अमर उजाला विशेष: हृदय रोग विशेषज्ञों ने बताया, कैसे रखें दिल का ख्याल?

हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Abhilash Srivastava Updated Wed, 29 Sep 2021 06:53 PM IST

सार

  • अमर उजाला ने उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स के साथ मिलकर एक चर्चा का आयोजन किया जिसमें स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हृदय रोग के तमाम कारकों और उनसे बचाव के बारे में विस्तार से चर्चा की।
  • 25 साल या उससे कम उम्र के लोगों में भी हृदय रोगों के मामले देखे जा रहे हैं।
  • कम उम्र के हृदय रोगियों में धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता  की आदत को कॉमन पाया गया है।
कैसे रखें दिल का ख्याल?
कैसे रखें दिल का ख्याल? - फोटो : Pixabay
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विस्तार

हृदय रोग दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर बीमारियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक हृदय रोग विश्वभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। हर साल इससे लाखों लोगों की जान चली जाती है। साल 2019 में आंकड़े देखें तो पता चलता है कि इस वर्ष 1.79 करोड़ से अधिक लोगों की मौत अकेले हृदय रोगों के कारण हो गई थी। कोरोना जैसी महामारी में, जिसने हृदय को गंभीर रूप से प्रभावित किया है, इन रोगों का खतरा पहले की तुलना में ज्यादा बढ़ गया है। इसके अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञ खराब जीवनशैली, शारीरिक निष्क्रियता और खान-पान में गड़बड़ी को हृदय रोग के बढ़ते खतरे का मुख्य कारक मानते हैं।
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एक अनुमान के मुताबिक अगर हृदय रोग के जोखिमों को कम करने के प्रयास नहीं किए गए तो साल 2030 तक हर तीन में से एक व्यक्ति में हृदय रोग हो सकता है। हृदय रोगों के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस मनाया जाता है।


हृदय रोगों के बढ़ते खतरे के बारे में लोगों को जागरूक करने के लिए अमर उजाला ने उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स के साथ मिलकर एक चर्चा का आयोजन किया जिसमें स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने हृदय रोग के तमाम कारकों और उनसे बचाव के बारे में विस्तार से चर्चा की। इस वेबिनार कार्यक्रम में उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने शिरकत की और सभी जरूरी सवालों के जवाब दिए। आइए इस वेबिनार में स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा बताई गई महत्वपूर्ण बातों को जानते हैं।

हृदय रोगों का खतरा
हृदय रोगों का खतरा - फोटो : iStock
किस उम्र में हृदय रोगों का खतरा होता है सबसे अधिक?
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स, दिल्ली के डॉक्टर नित्यानंद बताते हैं, एक से दो दशक पहले तक हृदय रोगों को बढ़ती उम्र की बीमारी मानी जाती थी, हालांकि मौजूदा समय में बहुत ही कम उम्र के लोगों में हृदय रोग, हार्ट अटैक आदि का खतरा बढ़ गया है। डॉ नित्यानंद बताते है इसके लिए हमारी खराब जीवनशैली को एक महत्वपूर्ण कारक माना जा सकता है। डॉ शुभम अग्रवाल ( उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स, काशीपुर) कहते हैं, कई केस ऐसे देखने को मिले हैं जिसमें 25 साल या उससे कम उम्र के लोगों में भी हृदय रोगों के मामले देखे गए हैं। इसके लिए हमारे खान-पान को मुख्य कारण माना जा सकता है। तला-भुना, फास्ट फूड आदि का सेवन कम उम्र में ही इन गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है। हृदय रोगों के खतरे से बचे रहने के लिए चिकनी चीजों और तेल की मात्रा को कम करें।

