बिग बॉस सीजन 12 की विजेता और मशहूर टीवी अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ को लिवर में ट्यूमर हो गया है। दीपिका के पति शोएब इब्राहिम ने एक पोस्ट में इसकी जानकारी दी है।
Dipika Kakar: अभिनेत्री दीपिका कक्कड़ को हुआ लिवर में 'टेनिस बॉल' जितना बड़ा ट्यूमर, कहीं ये कैंसर तो नहीं?
शरीर के अन्य हिस्सों की ही तरह से लिवर में भी ट्यूमर हो सकता है। ये लिवर में ऊतकों के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण होता है। हर ट्यूमर कैंसर का कारण बने ये आवश्यक नहीं है, हालांकि कुछ ट्यूमर के कारण कैंसर होने का जोखिम जरूर रहता है।
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लिवर में ट्यूमर और कैंसर का खतरा
लिवर में होने वाली इस समस्या के बारे में समझने के लिए हमने दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में हेपेटोलॉजिस्ट डॉ एन.आर शाह से बातचीत की।
डॉक्टर बताते हैं, शरीर के अन्य हिस्सों की ही तरह से लिवर में भी ट्यूमर हो सकता है। ये लिवर में ऊतकों के असामान्य रूप से बढ़ने के कारण होता है। हर ट्यूमर कैंसर का कारण बने ये आवश्यक नहीं है, हालांकि कुछ ट्यूमर के कारण कैंसर होने का जोखिम जरूर रहता है।
अगर आपको पेट में अक्सर दर्द, असहजता, भारीपन जैसी समस्या बनी रहती है और सामान्य प्रकार के उपचार के माध्यम से इसमें आराम नहीं मिल रहा है तो लिवर रोग विशेषज्ञ से मिलकर एक बार पूरी जांच जरूर कराएं।
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क्यों होता है लिवर में ट्यूमर?
अब सवाल ये है कि लिवर में ट्यूमर होने के क्या कारण हैं, किन लोगों में इसका खतरा अधिक होता है?
इस बारे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लिवर में ट्यूमर या कैंसर के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। क्रॉनिक लिवर रोग, लिवर में लंबे समय तक बना रहने वाला संक्रमण और कुछ प्रकार की पर्यावरणीय स्थितियां ट्यूमर या कैंसर का कारण हो सकती हैं। क्रॉनिक हेपेटाइटिस-बी या सी संक्रमण लिवर में होने वाली इस तरह की समस्याओं का एक प्रमुख जोखिम कारक है।
इन दिनों कम उम्र के लोगों में फैटी लिवर की समस्या भी तेजी से बढ़ती जा रही है, इसके कारण भी लिवर में गंभीर समस्याओं या कैंसर होने का भी खतरा हो सकता है।
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कहीं आपको भी तो नहीं हो गई है ये समस्या? कैसे जानें
लिवर में ट्यूमर या कैंसर के क्या लक्षण होते हैं, इसकी पहचान कैसे की जाए? इसके बारे में भी जानना आपके लिए आवश्यक है।
डॉक्टर कहते हैं, ज्यादातर मामलों में लिवर की समस्या जैसे ट्यूमर और अन्य गंभीर स्थितियों का पता तब तक नहीं चल पाता है जब तक कि इसकी जांच न की जाए। कई स्थितियों में लिवर स्कैन के दौरान ही पहली बार इस समस्या का निदान हो पाता है। ट्यूमर के मामलों में जब तक कि इसका आकार बड़ा नहीं हो जाता है, आमतौर पर इसका पता नहीं चल पाता है। जिन रोगियों को हेपेटाइटिस बी या लिवर सिरोसिस की दिक्कत होती है, उन्हें अपनी स्थिति के लिए नियमित जांच करानी चाहिए।
पेट के ऊपरी हिस्से में और असहजता बने रहना, भूख न लगना, पीलिया और अक्सर थकावट महसूस होना संकेत है कि आपके लिवर में सबकुछ ठीक नहीं है। इसकी समय रहते जांच जरूर कराएं।
लिवर में ट्यूमर का क्या इलाज है?
अगर किसी को लिवर में ट्यूमर हो गया है तो सबसे पहले जांच के माध्यम से डॉक्टर इस बात का पता लगाने की कोशिश करते हैं कि ये कैंसर वाला तो नहीं है। इसी आधार पर इलाज निर्धारित किया जाता है। किसी भी ट्यूमर का इलाज है- सर्जरी करके इसे निकालना। यदि ट्यूमर कैंसर वाला है तो इसके अनुसार इलाज के लिए कीमोथेरेपी या फिर रेडिएशन थेरेपी को प्रयोग में लाया जा सकता है।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि स्टेज 1 लिवर कैंसर से पीड़ित लगभग 50% कैंसर के निदान के बाद 4 साल या उससे अधिक समय तक जीवित रहते हैं। स्टेज-2 लिवर कैंसर में ये दर लगभग 35% हो सकती है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।