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अगर लेते हैं ऐसी डाइट तो जल्द बदल लें, वरना शुगर की बीमारी होना तय
टीम डिजिटल/ अमर उजाला
Updated Tue, 09 Jan 2018 02:19 PM IST
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आपने कभी केटोजेनिक डाइट के बारे में सुना है? कैटोजेनिक डाइट वह होता है, जिसमें कार्बोहाइड्रेट युक्त खाद्य पदार्थ शामिल नहीं होते हैं। सीनियर न्यूट्रीशनिस्ट अंशुल जयभारत कहती हैं कि शरीर को कार्बोहाइड्रेट और विटामिन्स प्रदान करने वाली डाइट, जैसे- रोटी, चावल, आलू, फल आदि को पूरी तरह से हटा दिया जाता है।
इनसे शरीर को सामान्य शुगर की प्राप्ति होती है। कैटोजेनिक डाइट प्रोटीन और वसा के इर्द-गिर्द काम करती है। यह डाइट भारतीय डाइट नहीं है। इसमें चीज, बटर, अंडा, नट्स आदि शामिल होते हैं। जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा नहीं मिल पाती है, तो हमारा शरीर कार्बोहाइड्रेट्स से ही अतिरिक्त ऊर्जा प्राप्त करता है।
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इनसे शरीर को सामान्य शुगर की प्राप्ति होती है। कैटोजेनिक डाइट प्रोटीन और वसा के इर्द-गिर्द काम करती है। यह डाइट भारतीय डाइट नहीं है। इसमें चीज, बटर, अंडा, नट्स आदि शामिल होते हैं। जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा नहीं मिल पाती है, तो हमारा शरीर कार्बोहाइड्रेट्स से ही अतिरिक्त ऊर्जा प्राप्त करता है।
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कार्बोहाइड्रेट्स शरीर को ऊर्जा प्रदान करने वाले प्राथमिक स्रोत हैं। जब हम चावल, सब्जियां, फल आदि नहीं खाते या बहुत कम मात्रा में खाते हैं, तो शरीर में कार्बोहाइड्रेट्स की कमी हो जाती है। ऐसे में यदि हम कोई ऐसी डाइट लेते हैं,
जिसमें फैट और प्रोटीन सर्वाधिक मात्रा में होती है और विटामिन्स, मिनरल्स आदि काफी कम मात्रा में होते हैं, तो वह डाइट हमारे शरीर को काफी नुकसान पहुंचाती है। जब आप सिर्फ फैट और प्रोटीन से भरपूर पदार्थ लेते हैं, तो शरीर में कीटोप्रोटीन बनने लगता है। इससे शरीर को उस समय ज्यादा नुकसान पहुंचता है, जब एक्सरसाइज या उपवास के चक्कर में नियमित रूप में ऐसी डाइट लेने लगते हैं।
जिसमें फैट और प्रोटीन सर्वाधिक मात्रा में होती है और विटामिन्स, मिनरल्स आदि काफी कम मात्रा में होते हैं, तो वह डाइट हमारे शरीर को काफी नुकसान पहुंचाती है। जब आप सिर्फ फैट और प्रोटीन से भरपूर पदार्थ लेते हैं, तो शरीर में कीटोप्रोटीन बनने लगता है। इससे शरीर को उस समय ज्यादा नुकसान पहुंचता है, जब एक्सरसाइज या उपवास के चक्कर में नियमित रूप में ऐसी डाइट लेने लगते हैं।
कुछ मेडिकल परिस्थितियां होती हैं, जैसे मिर्गी आना, दिमाग से संबंधित कोई परेशानी आदि में इस डाइट को लेने की सलाह दी जाती है। इसे सिर्फ चिकित्सकीय सलाह पर ही लेना चाहिए। केटोजेनिक डाइट में वसा अधिक और बहुत ही कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट पाया जाता है। शरीर में ग्लूकोज ऊर्जा का मुख्य स्रोत नहीं है। इस कारण से शरीर ऊर्जा बनाने के लिए संग्रहित वसा को जलाना शुरू कर देता है। अंततः यह शरीर की कई मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाती है।
रोटी और चावल कार्बोहाइड्रेट्स से समृद्ध होता है, जिससे हमें पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यदि हम खराब वसा और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, तो उबकाई की समस्या हो सकती है। छोटी आंत में इनका पाचन काफी जटिल हो जाता है।
रोटी और चावल कार्बोहाइड्रेट्स से समृद्ध होता है, जिससे हमें पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा की प्राप्ति होती है। यदि हम खराब वसा और प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थों का सेवन करते हैं, तो उबकाई की समस्या हो सकती है। छोटी आंत में इनका पाचन काफी जटिल हो जाता है।