Health Crisis: सियासत में नारी शक्ति पर बहस और झुग्गियों में तपती गर्भवती महिलाएं; हैरान कर देगी ये रिपोर्ट
राष्ट्रीय राजधानी में 40 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा पार करना शुरू हो गया है। ये झुग्गियों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए मुश्किलें बढ़ाने लगा है। दिल्ली के झुग्गियों की ये रिपोर्ट आपको सोचने पर मजबूर कर देगी।
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अभी आधा अप्रैल ही बीता है, लेकिन राजधानी दिल्ली और दिल्लीवासियों की गर्मी-लू से जंग शुरू हो गई है। 19 अप्रैल को दोपहर में दिल्ली का तापमान 38-40 डिग्री दर्ज किया गया। अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने पहले ही बताया था कि मार्च 2026, इतिहास का चौथा सबसे गर्म मार्च रहा है, ऐसे में चिंता जताई जा रही है कि आने वाले महीनों में गर्मी कई रिकॉर्ड्स तोड़ सकती है।
तेज धूप और गर्मी, अपने साथ कई बीमारियां और स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियां भी लेकर आती है। साधन संपन्न लोग एयर कंडीशनर और कूलर जैसी चीजों का इस्तेमाल करके राहत पा लेते हैं, पर झुग्गियों में रहने वालों के लिए ये मौसम किसी आपदा से कम नहीं होता। विशेषकर घर में अगर कोई गर्भवती या बीमार है तो 40 पार करती गर्मी उसके लिए दिक्कतें और भी कई गुना बढ़ा देती है।
एक तरफ जहां देश में इन दिनों महिला आरक्षण कानून और डीलिमिटेशन को लेकर वाद-विवाद जारी है, वहीं महिलाओं की एक दूसरी तस्वीर आपको गंभीरता से सोचने पर मजबूत कर देगी।
झुलसाती धूप, टीन की छत के नीचे भट्ठी सा तपता कमरा और बढ़ते तापमान के कारण होने वाली बीमारियों से मुकाबला करना झुग्गियों में रहने वाले परिवारजनों, विशेषकर गर्भवती महिलाओं के लिए कितनी मुसीबतों से भरा वक्त होता है, इसकी कल्पना करना भी 'व्हाइट कॉलर' वालों के लिए अलग दुनिया के जैसा है।
बढ़ती गर्मी गर्भवती महिलाओं के लिए और भी खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं 40 के पार जाता पारा वैसे तो सभी के लिए खतरनाक माना जाता है, पर गर्भवती महिलाओं की सेहत पर इसका असर और भी गंभीर हो सकता है।
पर्यावरणविद भारती चतुर्वेदी कहती हैं, गर्मी का असर महिलाओं पर कहीं ज्यादा पड़ता है। आंकड़े दिखाते हैं कि जलवायु परिवर्तन से जुड़ी घटनाओं जैसे तेज गर्मी के कारण होने वाली दिक्कतों की वजह से जान गंवाने की आशंका महिलाओं में 14 गुना ज्यादा होती है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए भारती चतुर्वेदी ने कहा, गर्भवती महिला के शरीर पर पहले से ही काफी जोर पड़ रहा होता है। इसपर बढ़ती गर्मी दिल की धड़कन बढ़ाकर इस जोर को और बढ़ा देती है। इसकी वजह से समय से पहले डिलीवरी, मृत शिशु का जन्म और ब्लड प्रेशर के असामान्य होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
गर्मी में वायु प्रदूषण भी अपना रूप बदल लेता है जिससे ओजोन का स्तर बढ़ जाता है। इसमें सांस लेना भी मुश्किल हो जाता है, इन सभी का एक साथ महिलाओं पर असर पड़ता है।
दिल्ली की झुग्गियों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं की चुनौतियां
राष्ट्रीय राजधानी में पारा 40 डिग्री सेल्सियस का आंकड़ा पार करने लगा है। ये झुग्गियों में रहने वाली गर्भवती महिलाओं के लिए मुश्किलें बढ़ाने लगा है। जिस समय महिलाओं को अपनी सेहत पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है, उस गर्भावस्था में झुग्गियों में रहने वाली गर्भवती महिलाएं रोजाना चक्कर आने, रात को नींद न आने और हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं झेल रही हैं।
