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नियमित व्यायाम कर सकता है कैंसर की रोकथाम
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
Updated Thu, 13 Dec 2012 10:14 AM IST
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वैसे तो कैंसर का उपचार हमेशा रिस्क से भरा होता है और बहुत से मामलों में अभी तक कोई महत्वपूर्ण सफलता अब तक हाथ न लगी हो, लेकिन कुछ ऐसे कैंसर हैं जिनका व्यायाम से बचाव मुनासिब है।
एंडोमेट्रियल कैंसर
येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने अपने एक अध्ययन के आधार पर माना कि जो महिलाएं सप्ताह में 150 मिनट तक व्यायाम करती हैं, उनमें एंडोमेट्रियल (गर्भाशय) कैंसर का रिस्क 34 प्रतिशत कम होता है।
शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से कम है, उनमें इस बीमारी का खतरा 73 प्रतिशत कम हो जाता है। और बीएमआई संतुलित रखने में व्यायाम की अहम भूमिका है।
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कोलोरेक्टल या बॉवेल कैंसर
जो लोग प्रतिदिन 30 मिनट या इससे अधिक व्यायाम करते हैं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं, उनमें आंतों के कैंसर यानी कोलोरेक्टल या बॉवेल कैंसर की आशंका बहुत कम होती है। कुछ समय पहले ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
विशेषज्ञों की मानें तो कोलोरेक्टल कैंसर के रिस्क को कम करने के लिए वे व्यायाम जिनसे खूब पसीना निकले और श्वास से संबंधी व्यायाम इस कैंसर के रिस्क को कम करने के लिए उपयुक्त हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने भी अपने शोध में माना है कि बहुत अधिक शारीरिक व्यायाम करने वाले लोगों को कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा 40 प्रतिशत तक कम होता है। यह शोध उन्होंने इस कैंसर से पीड़ित 870 लोग और 996 स्वस्थ लोगों पर यह परीक्षण किया जिसमें उन्होंने उनकी जीवनशैली, व्यायम और खानपान का अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला है।
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट कैंसर के उपचार से संबंधित कई शोधों ने यह माना है कि नियमित व्यायाम से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर के अनुसार, जो पुरुष नियमित रूप से व्यायाम करते हैं उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा अपेक्षाकृत कम होता है। न सिर्फ व्यायाम बल्कि बागबानी और सैर जैसी गतिविधियों से भी इस कैंसर के खतरे को कम करने में आसानी हो सकती है।
इसके अलावा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने भी अपने शोध के दौरान माना है कि रोज तीन घंटे कड़ा शारीरिक व्यायाम करने वाले लोगों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 60 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर
जिम महिलाओं के परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर हो चुका है, वे अगर प्रतिदिन 20 मिनट व्यायाम करें तो उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा एक चौथाई घट जाता है।
दूसरी ओर, 'क्लीनिकल ओशयनोलॉजी' नामक पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अगर महिलाएं मेनोपॉज के बाद भी हल्के और आसान व्यायाम करें तो उनके हार्मोन और प्रोटीन स्तरों में होने वाले परिवर्तन से ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क कम हो जाता है।
इसके अलावा आस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने भी अपनी शोध में माना कि अगर लड़कियां किशोरावस्था से ही व्यायाम को अपनी रोज की दिनचर्या में ढाल लें को भविष्य में उन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका कम होती है। केवल 30 मिनट तक रोज व्यायाम करने से इस कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
लंग कैंसर
व्यायाम से लंग कैंसर यानी फेफड़ों के कैंसर की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिनीसोटा के शोधकर्ताओं ने 36,929 लोगों पर 16 साल तक किए अपने अध्ययन के आधार पर इस बात का खुलासा किया। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि व्यायाम के अलावा श्वास संबंधी योगासनों से भी इस बीमारी से बचाव में आसानी होती है।
