मेल हार्मोन: डाइट की ये चीजें तो नहीं हैं लो टेस्टोस्टेरोन का कारण? जिसे लोग मानते हैं हेल्दी वही बन रहा विलेन
Testosterone Level: फिनलैंड के वैज्ञानिकों की स्टडी में पाया गया है कि ज्यादा मीट और डेयरी प्रोटीन लेने वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का लेवल अपेक्षाकृत कम था। वहीं, दालों, नट्स और बीजों जैसे प्लांट प्रोटीन लेने वालों में यह थोड़ा अधिक मिला।
विस्तार
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने में हार्मोन्स की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। हार्मोन्स शरीर में बनने वाले केमिकल मैसेंजर होते हैं। ये शरीर के अंगों और कोशिकाओं को निर्देश देते हैं कि कब क्या करना है? मतलब अगर हार्मोन्स में कोई दिक्कत हो जाए तो इससे शरीर के बीच संदेशों का आदान-प्रदान प्रभावित हो सकता है।
पुरुषों की सेहत की बात हो तो टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की सबसे ज्यादा चर्चा होती है। यह सिर्फ यौन इच्छा बनाए रखने वाला हार्मोन नहीं है, मांसपेशियों की मजबूती, हड्डियों के मजबूत रखने और शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखने के लिए भी ये जरूरी है। उम्र बढ़ने के साथ इस हार्मोन का स्तर धीरे-धीरे कम होना स्वाभाविक है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी रोजाना की डाइट भी इसे प्रभावित कर सकती है?
हाल ही में फिनलैंड के वैज्ञानिकों ने एक अध्ययन में कुछ ऐसा ही संकेत दिया है। इसमें शोधकर्ताओं ने बताया है कि कुछ चीजें जिन्हें अक्सर हम सभी हेल्दी मानकर खाते-पीते रहते हैं, वे सेहत को, विशेषतौर पर टेस्टोस्टेरोन के स्तर पर असर डाल सकती हैं। आइए जान लेते हैं कि कौन सी डाइट पुरुषों की सेहत के लिए जरूरी इस हार्मोन के स्तर को प्रभावित करने वाली हो सकती है?
टेस्टोस्टेरोन लेवल को लेकर अध्ययन
टेस्टोस्टेरोन लेवल को लेकर किए गए अध्ययन में पाया गया है कि जो पुरुष अपने भोजन में मीट और डेयरी उत्पादों से ज्यादा प्रोटीन लेते हैं, उनमें टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का स्तर अपेक्षाकृत कम हो सकता है। इसके उलट, जिन पुरुषों के आहार में दालें, अनाज, नट्स और सीड्स जैसे पौधों से मिलने वाले प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, उनमें टेस्टोस्टेरोन का स्तर थोड़ा ज्यादा पाया गया।
फिनलैंड की यूनिवर्सिटी ऑफ ईस्टर्न फिनलैंड के शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में 42 से 60 साल की उम्र के 2,546 पुरुषों को शामिल किया। इन सभी पुरुषों के खानपान को अध्ययन किया गया। इसके बाद उन्हें इस आधार पर चार समूहों में बांटा गया कि वे अपने भोजन से कितना प्रोटीन पशु स्रोतों और कितना पौधों से प्राप्त करते हैं?
- अध्ययन के नतीजों में पाया गया कि जिन पुरुषों के आहार में पशु स्रोतों से मिलने वाले प्रोटीन की मात्रा सबसे ज्यादा थी, उनमें कुल टेस्टोस्टेरोन का स्तर का था।
- वहीं, पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का अधिक सेवन करने वाले पुरुषों में इसका उल्टा परिणाम देखने को मिला। जिन पुरुषों ने पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का सबसे ज्यादा सेवन किया, उनमें टेस्टोस्टेरोन का स्तर बेहतर था।
- हालांकि, विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि दोनों ही स्थितियों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर का अंतर बहुत मामूली था।
पुरुषों के लिए क्यों जरूरी है टेस्टोस्टेरोन हार्मोन?
टेस्टोस्टेरोन पुरुषों की सेहत के लिए सबसे जरूरी हार्मोन्स में से एक है। यह सिर्फ यौन इच्छा को नियंत्रित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि शरीर के कई महत्वपूर्ण कार्यों में इसकी भूमिका होती है। यह हार्मोन मांसपेशियों के विकास, हड्डियों को मजबूत रखने, शरीर में ऊर्जा का स्तर बनाए रखने और लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण में मदद करता है। लाल रक्त कोशिकाएं शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने का काम करती हैं।
- वयस्क पुरुषों में कुल टेस्टोस्टेरोन का स्तर आमतौर पर 10 से 30 नैनोमोल प्रति लीटर के बीच माना जाता है।
- उम्र बढ़ने के साथ पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर स्वाभाविक रूप से कम होने लगता है।
- 30 साल की उम्र के बाद इसमें हर साल औसतन करीब 1 प्रतिशत की गिरावट आ सकती है।
- इसके अलावा मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज जैसी बीमारियां भी टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने का कारण बन सकती हैं।
डेयरी प्रोडक्ट्स का टेस्टोस्टेरोन पर असर
शोधकर्ताओं ने जब आंकड़ों का विश्लेषण किया, तो कुछ और महत्वपूर्ण बातें सामने आईं।
- जिन पुरुषों के भोजन में डेयरी उत्पादों से मिलने वाले प्रोटीन की मात्रा अधिक थी, उनमें कुल टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम पाया गया। खासतौर पर फर्मेंटेड डेयरी उत्पादों के सेवन के साथ ये दिक्कत ज्यादा देखने को मिली। फर्मेंटेड डेयरी उत्पाद बनाने में गुड बैक्टीरिया की मदद से दूध को किण्वित किया जाता है। दही और कुछ प्रकार के चीज इसके उदाहरण हैं।
इसके विपरीत, पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का अधिक सेवन करने वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर अपेक्षाकृत ज्यादा पाया गया। खासतौर पर अनाज के अलावा दूसरे पौधों से मिलने वाले प्रोटीन, जैसे सब्जियां, दालें, नट्स और बीजों का सेवन ज्यादा फायदेमंद पाया गया।
मीट और प्लांट प्रोटीन का अलग-अलग असर?
शोधकर्ताओं के मुताबिक, अभी यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि पशु और पौधों से मिलने वाले प्रोटीन का टेस्टोस्टेरोन के स्तर से असर क्यों अलग-अलग था?
- जो लोग ज्यादा प्लांट बेस्ड प्रोटीन खाते हैं, उनके आहार में आमतौर पर फाइबर और अनसैचुरेटेड फैट की मात्रा भी बढ़ जाती है।
- दूसरी ओर, पशु आधारित प्रोटीन लेने वाले लोगों के भोजन में सैचुरेटेड फैट यानी संतृप्त वसा और कोलेस्ट्रॉल की मात्रा ज्यादा हो सकती है।
- अध्ययन में पाया गया है कि शरीर में इन्फ्लेमेशन, इंसुलिन के काम करने के तरीके और खून में टेस्टोस्टेरोन के संचार की प्रक्रिया भी इसमें भूमिका निभा सकती है।
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स्रोत:
Associations of dietary proteins with serum total testosterone and male hormone-binding globulin concentrations in middle-aged men
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