा है, पर आजकल के रिश्ते सात जन्म तो दूर ठीक से सात महीने भी नहीं चल पा रहे हैं। हाल के दिनों में कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां शादी के बाद पत्नी ने पति की हत्या करके ड्रम में पैक कर दिया तो कहीं हनीमून पर पति को मौत के घाट उतार दिया।
इंदौर के राजा रघुवंशी और सोनम रघुवंशी का केस इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ है। सोशल मीडिया पर इसको लेकर मीम्स की भरमार है और कहीं न कहीं लोगों के मन में एक डर भी कि क्या शादी के बाद हम सुरक्षित हैं?
आखिर हमारे समाज को हो क्या गया है? क्या हम मानवीय संवेदनाओं को पूरी तरह से खोते जा रहे हैं?
इन सवालों के जवाब तलाशने से पहले सोनम रघुवंशी केस का पूरा मामला समझ लीजिए।
मध्य प्रदेश में इंदौर शहर के राजा और सोनम रघुवंशी की शादी 11 मई 2025 को धूमधाम से शादी हुई। सबकुछ सही चल रहा था, या शायद सही दिख रहा था... पर अंदरखाने एक खतरनाक साजिश का बीज भी पड़ चुका था। नवजोड़ा मेघालय के शिलांग में हनीमून के लिए जाता है और फिर अचानक 23 मई को कहानी में एक नया मोड़ आ जाता है। दोपहर बाद दोनों का फोन स्विच ऑफ हो जाता है और परिवार की नजर में दोनों लापता हो जाते हैं। पुलिस दोनों की तलाश में जुटती है और फिर दो जून (सोमवार) को 150 फीट गहरी खाई में राजा का शव मिलता है।
इंदौर के इस जोड़े के लापता होने का केस, राजा का शव मिलने के बाद और उलझ गया। मेघालय पुलिस ने ड्रोन्स के जरिए राजा का शव ढूंढा, शव बुरी तरह सड़ चुका था और चेहरा पहचान में नहीं आ रहा था। परिजनों ने एक टैटू के जरिए शव की पहचान की। हालांकि, राजा के शव के आसपास खोजबीन पर भी सोनम का कुछ पता नहीं चला था।
परिजनों का कहना था कि अगर सोनम सुरक्षित होती तो खुद ही किसी से संपर्क करती, लेकिन उसका कोई पता नहीं है, उसे भी लापता या मरा हुआ मान लिया जाता है। फिर अचानक सोनम ने 17 दिन बाद प्रकट होती है और 9 जून को उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में आत्मसमर्पण करती है।
पुलिस का दावा- सोनम ने ही कराई हत्या
जांच में मेघालय पुलिस का दावा है कि सोनम ने ही अपने पति की हत्या कराई। कुछ रिपोर्ट्स तो ये भी कह रहे हैं कि सोनम का एक लड़के के साथ अफेयर चल रहा था, पर संभवत: परिवार के दबाव में आकर सोनम ने राजा से शादी की।
ये भी कहा जा रहा है कि सोनम ने अपने पति राजा रघुवंशी के साथ मेघालय जाने के लिए खुद ही हनीमून का टिकट बुक कराया था। तो क्या इसे पहले से ही रची एक गहरी साजिश के तहत अंजाम दिया जा रहा था? हनीमून के नाम पर मर्डर का प्लान तैयार किया गया था?
अब सवाल ये है कि अगर सोनम का अफेयर था तो राजा से शादी क्यों की? अगर किसी महिला को अपना पति पसंद नहीं है तो वह शादी से पहले इनकार क्यों नहीं करती? इसकी जगह हत्या का विकल्प क्यों चुन लिया जाता है?
ऐसा ही मामला इसी साल मार्च में भी सामने आया था जहां उत्तर प्रदेश के मेरठ में मुस्कान नामक महिला ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर पति की हत्या कर शव को काटकर ड्रम में डाल दिया था और ऊपर से सीमेंट भर दिया था, क्या ये कोई मनोरोग है या कुछ और...