अधिक धूम्रपान करने वाले लोग अगर स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और नियमित व्यायाम करें तो भी वे फेफड़े के कैंसर से अपना बचाव कर सकते हैं, अमेरिकन जर्नल ऑफ एपिडेनियोलॉजी ने अपने शोध में इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है।
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एंडोमेट्रियल कैंसर
येल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ ने अपने एक अध्ययन के आधार पर माना कि जो महिलाएं सप्ताह में 150 मिनट तक व्यायाम करती हैं, उनमें एंडोमेट्रियल (गर्भाशय) कैंसर का रिस्क 34 प्रतिशत कम होता है।
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शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन महिलाओं का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 25 से कम है, उनमें इस बीमारी का खतरा 73 प्रतिशत कम हो जाता है। और बीएमआई संतुलित रखने में व्यायाम की अहम भूमिका है।
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कोलोरेक्टल या बॉवेल कैंसर
जो लोग प्रतिदिन 30 मिनट या इससे अधिक व्यायाम करते हैं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाते हैं, उनमें आंतों के कैंसर यानी कोलोरेक्टल या बॉवेल कैंसर की आशंका बहुत कम होती है। कुछ समय पहले ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में यह रिपोर्ट प्रकाशित हुई थी।
विशेषज्ञों की मानें तो कोलोरेक्टल कैंसर के रिस्क को कम करने के लिए वे व्यायाम जिनसे खूब पसीना निकले और श्वास से संबंधी व्यायाम इस कैंसर के रिस्क को कम करने के लिए उपयुक्त हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के शोधकर्ताओं ने भी अपने शोध में माना है कि बहुत अधिक शारीरिक व्यायाम करने वाले लोगों को कोलोरेक्टल कैंसर का खतरा 40 प्रतिशत तक कम होता है। यह शोध उन्होंने इस कैंसर से पीड़ित 870 लोग और 996 स्वस्थ लोगों पर यह परीक्षण किया जिसमें उन्होंने उनकी जीवनशैली, व्यायम और खानपान का अध्ययन करके यह निष्कर्ष निकाला है।
प्रोस्टेट कैंसर
प्रोस्टेट कैंसर के उपचार से संबंधित कई शोधों ने यह माना है कि नियमित व्यायाम से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम किया जा सकता है। इंटरनेशनल जर्नल ऑफ कैंसर के अनुसार, जो पुरुष नियमित रूप से व्यायाम करते हैं उनमें प्रोस्टेट कैंसर का खतरा अपेक्षाकृत कम होता है। न सिर्फ व्यायाम बल्कि बागबानी और सैर जैसी गतिविधियों से भी इस कैंसर के खतरे को कम करने में आसानी हो सकती है।
इसके अलावा कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय ने भी अपने शोध के दौरान माना है कि रोज तीन घंटे कड़ा शारीरिक व्यायाम करने वाले लोगों में प्रोस्टेट कैंसर का खतरा 60 प्रतिशत तक कम हो सकता है।
ब्रेस्ट कैंसर
जिम महिलाओं के परिवार में किसी को ब्रेस्ट कैंसर हो चुका है, वे अगर प्रतिदिन 20 मिनट व्यायाम करें तो उनमें ब्रेस्ट कैंसर का खतरा एक चौथाई घट जाता है।
दूसरी ओर, 'क्लीनिकल ओशयनोलॉजी' नामक पत्रिका में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अगर महिलाएं मेनोपॉज के बाद भी हल्के और आसान व्यायाम करें तो उनके हार्मोन और प्रोटीन स्तरों में होने वाले परिवर्तन से ब्रेस्ट कैंसर का रिस्क कम हो जाता है।
इसके अलावा आस्ट्रेलिया के क्वींसलैंड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने भी अपनी शोध में माना कि अगर लड़कियां किशोरावस्था से ही व्यायाम को अपनी रोज की दिनचर्या में ढाल लें को भविष्य में उन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने की आशंका कम होती है। केवल 30 मिनट तक रोज व्यायाम करने से इस कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
लंग कैंसर
व्यायाम से लंग कैंसर यानी फेफड़ों के कैंसर की आशंका को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यूनिवर्सिटी ऑफ मिनीसोटा के शोधकर्ताओं ने 36,929 लोगों पर 16 साल तक किए अपने अध्ययन के आधार पर इस बात का खुलासा किया। विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि व्यायाम के अलावा श्वास संबंधी योगासनों से भी इस बीमारी से बचाव में आसानी होती है।
अधिक धूम्रपान करने वाले लोग अगर स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और नियमित व्यायाम करें तो भी वे फेफड़े के कैंसर से अपना बचाव कर सकते हैं, अमेरिकन जर्नल ऑफ एपिडेनियोलॉजी ने अपने शोध में इस रिपोर्ट को प्रकाशित किया है।