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अध्ययन: कोरोना वैक्सीन और पिछले संक्रमण से तैयार प्रतिरक्षा ओमिक्रॉन के खिलाफ सुरक्षा में अधिक मजबूत

Mon, 13 Dec 2021 05:11 PM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Mon, 13 Dec 2021 05:11 PM IST
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Covid-19 vaccines Previous infection offer stronger than basic protection against Omicron
ओमिक्रॉन वैरिएंट - फोटो : अमर उजाला

कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ओमिक्रॉन के भारत में मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ओमिक्रॉन वेरियंट को लेकर हाल ही में एक रिपोर्ट सामने आई है। एक अध्ययन के मुताबिक, जो लोग कोरोना वायरस से पहले संक्रमित हो चुके हैं और उन्हें टीका भी लग चुका है, ओमिक्रॉन ऐसे लोगों की इम्यूनिटी पर भी असर डाल सकता है। ओमिक्रॉन वेरिएंट में सबसे ज्यादा म्यूटेशन होने का दावा किया जा रहा है। एक प्रयोगशाला में किए गए अध्ययन से पता चला है कि पिछले कोविड-19 संक्रमण प्रभावित हुए लोगों ने वैक्सीनेशन के बाद जो इम्यूनिटी प्राप्त की है, ओमिक्रॉन की क्षमता से पिछले सभी वैरिएंट की तुलना में अधिक है। दावा किया जा रहा है कि ओमिक्रॉन डेल्टा वेरिएंट के मुकाबले ज्यादा संक्रामक हैं। 

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ओमिक्राॅन से सुरक्षा के लिए वैक्सीन की तीसरी खुराक का समर्थन 

इमर्जिंग माइक्रोब्स एंड इंफेक्शन नामक पत्रिका में प्रकाशित परिणाम के तहत सलाह दी गई कि ओमिक्रॉन से प्रोटेक्शन के लिए टीके की तीसरी खुराक प्रतिरक्षा को काफी बढ़ा सकती है। हालांकि, चीन में नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर फूड एंड ड्रग कंट्रोल के शोधकर्ताओं ने कहा कि एसोसिएशन को बेहतर ढंग से समझने के लिए और अधिक शोध की आवश्यकता है। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में हाल के परिणामों का समर्थन किया, जिसमें इस बात पर प्रकाश डाला गया कि ओमिक्रॉन के लिए प्रतिरक्षा से बचना आसान था।
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चीन के फूड एंड ड्रग कंट्रोल इंस्टीट्यूट ने किया अध्ययन

नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर फूड एंड ड्रग कंट्रोल के अध्ययन के प्रमुख लेखक यूचुन वांग ने कहा, "हमने पाया कि जिन लोगों को पहले से कोरोना हो चुका था, ओमिक्राॅन वेरिएंट के म्यूटेशन ने बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के खिलाफ न्यूट्रैलिसेशन सेंसिटिविटी में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं।'' इस बारे में वांग ने कहा कि ओमिक्राॅन के खिलाफ औसत ईडी 50 (सुरक्षा स्तर) अभी भी बेसलाइन से अधिक है, जो दर्शाता है कि अभी भी कुछ प्रोटेक्शन इफेक्ट है, जिन्हें ऑब्जर्व्ड किया जा सकता है। वांग ने आगाह किया कि चूंकि एंटीबॉडी सुरक्षा जो कि पिछले संक्रमण या टीकाकरण के रूप में छह महीने की अवधि में धीरे-धीरे कम हो जाती है, ओमीक्रोन प्रतिरक्षा से और भी बेहतर बचने में सक्षम हो सकता है।

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शोधकर्ताओं ने SARS-CoV-2 से उबरने वाले रोगियों के 28 सीरम नमूनों को देखा। उन्होंने इन-विट्रो ओमीक्रोन नमूनों के साथ-साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा चिह्नित चार अन्य स्ट्रेंस और रुचि के रूप में चिह्नित दो वैरिएंट के खिलाफ इनका परीक्षण किया। वांग ने कहा, "यह अध्ययन ओमिक्रॉन वैरिएंट के बढ़े हुए इम्यून इस्केप की पुष्टि करता है, जो दुनिया के लिए अलार्म की तरह है और सार्वजनिक स्वास्थ्य योजना और मिलान रणनीतियों के विकास के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।"

शोधकर्ताओं ने नोट किया कि ओमिक्राॅन को बेहतर ढंग से समझने के लिए न केवल इन-विट्रो बल्कि वास्तविक दुनिया के अध्ययनों में और अधिक शोध किए जाने की तत्काल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह जानना अत्यंत महत्वपूर्ण होगा कि क्या ये वैरिएंट वैक्सीन से बचकर अधिक गंभीर बीमारी और मृत्यु का कारण बन सकता है। अध्ययन के लेखकों ने कहा कि इसका पुनर्मूल्यांकन करने की आवश्यकता है कि क्या एंटीबॉडी अभी भी ओमिक्राॅन वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी हो सकते हैं।

ओमिक्राॅन पर अधिक जनसंख्या पर स्टडी की जरूरत

उन्होंने कहा, "मानव प्रोटेक्शन पर सटीक असर अधिक कारणों से प्रभावित हो सकता है, जैसे मानव आबादी पर ओमिक्रोन के सापेक्ष अन्य वायरस के वेरिएंट और एक बार मानव शरीर के संक्रमित होने पर ओमिक्रोन का वायरल फिटनेस पर असर। शोधकर्ताओं के मुताबिक, कोविड-19 महामारी के नियंत्रण के लिए वैश्विक स्तर पर संक्रमित लोगों में प्रतिरक्षा सुरक्षा के स्तर और लक्षणों सहित अधिक जनसंख्या अध्ययन की आवश्यकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी कहा कि इस अध्ययन की प्रमुख चेतावनी यह है कि यह प्रकृति में इन-विट्रो है और इसमें छद्म या निर्मित वायरस का इस्तेमाल किया गया है।

हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि वर्तमान वैक्सीन लिटरेचर ने साबित किया है कि इन-विट्रो न्यूट्रलाइजेशन एसेज़ वैक्सीन सुरक्षा प्रभावकारिता और वास्तविक-विश्व वैक्सीन प्रभावशीलता के अच्छे भविष्यवक्ता हैं। इसलिए, लेखकों ने कहा कि उनका डाटा नए ओमिक्रोन वेरिएंट के खिलाफ टीके की सुरक्षा में संभावित कमी की भविष्यवाणी कर सकता है।

नोट: ये खबर इमर्जिंग माइक्रोब्स एंड इंफेक्शन जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट और चीन के नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर फूड एंड ड्रग कंट्रोल के शोधकर्ताओं के अध्ययन के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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