Exclusive: कैंसर को हराने वाले रोहित की कहानी, 'मुसीबतें हर कदम पर इम्तिहान लेती रहीं, हौसला हर बार बढ़ता गया'
आज विश्व कैंसर दिवस है। इस खास मौके पर हम रोहित सिंह के जीवन के अनुभवों के बारे में जानेंगे जिन्होंने बेहद कम उम्र में अपने अडिग हौंसले के चलते न सिर्फ कैंसर को मात दी, बल्कि वह लाखों कैंसर रोगियों के लिए भी उम्मीद बने हैं।
विस्तार
कैंसर, वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है, इससे हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। एक अनुमान के मुताबिक हर छह में से एक मौत के पीछे कैंसर को कारण माना जाता है। भले ही तकनीक और मेडिकल साइंस में प्रगति के चलते दो-तीन दशक पहले की तुलना में अब कैंसर का इलाज अपेक्षाकृत आसान हो गया है, फिर भी अभी भी कैंसर को मौत का पर्यायवाची माना जाता है।
डॉक्टर कहते हैं, कैंसर से अधिक मृत्युदर का प्रमुख कारण इसका समय रहते निदान न हो पाना है, ज्यादातर मामलों में रोगियों को इसका पता ही तब चलता है जब रोग उन्नत स्थिति में पहुंच चुकी होती है, वहां से इलाज करना और जान बचाना कठिन हो जाता है। मतलब, अगर समय रहते कैंसर की पहचान कर ली जाए और रोगी को सही इलाज मिल जाए तो न सिर्फ इसे अन्य हिस्सों में बढ़ने से रोका जा सकता है, साथ ही रोगी की जान बचाना भी आसान हो जाता है।
आज विश्व कैंसर दिवस (World Cancer Day 2023) है। इस खास मौके पर हम रोहित सिंह के जीवन के अनुभवों के बारे में जानेंगे, जिन्होंने बेहद कम उम्र में अपने अडिग हौसले के चलते न सिर्फ कैंसर को मात दी, बल्कि वह लाखों कैंसर रोगियों के लिए भी उम्मीद बने हैं। उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जिले की सिराथू तहसील निवासी रोहित, बोन कैंसर सर्वाइवर हैं, जिनकी हाल ही में दिल्ली के एम्स में सफल सर्जरी हुई है। खेती-किसानी वाले सामान्य परिवार के रोहित के लिए यह लड़ाई भले ही कई मायनों में कठिन रही, पर उनके आत्मविश्वास के सामने कठिनाइयां ज्यादा देर टिक न सकीं। सर्जरी के बाद फिलहाल रोहित पूरी तरह स्वस्थ हैं और नौकरी कर रहे हैं।
आइए, जानते हैं देश के लाखों कैंसर रोगियों के लिए प्रेरणा बने रोहित की कहानी।
जन्मजात दुर्लभ 'ओलियर डिजीज' से पीड़ित हैं रोहित
रोहित, सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक के छात्र रहे हैं। पिछले साल 2022 में, जब जांच के दौरान कैंसर का पता चला तो मानो परिवार के पैरों तले से जमीन खिसक गई। युवा रोहित के सामने पूरे जीवन की उम्मीदें और कल्पनाएं थीं, पर कैंसर का पता चलने पर जैसे आशाओं की नींव में दरार पड़ गई हो। यह उनके लिए दोहरी मार भी थी, क्योंकि वह बचपन से एक बेहद दुर्लभ बीमारी 'ओलियर डिजीज' के भी शिकार थे।
ओलियर डिजीज, हड्डियों से संबंधित एक दुर्लभ विकार है, जिसमें हड्डियों में गांठनुमा असामान्य (नॉनकैंसर) विकास होने लग जाता है। ये वृद्धि आमतौर पर हाथों और पैरों की हड्डियों में होती हैं, लेकिन कुछ मामलों में खोपड़ी, पसलियों और रीढ़ की हड्डी में भी इस तरह की दिक्कत होने का खतरा रहता है। साल 1899 में पहली बार फ्रेंच सर्जन लुइस जेवियर लेओपोल्ड ओलियर ने इस दुर्लभ समस्या का पता लगाया था। इस विकार में हड्डियों के फ्रैक्चर होने का खतरा होता है, उससे भी गंभीर बात ये कि फ्रैक्चर के बाद होने वाली सूजन गांठ में बदलती जाती है।
