No Tobacco Day 2019: क्या आप जानते हैं कि ई-सिगरेट के उपकरण से विस्फोट हो सकता है
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ई-सिगरेट न केवल उपयोगकर्ता, बल्कि गैर-उपयोगकर्ताओं के लिए भी हानिकारक है। इसमें जिन उपकरणों या पदार्थों का इस्तेमाल होता है, उनसे विस्फोट भी हो सकता है। आग लगना तो सामान्य बात है।अगर बच्चे ने ई-सिगरेट में डाली जाने वाली कारटेज पी ली है तो उसकी जान भी जा सकती है। प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ एवं पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के चेयरमैन डॉ. श्रीनाथ रेड्डी ने शुक्रवार को आईसीएमआर द्वारा आयोजित कार्यक्रम में यह बात कही है। उनके मुताबिक, ई-सिगरेट या सामान्य धूम्रपान एकमात्र ऐसी बीमारी है जो शरीर में एक साथ कई जगहों पर वार करती है। डॉ. श्रीनाथ रेड्डी ने आईसीएमआर की उस टीम को हेड किया है, जिसने ई-सिगरेट के विषय पर शुक्रवार को श्वेत पत्र जारी किया है।
डॉ. रेड्डी का कहना है कि इससे शरीर में खून का प्रवाह रुक जाता है। ब्रेन पर असर पड़ता है।अगर मां भी ई-सिगरेट के संपर्क में है तो आने वाले बच्चे में कई तरह के विकार देखने को मिलते हैं। जैसे, नवजात का मस्तिष्क विकसित नहीं हो पाता। अगर घर में कोई ई-सिगरेट का सेवन कर रहा है तो उसका बुरा असर भी बच्चों पर पड़ता है। बड़े लोगों में हार्ट अटैक और ब्रेन स्टोक आम बात है।अभी तक जो रिसर्च सामने आई है, उसमें पता चला है कि जो व्यक्ति ई-सिगरेट का इस्तेमाल करता है, वह दूसरे नशों की ओर तेजी से बढ़ता है।
क्या होती है ई-सिगरेट
ईएनडीएस यानी इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलिवरी सिस्टम को ई-सिगरेट कहा जाता है। यह बैटरी से चलने वाला एक उपकरण हैं, जिसका उपयोग धूम्रपान या वाइप के लिए किया जाता है। इसमें एक सुगंधित घोल, जिसमें निकोटीन की भिन्न सांद्रता होती है, डाला जाता है। यह सिगरेट और तंबाकू उत्पादों के अन्य रूपों में पाया जाने वाला एक नशीला रसायन होता है। निकोटीन को सबसे अधिक नशे की लत वाले पदार्थों में से एक माना जाता है।बाजार में ई-सिगरेट के 460 से ज्यादा ब्रांड हैं। ई-सिगरेट, पाइप, सिगार फ्लैश ड्राइव, फ्लैशलाइट या पेन जैसे आम गैजेट्स से मिलते जुलते हैं।
श्रीनाथ रेड्डी, का कहना है कि इससे बचने का सबसे कारगर उपाए, ऐसे पदार्थों या उपकरणों पर पूर्णरुप से प्रतिबंध लगाना होगा। अंतरराष्ट्रीय अनुभव और भारतीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ई-सिगरेट के प्रति युवाओं की लत का खतरा अधिक है। यह लत नए तंबाकू की लत के लिए प्रवेश द्वार खोल सकता है जो देश के तंबाकू नियंत्रण कानूनों और चल रहे तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रमों व प्रयासों के लिए एक संभावित खतरा है।
धूम्रपान छोड़ना मुश्किल नहीं: डब्लूएचओ
विश्व स्वास्थ्य संगठन का ये सुझाव है कि धूम्रपान छोड़ना कभी भी मुश्किल नहीं होता, क्योंकि धूम्रपान छोड़ने के दो सप्ताहों के भीतर ही फेफड़ों के हालात बेहतर होने लगते हैं। धूम्रपान से होने वाले नुक़सानों में से कुछ को धूम्रपान त्यागने से कम किया जा सकता है। हालांकि पूरी तरह सारे नुकसानों की भरपाई नहीं की जा सकती, इसलिए जितना जल्दी हो सके, धूम्रपान त्यागना ही फेफड़ों की बीमारियों से बचने का सबसे बेहतर उपाय है। एक बार अगर फेफड़ों की बीमारियां हो जाती हैं, तो उन्हें पूरी तरह ठीक करना लगभग असंभव होता है।
धूम्रपान छोड़ने में लोगों की मदद करने के लिए संगठन ने ऐसी निशुल्क टेलीफ़ोन सेवा उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है जिसके जरिए उन लोगों को मनोवैज्ञानिक सहायता दी जाए, जो लोग धूम्रपान छोड़ना चाहते हैं। उन्हें मोबाइल फोन के जरिए मदद देकर भी अच्छे परिणाम मिलते देखे गए हैं। अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार यूनियन की मदद से कई जगह पर ये कार्यक्रम चलाए गए हैं। ये कार्यक्रम तंबाकू सेवन और धूम्रपान करने वालों को बुरी आदतें छोड़ने में ठोस मदद करते हैं। इनमें कोई वित्तीय खर्च भी नहीं आता है।
संगठन ने भारत में मिली कामयाबी की तरफ ध्यान दिलाते हुए कहा कि इस कार्यक्रम का सहारा लेने वालों में चार से छह महीनों के दौरान 19 फ़ीसदी लोगों ने ख़ुद ही धूम्रपान छोड़ने की रिपोर्ट दी है। जबकि आमतौर पर ख़ुद के प्रयासों से धूम्रपान छोड़ने वालों की संख्या पांच प्रतिशत होती है।विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि ये कार्यक्रम भारत, बुर्किना फासो, कोस्टा रीका, फिलीपींस, ट्यूनीशिया में लागू किया गया है।