कैसे जानें कि आप हृदय रोगों के शिकार हैं?
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स, हल्द्वानी में वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ प्रमोद जोशी बताते हैं, हृदय रोगों के खतरे को जानने के लिए सबसे पहले इसके लक्षणों के बारे में जानना आवश्यक है। यदि छाती और जबड़ों में दर्द या फिर गैस की समस्या लगातार बनी हई है तो इसे हृदय रोगों का शुरुआती संकेत माना जा सकता है, इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें। अक्सर लोग गैस की समस्या समझकर इसे ठीक करने वाली दवाइयां ले लेते हैं, यह नुकसानदायक हो सकता है। जिन लोगों को बताए गए लक्षणों का अनुभव होता हो उन्हें ईसीजी जांच जरूर करा लेनी चाहिए, जिससे समय रहते समस्या का निदान और इलाज हो सके।  

हृदय रोगों के संभावित जोखिम कारक
हृदय रोगों के संभावित जोखिम कारक - फोटो : iStock
ब्लड प्रेशर है साइलेंट किलर
डॉक्टर नित्यानंद कहते हैं, ब्लड प्रेशर को हृदय रोगों के प्रमुख कारकों में से एक माना जा सकता है। ब्लड प्रेशर शरीर के मुख्य अंगों जैसे कि मस्तिष्क, हृदय, किडनी और आंखों को नुकसान पहुंचा सकता है। ब्लड प्रेशर को ठीक करने के लिए कोई दवा नहीं है, दवाइयों से सिर्फ लक्षणों को कम किया जा सकता है, इसलिए दवाइयों को लगातार और समय पर लेते रहें। हाई ब्लड-प्रेशर की स्थिति शरीर, विशेषकर हृदय के लिए ज्यादा नुकसानकारक हो सकती है। 

पुरुष या महिला, किसमें हृदय रोग का खतरा अधिक होता है?
उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स, कैथल के डॉ भवानी शंकर कहते हैं, मेनोपॉज के पहले पुरुषों की तुलना में महिलाओं में हृदय रोग का खतरा कम होता है। इसका मुख्य कारण महिलाओं में पाया जाने वाला एस्ट्रोजन हार्मोन है, जो उन्हें हृदय रोगों से सुरक्षा देता है। हालांकि मेनोपॉज के बाद पुरुष और महिला दोनों में खतरा लगभग बराबर हो जाता है। हृदय रोग आनुवांशिक भी हो सकता है, कुछ बच्चों में जन्मजात हृदय रोगों की समस्या हो सकती है। 
 

हृदय रोगों में अखरोट के फायदे
हृदय रोगों में अखरोट के फायदे - फोटो : istock
नट्स का सेवन करें लेकिन संतुलित मात्रा में
डॉ भवानी शंकर कहते हैं, हृदय रोगों के खतरे से बचे रहने के लिए कई अध्ययनों में नट्स यानी कि सूखे मेवे खाने के फायदों का जिक्र मिलता है, हालांकि हमें हमेशा इनकी मात्रा पर ध्यान रखना चाहिए। उन नट्स का सेवन करें जो शरीर में गुड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को बढ़ाने में सहायक हों, अध्ययनों में पिस्ता में ऐसे लाभ का जिक्र मिलता है। नट्स सेहत के लिए अच्छे हैं लेकिन अत्यधिक सेवन से उसके भी नुकसान हो सकते हैं, क्योंकि इनमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अधिक होती है। हृदय के स्वास्थ्य को देखते हुए बादाम और अखरोट खा सकते हैं।  

धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता दोनों है खतरनाक
डॉ भवानी शंकर बताते हैं, कम उम्र के हृदय रोगियों में धूम्रपान और शारीरिक निष्क्रियता  की आदत को कॉमन पाया गया है। धूम्रपान हृदय रोगों का सबसे बड़ा जोखिम कारक माना जाता है, इससे तुरंत दूरी बना लेनी चाहिए। वहीं उजाला सिग्नस हॉस्पिटल्स, आगरा के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर विनेश जैन कहते हैं जिन लोगों में हृदय रोगों का निदान हो चुका हो उन्हें निरंतर डॉक्टर के संपर्क में रहना चाहिए। नियमित अंतराल पर कोलेस्ट्रॉल की जांच कराते रहें और स्वस्थ जीवनशैली का पालन करें। जीवनशैली को बेहतर रखकर हृदय रोगों के खतरे से बचा जा सकता है। 
 
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