ओलियर डिजीज के कारण रोहित के दोनों हाथों और उंगलियों में कई गांठे हैं (फोटो में एक्स-रे देखें), जिसके चलते उन्हें जीवन के कई सामान्य कामकाज करने में भी दिक्कत होती है। दुर्भाग्यवश इस बीमारी का कोई पुख्ता इलाज नहीं है, फ्रैक्चर और जटिलताओं को कम करने के लिए सहायक उपचार दी जाती है।
अक्टूबर 2015 में इस बीमारी के रूटीन इलाज के दौरान पता चला कि अब रोहित के कमर में दोनों तरफ मल्टीपल ट्यूमर हो गया है, जिसमें तत्काल सर्जरी की जरूरत पड़ी। इसमें कूल्हों को सहायता देने के लिए परमानेंट रॉड डाली गई। मुसीबतें कम न हुईं, ऑपरेशन के अगले चरण में अप्रैल 2016 में सर्जरी के तीसरे दिन दोनों किडनियों ने काम करना बंद कर, इसका भी इलाज चला। डॉक्टर्स की मेहनत और ईश्वर की मेहर रंग लाई, धीरे-धीरे स्वास्थ्य में सुधार हुआ और जीवन वापस पटरी पर लौटी....।
पर अभी तो ये बस शुरुआत थी, रोहित के हौसले की परीक्षा लेने के लिए ईश्वर ने कई और इंतजाम किए हुए थे। जनवरी 2021 में, ओलियर डिजीज की जटिलताओं के कारण एक बार फिर हाथों में सूजन और तेज दर्द की समस्या बढ़ गई, हालांकि इस बार सबकुछ पहले जैसा सामान्य नहीं था। जांच के दौरान डॉक्टर्स को ट्यूमर के कैंसर में बदलने का अंदेशा हुआ जिसके इलाज के लिए उन्होंने दिल्ली एम्स जाने की सलाह दी।
कोरोना महामारी ने और बढ़ा दी थीं चुनौतियां
यह कोरोना का गंभीर दौर भी था, रोहित कहते हैं-
"कोरोना काल में घर से बाहर निकलने में भी डर था, दिल्ली तो संक्रमण के पीक वाली जगह थी। महामारी ने करीब एक साल इलाज को डिले कर दिया, इस दौरान हाथों में कई नए ट्यूमर बन गए थे और पुराने ट्यूटर का आकार भी बढ़ रहा था। 2022 की शुरुआत में जब एम्स पहुंचा तो जांच में डॉ शाह आलम और उनकी टीम ने कैंसर की आशंका जता दी। 5 मई 2022 को अगली जांच के लिए समय दिया गया। 9 मई को डॉक्टर्स की टीम ने जांच की रिपोर्ट का रिव्यु किया और 13 मई को मुझे फिर बुलाया गया।
13 मई को तकरीबन 11:30 बजे मैं डॉक्टर की केबिन में पहुंचा। उन्होंने पूछा, आपके साथ कौन है? मैं उस दिन अकेला था और अक्सर एम्स अकेला ही जाता था, क्योंकि इलाज के लिए हर तीसरे महीने जाना होता था। शायद मैं अकेला था, इस बात को समझते हुए डॉ संदीप ने बस इतना कहा, आपको जल्द से जल्द सर्जरी की जरूरत है। मैं कारण जानना चाह रहा था, मेरे ज्यादा पूछने पर उन्होंने रिपोर्ट डॉ शाह आलम को सौंप दी, उन्होंने बताया- आपको बोन कैंसर (सरकोमा मेलेग्नेंसी) है, पर ज्यादा घबराने की बात नहीं है, यह सीमित हिस्से में है जिसे सर्जरी करके निकाल दिया जाएगा।''
सारकोमा मेलेग्नेंसी, बोन कैंसर का एक प्रकार है, जिसमें मेलेग्नेंट ट्रांसफॉर्मेशन होने लगता है। इस स्थिति में कोशिकाओं में असामान्य रूप से विभाजन होने लगता है जिससे आस-पास के ऊतकों में इसके फैलने का खतरा बढ़ जाता है। सारकोम हड्डियों, कार्टिलेज, फैट, मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं या अन्य संयोजी ऊतकों में होने वाली स्थिति है। इस प्रकार के कैंसर में अगर समय रहते सर्जरी करके प्रभावित ऊतकों को न निकाला जाए तो बहुत तेजी से कैंसर बढ़ने का खतरा रहता है। रोहित के केस में कैंसर कोशिकाएं हड्डियों में विकसित हुई थीं।
कैंसर और ऑपरेशन के बारे में सुनते ही, एक पल को ऐसा लगा जैसे मेरे कान सुन्न हो गए हों, कुछ सुनाई नहीं दे रहा था। कई सवालों जैसे- परिवार की स्थिति, ऑपरेशन कैसे होगा, क्या मैं जिंदा बच पाऊंगा, कैंसर तो मौत का दूसरा नाम है, क्या मेरा सफर यहीं तक था? इन ख्यालों ने जैसे अचानक दिमाग पर अटैक कर दिया था। डॉक्टर्स, शायद मेरे चेहरे की उड़ी हवाइयों और मनोदशा से मेरी हालात का अंदाजा लगा चुके थे, जो स्वाभाविक भी था।