मनोवैज्ञानिकों ने समझाया कारण
इस तरह की बढ़ती घटनाओं को समझने के लिए हमने भोपाल स्थित अस्पताल में वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी से संपर्क किया। उन्होंने जो कारण बताए उसमें आपके सभी सवालों के जवाब छिपे हो सकते हैं।
डॉ सत्यकांत बताते हैं, कई चीजें जांच का विषय हैं जिसपर प्रशासन को निर्णय लेना है, पर अगर प्रथम दृष्टया मनोवैज्ञानिक रूप से देखें तो इसके पीछे का एक बड़ा कारण पुरुष प्रधान मानसिकता को माना जा सकता है। हमारे समाज में अब भी लड़कियों को अपना वर चुनने की स्वतंत्रता नहीं है।
अगर लड़कियों को ये आजादी हो कि सही समय पर बिना किसी दबाव में आए वो शादी के लिए न कर सकें या खुद से अपना साथी चुन सकें तो वह अपनी बातें खुल कर रख पाएंगी। जहां ये आजादी नहीं है वहां पर विकृत और अस्वस्थ मानसिकता पैदा होती है। इस तरह की बढ़ती घटनाएं बायो-साइको-सोशल समस्याएं हैं जिसके रूट्स हमारे समाज में ही छिपे हैं।
इसके अलावा कई सारे वेब सीरीज और सीरियल्स में इस तरह के मामलों को ड्रामा के रूप में महिमामंडित करके दिखाया जाता रहा है, जो कई लोगों के लिए आइडिया का काम करते हैं और विकृत मानसिकता वालों को आत्मविश्वास देते हैं कि हम भी ऐसा कर सकते हैं और किसी को पता नहीं चलेगा।
सिनेमा का इस तरह की मानसिकता को बढ़ाने में बड़ा रोल है, वहां अपराधियों को हीरो बनाकर पेश किया जाता है। उन्हें बहुत चालाक, चतुर और अच्छी प्लानिंग वाला दिखाया जाता है, ये चीजें इस तरह के मामलों को बढ़ाती जा रही हैं।
तलाक को लेकर कलंक का भाव
लखनऊ स्थित मनोचिकित्सक डॉ श्रुति सक्सेना बताती हैं, इस तरह के मामलों का एक कारण ये भी हो सकता है कि हमारे समाज में तलाक को कलंक के रूप में देखा जाता है। समाज-परिवार के दबाव में लोग शादी तो कर लेते हैं पर कुछ समय में ही वो घुटन महसूस करने लगते हैं। कलंक के कारण तलाक ले नहीं सकते, इसलिए अनचाहे रिश्तों से छुटकारा पाने के लिए अपराध का रास्ता अपनाते हैं।
दूसरा सवाल अगर लड़का पसंद नहीं था तो सोनम ने शादी क्यों की? इस सवाल से ही सामाजिक प्रेशर का पता चलता है, जहां महिलाएं परिवार और समाज की अपेक्षाओं के कारण शादी के लिए सहमत हो जाती हैं, भले ही वो उनकी पसंद हो या नहीं। ये विकृत मानसिकता को जन्म देती है।
फिर समाधान क्या है?
डॉ सत्यकांत कहते हैं, सोशल मीडिया और वेब सीरीजों ने इन मामलों को एक्सपोजर दिया है, अपराधों का महिमामंडन किया है, जिसकी वजह से अपराधियों को एक सस्टेनेबिलिटी मिलती है कि हम भी ऐसा कर सकते हैं। हो सकता है कि पहले भी ऐसे मामले होते रहे हों, पर सोशल मीडिया आने के बाद इसपर चर्चा तेज हो गई है।
इसलिए सबसे जरूरी है कि शादी जैसे मामलों में दोनों पक्षों को अच्छे से सुना जाए। दोनों की इच्छा को बिना किसी दबाव को बेहतर ढंग से परिवारों को समझने की जरूरत है। अगर लड़का-लड़की खुलकर अपनी बात रखने लगे, अपनी पसंद नापसंद बताने लगे तो ऐसी घटनाएं कम हो सकती हैं।
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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): इस केस की अभी जांच चल रही है। ये रिपोर्ट प्रथम दृष्ट्या कारणों को समझने के लिए तैयार की गई है।
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