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कहीं कादर खान वाली बीमारी आपके किसी अपने को तो नहीं, देखिए ये 7 लक्षण और बचाव

Tue, 01 Jan 2019 03:36 PM IST
मंजू ममगाईं बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: मंजू ममगाईं Updated Tue, 01 Jan 2019 03:36 PM IST
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Kader khan death: Know everything about progressive supra nuclear palsy disease
kader Khan - फोटो : twitter

दिग्गज अभिनेता और लेखक कादर खान अब इस दुनिया में नहीं हैं।कनाडा के एक अस्पताल में उन्होंने आखिरी सांस ली।इस खबर की पुष्टि कादर खान के बेटे सरफराज खान ने की। उन्होंने समाचार एजेंसी PTI से कहा, ''मेरे पिता हमें छोड़कर चले गए हैं।लंबी बीमारी के बाद 31 दिसंबर शाम छह बजे (कनाडाई समय) उनका निधन हो गया।वो दोपहर को कोमा में चले गए थे।पिछले 16-17 हफ्तों से अस्पताल में भर्ती थे।''सरफराज ने कहा, ''उनका अंतिम संस्कार कनाडा में ही किया जाएगा। हमारा सारा परिवार यहीं हैं और हम यहीं रहते हैं इसलिए हम ऐसा कर रहे हैं। हम दुआओं और प्रार्थना के लिए सभी का शुक्रिया अदा करते हैं।''

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81 साल के कादर खान को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी, जिसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें नियमित वेंटिलेटर से हटाकर बीआईपीएपी वेटिंलेंटर पर रखा हुआ था।कादर ना केवल हाल में बीमार थे, बल्कि काफी दिनों से एक ऐसी बीमारी से जूझ रहे थे, जो शरीर के कई हिस्सों पर असर डालती है। इसे प्रोग्रेसिव सुपरान्यूक्लियर पॉल्सी (PSP) कहते हैं।

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Kader khan death: Know everything about progressive supra nuclear palsy disease
kader khan - फोटो : twitter

ब्रिटेन की स्वास्थ्य सेवा नेशनल हेल्थ सर्विस के मुताबिक प्रोग्रेसिव सुपरान्यूक्लियर पाल्सी एक दुर्लभ स्थिति है, जिसमें संतुलन, चलने-फिरने, देखने, बोलने और निगलने में दिक्कतें पेश आती हैं।इसकी वजह है वक्त के साथ-साथ दिमाग के सेल्स को नुकसान पहुंचना। 60 साल से ज़्यादा उम्र के लोगों को ये बीमारी ज़्यादा तंग करती है।

किसकी वजह से होती है PSP?

प्रोग्रेसिव सुपरान्यूक्लियर पाल्सी तब होती है, जब तउ नामक प्रोटीन के बिल्ड-अप की वजह से दिमाग के एक हिस्से में ब्रेन सेल्स खराब हो जाते हैं।तउ आम तौर पर दिमाग में होते हैं, और उच्चतर स्तर तक पहुंचने से पहले ये टूटकर बिखर जाते हैं। लेकिन जो लोग PSP से जूझ रहे होते हैं, उनके मामले में ये ठीक तरह से नहीं टूटते और ब्रेन सेल्स में खतरनाक गुच्छे बन जाते हैं।इस बीमारी से ग्रस्त लोगों के मामले में ये गुच्छे अलग आकार, संख्या में हो सकते हैं और साथ ही इनकी जगह भी भिन्न हो सकती है। इसका मतलब ये हुआ कि बीमारी के लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं।

Kader khan death: Know everything about progressive supra nuclear palsy disease
kader khan - फोटो : File Photo

क्या होते हैं लक्षण?

प्रोग्रेसिव सुपरान्यूक्लियर पाल्सी के मामले में लक्षण समय के साथ-साथ बढ़ते और गंभीर होते जाते हैं।शुरुआत में लक्षण दूसरी बीमारियों जैसे ही दिखते हैं, ऐसे में PSP का पता लगाना और मुश्किल हो जाता है।इसके प्रमुख लक्षणों में ये शामिल हैं:

-संतुलन बनाए रखने और चलने-फिरने में परेशानी. बार-बार गिरने का डर बना रहता है
-व्यवहार में बदलाव
-मांसपेशियों में कसावट
-आंखों की मूवमेंट पर काबू ना रहना
-बोलने में दिक्कत या चुप ही रहना
-निगलने में परेशानी
-याददाश्त जाना

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Kader khan death: Know everything about progressive supra nuclear palsy disease
kader khan - फोटो : File Photo

बीमारी का पता कैसे लगता है?

सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि कोई एक ऐसा टेस्ट नहीं, जो प्रोग्रेसिव सुपरान्यूक्लियर पाल्सी की पुष्टि कर सके बल्कि इस बीमारी का पता लगाने के लिए लक्षण और उनकी पड़ताल पर निर्भर रहना होता है।डॉक्टरों को इसका पता लगाने में इसलिए भी परेशानी आती है, क्योंकि बहुत से लक्षण पार्किंसन्स से मेल खाते हैं।साथ ही लक्षण इतने ज़्यादा होते हैं कि बीमारी की पुष्टि करने में काफी समय लग जाता है।कहीं कोई दूसरी बीमारी तो नहीं है, इसका पता लगाने के लिए ब्रेन स्कैन कराने की जरूरत पड़ सकती है। इस बीमारी से ग्रस्त होने की आशंका होने पर न्यूरोलॉजिस्ट की मदद लेनी चाहिए।

Kader khan death: Know everything about progressive supra nuclear palsy disease
अपने बेटों के साथ कादर खान

इस बीमारी का इलाज क्या है?

फिलहाल दुनिया में प्रोग्रेसिव सुपरान्यूक्लियर पाल्सी का कोई इलाज नहीं है लेकिन रिसर्च जारी हैं और नए-नए इलाज की संभावनाओं पर फोकस किया जा रहा है, जिनसे लक्षणों का पता लगाकर काबू पाया जा सके और हालात बिगड़ने से रोका जा सकें।इस बीमारी का सामना करने वालों के लिए इलाज भी अलग-अलग होता है।

ये इलाज आम तौर पर आजमाए जाते हैं:

-संतुलन बनाए रखने के लिए दबाएं
-चलने-फिरने, काम करने में आसानी के लिए फ़िज़ियोथेरेपी की मदद
-बोलने और निगलने में आसानी हो, इसके लिए स्पीच थेरेपी की मदद लेते हैं
-रोज़मर्रा के काम आराम से कर सके, इसके लिए ऑक्यूपेशनल थेरेपी
-बोटोक्स या विशेष चश्मा, जिससे देखने में मदद मिले
-फ़ीडिंग ट्यूब जिनकी मदद से शरीर में पोषक तत्व जा सकें
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