30 मई को सर्जरी की डेट मिली। कैंसर में लाखों का खर्च आता है, इतने पैसों का इंतजाम कैसे हो पाएगा? मेरे सामने अब यह एक और बड़ी चुनौती थी। डॉक्टर्स ने खुद पूछा- परिवार की आर्थिक स्थिति कैसी है? और उन्होंने ही मुझे प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना के बारे में बताया। साथियों की मदद से दौड़ भाग करके आयुष्मान कार्ड बन गया, मेरी जान में जान आई, पैसों की चिंता जो दूर हो गई थी।
ऑपरेशन वैसे भी डरावना होता है, ये तो कैंसर का था
30 मई को कैंसर की सर्जरी थी, तो मैं 24-25 में दिल्ली पहुंच गया। 27 मई को दोबारा रूटीन जांच हुई, हालांकि रिपोर्ट देखने के बाद डॉक्टर्स ने कुछ कारणों से सर्जरी की डेट को आगे बढ़ा दिया। अब 23 जुलाई की तारीख दी गई। एक-एक दिन काटना कठिन था, पर हिम्मत भी रखनी थी, क्योंकि मेरे हिम्मत से ही परिवार की हिम्मत जुड़ी थी।
15 जुलाई को घर से फिर दिल्ली पहुंच गया, फिर कई जांच हुए। ऑपरेशन की सुबह एक अजीब सा डर था।
ऑपरेशन थियेटर में डॉ शाह आलम ने पूछा, क्या हुआ रोहित डर लग रहा है? मैंने चेहरे के भाव को मुस्कान से छिपाने की कोशिश की, डॉक्टर समझ गए, मुस्कुरा रहे थे। इस बीच धीरे-धीरे एनेस्थीसिया का असर हो रहा था। डॉक्टर्स के चेहरे और आवाजें धुंधली पड़ रही थीं, इसके बाद अब सबकुछ धरती के भगवान के हाथ में था। मैं बेहोशी की स्थिति में जा रहा था...
अगली बार जब नींद खुली तो लोग आसपास थे, कुछ मुस्कुरा रहे थे, कुछ की आंखों में खुशी के आंसू थे, ये कैंसर से जीत की खुशी का पल था। लगभग 10 दिनों में डॉक्टर्स ने अस्पताल से छुट्टी दे दी। मैं अब पूरी तरह स्वस्थ था। परिवार, साथियों के प्यार और आशीर्वाद, डॉक्टर्स की मेहनत और प्रभु की शक्ति से मिले आत्मविश्वास ने कैंसर को धराशाई कर दिया था। सोशल मीडिया के माध्यम से मिले कई दोस्तों ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनाए रखा।
कैंसर रोगियों के लिए प्रेरणा हैं रोहित
रोहित की ये कहानी बताती है कि हौसले मजबूत हों तो कैंसर जैसे जानलेवा दुश्मन को भी हराया जा सकता है। देश में अब भी ज्यादातर रोगी कैंसर के निदान के बारे में सुनते ही हिम्मत हार जाते हैं, ऐसे लोगों के लिए रोहित प्रेरणा हैं। कैंसर विशेषज्ञों का भी कहना है कि सभी लोगों को अपने जोखिम कारकों को ध्यान में रखते हुए बचाव के उपाय करते रहने चाहिए।
महिलाओं को सर्वाइकल और पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर की कुछ वर्षों के अंतराल पर डॉक्टरी सलाह के आधार पर जांच जरूर कराते रहना चाहिए। धूम्रपान-शराब से बिल्कुल दूर रहें, ये कई प्रकार के कैंसर के कारक हैं। लाइफस्टाइल और आहार को ठीक रखकर कैंसर के जोखिमों को कम किया जा सकता है।
जब कभी हिम्मत कमजोर पड़े तो रोहित की ये कहानी पढ़ लीजिए, शरीर में नई ऊर्जा और आत्मविश्वास का संचार होगा।
सही जानकारी, लक्षणों की समय पर पहचान और इलाज ही कैंसर से बचाव मूलमंत्र है, इसे ध्यान रखें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सुझाव और कैंसर सर्वाइवर द्वारा साझा की गई जानकारियों के साथ मेडिकल रिपोर्ट्स/अध्ययनों के आधार पर तैयार किया गया है। लेख का उद्देश्य स्वास्थ्य के प्रति लोगों को जागरूक करना है।
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