शरीर और आत्मा की शुद्धि ही है नवरात्रि व्रत का उद्देश्य
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नवरात्रि, भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है । यह पूरे देश में धूमधाम से मनाया जाता है, खासतौर से उत्तर भारत में नवरात्रि के दिनों में व्रत का अत्यंत महत्व है । शक्ति की उपासना का त्योहार शरदीय नवरात्रि शुद्धता का पर्याय है, जो कि अश्विनी मास में प्रतिपदा से नवमी तक निश्चित नव तिथियों में भक्ति के साथ सनातन काल से मनाया जा रहा है । सर्वप्रथम भगवान श्रीरामचंद्र जी ने इस नवरात्रि पूजा का आरम्भ किया था । आदिशक्ति के हर रूप की नवरात्रि के नौ दिनों में क्रमशः अलग अलग पूजा की जाती है। नवरात्रि मां के विभिन्न रूपों को निहारने और उत्सव मनाने का भी त्योहार है । मां दुर्गा सिर्फ आसमान या देवलोक में नहीं विराजमान है जो कि इस श्लोक में बताया गया है कि “या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते” अर्थात सभी जीवों में चेतना के रूप में मां आप स्थित हो । नवरात्रि उत्सव के बाद हमारे भीतर नवसृजनात्मकता का पुनर्जन्म होता है। इसलिए यह उत्सव सम्पूर्ण देश में अत्यंत हर्षोल्लास से मनाया जाता है ।
धार्मिक भावना के अलावा मौसम परिवर्तन के समय व्रत रखना स्वास्थ्य के लिए भी अत्यंत लाभदायक होता है । साल के इस समय जब मौसम का मिजाज सर्द होने लगता है, तब व्रत रखकर अपने शरीर के आंतरिक अंगो को आराम देना अत्यंत लाभदायक होता है । परन्तु व्रत रखने का ये अभिप्राय बिल्कुल नहीं है कि उपवास से हम अपने शरीर को कमजोर कर लें और बीमार हो जाएं । इसलिए जरूरी है कि व्रत के दिनों में सेहतमंद खाद्द पदार्थों का उचित मात्रा में उपयोग किया जाए ।
व्रत के दिनों में शुद्ध देशी घी में बने खाद्द पदार्थों का उपयोग स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभप्रद होता है । हमारे समाज में घी को लेकर विभिन्न तरीके के मिथक व्याप्त हैं । कई बड़ी कम्पनियां अपने उत्पादों को बेचने के लिए देशी घी के बारे में भ्रामक प्रचार करते हुए ये बताते हैं कि देशी घी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, इससे मोटापा, रक्तचाप व हृदय संबंधित रोग होते हैं । परंतु घी एक सुपाच्य सात्विक खाद्द पदार्थ है, जिसका वर्णन आयुर्वेद से लेकर हमारे सभी प्राचीन धर्मग्रंथों में मिलता है । इसलिए व्रत के दिनों में देशी घी का भरपूर प्रयोग करना चाहिए । घी से बने खाद्द पदार्थ पाचन में हल्के तो होते ही हैं साथ ही घी की तासीर गर्म होने के कारण कम खाने पर भी शरीर को भरपूर ऊर्जा प्रदान करते हैं । घी का सुपाच्य होना, मौसम में होने वाले इस बदलाव के समय में अत्यंत लाभदायक होता है । ऐसे समय में जहां वनस्पति तेल में तली भुनी चीजें हमें नुकसान पहुंचाती हैं तो वहीं घी का सुपाच्य होना हमें तले भुने खाद्द पदार्थों को भी आसानी से पचाने में सहायता करता है ।
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