1. पीटीआई इनपुट के साथ, दक्षिणपुरी के संजय कैंप में रहने वाली 38 हफ्ते की गर्भवती रेखा ने बताया कि उन्हें रात में सोने में काफी दिक्कत होती है।
- गर्मी और उमस के कारण होने वाली बेचैनी की वजह से वह बार-बार जाग जाती हैं।
- गर्भावस्था के दौरान इस बेचैनी के चलते एक जगह चुपचाप लेटे रहना उनके लिए नामुमकिन हो जाता है।
- वह कहती हैं, मुझे अक्सर घबराहट होती है और सोने में परेशानी होती है। गर्मी-उमस से मेरी बेचैनी और बढ़ जाती है। मुझे अक्सर सांस लेने में भी दिक्कत होती है।
- डॉक्टर के पास जाना भी हमारे लिए इतना आसान नहीं है।
2. दक्षिणपुरी के मिनी सुभाष कैंप में रहने वाली 29 हफ्ते की गर्भवती शबनम कहती हैं, मुझे लगातार बेचैनी और घबराहट महसूस होती रहती है। मैं बहुत कम सो पा रही हूं, खासकर जब से मेरा दूसरा ट्राइमेस्टर (गर्भावस्था का दूसरा चरण) शुरू हुआ है। पिछले हफ्ते से अचानक से गर्मी और उमस बहुत ज्यादा बढ़ गई है। मुझे बार-बार सिरदर्द, घबराहट और सांस लेने में भी दिक्कत होने लगी है।
3. 28 साल की आयशा, जो अपने तीसरे ट्राइमेस्टर में हैं उन्होंने भी ऐसी ही चिंताएं व्यक्त कीं। उन्होंने कहा कि रात 1 से 3 बजे के बीच सोना नामुमकिन हो जाता है, जब तक कि गर्मी थोड़ी कम न हो जाए। रोजना बेचैनी और घबराहट सी होती रहती है।
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?
मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि गर्भवती महिलाओं पर भीषण गर्मी के संभावित खतरों का जोखिम कहीं ज्यादा होता है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के कम्युनिटी मेडिसिन सेंटर के प्रोफेसर हर्षल रमेश साल्वे ने कहा कि चक्कर आना, उल्टी होना और बेहोश जैसी समस्याएं ऐसे लक्षण हैं जिन्हें बिल्कुल भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
- आजकल मौसम के मिजाज का अंदाजा लगाना बहुत मुश्किल हो गया है। गर्मी से होने वाला तनाव इसलिए और भी ज्यादा चिंता का विषय बन जाता है।
- अब गर्मियों में शुरुआत से ही बहुत ज्यादा तापमान देखा जा रहा है। मई-जून में हालात और भी बिगड़ने की आशंका है।
- साल्वे ने बताया कि झुग्गी-झोपड़ियों में रहने वाली, बाहर या खेतों में काम करने वाली गर्भवती महिलाएं अक्सर प्रेग्नेंसी के दौरान भी काम करती रहती हैं, जिससे वे गर्मी के असर के प्रति ज्यादा संवेदनशील हो जाती हैं।
नवजात शिशु को भी हो सकता है खतरा
प्रेग्नेंसी वैसे भी एक नाज़ुक दौर होता है, इसलिए बहुत ज्यादा गर्मी मां और नवजात शिशु, दोनों के लिए एक गंभीर खतरा बन जाती है।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि दूसरी तिमाही में बहुत अधिक गर्मी के कारण नवजात शिशु में जन्मजात दोष जैसी दिक्कतें हो सकती है। प्रेग्नेंसी के बाद के चरणों में इसके चलते समय से पहले डिलीवरी या मृत शिशु के जन्म (स्टिलबर्थ) की आशंका भी बढ़ जाती है।
ये हालात सिर्फ मौसम की मार नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता की सच्चाई भी उजागर करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भावस्था के दौरान नियमित शारीरिक जांच, डॉक्टर की सलाह पर आयरन की गोलियां, अच्छी नींद, खूब पानी पीते रहना और तनाव न लेना बहुत जरूरी है। पर झुग्गियों में रहने वाली गर्भवती महिलाएं या दिन भर धूप में काम करके जीवन बसर करने वाली महिलाएं इनका पालन कैसे करें, ये भी बड़ा सवाल है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस, न्यूज एजेंसी पीटीआई इनपुट के आधार पर तैयार किया गया है।
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