भारत में कोरोना वायरस संक्रमितों की संख्या 29 लाख के पार पहुंच गई है। कोरोना वायरस संक्रमण के लिहाज से भारत दुनिया का तीसरा सबसे अधिक प्रभावित देश है। एक ओर जहां देश में संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वहीं भारत में इलाज के बाद ठीक होने वालों की संख्या भी काफी है। राजधानी दिल्ली में दूसरे सीरो सर्वे की रिपोर्ट जारी की गई है। गुरुवार को दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने दूसरी सीरो सर्वे की रिपोर्ट जारी की।
क्या शरीर में एंटीबॉडी बन जाने से कोरोना का संक्रमण नहीं होगा? जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ
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पहला सीरो सर्वे जुलाई में किया गया था, जिसमें पाया गया था कि एक-चौथाई से ज्यादा दिल्लीवासी संक्रमित हो चुके हैं। इस सर्वे के लिए 21,387 सैंपल लिए गए थे, जिसमें 23.48 फीसदी लोगों में विकसित एंटीबॉडी पाई गई थी। लेकिन इस बार यह सैंपल साइज 15 हजार लोगों तक ही सीमित था। दूसरे सर्वे में 32.2 फीसदी महिलाओं में और 28 फीसदी पुरुषों में विकसित एंटीबॉडी मिली। इसका एक सीधा मतलब ये भी है कि दो करोड़ की आबादी वाली राजधानी में करीब साठ लाख लोग संक्रमण के बाद ठीक हो चुके हैं।
हालांकि दिल्ली अभी भी हर्ड इम्यूनिटी विकसित करने से दूर है। सत्येंद्र जैन ने कहा कि जब किसी जगह पर 40 से लेकर 70 फीसदी लोग एंटीबॉडी विकसित कर लेते हैं तो वहां हर्ड इम्यूनिटी विकसित हो जाती है। सीरो सर्वे रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई और पुणे में भी 40 प्रतिशत के करीब लोगों में विकसित एंटीबॉडी मिली है।
लेकिन क्या एंटीबॉडी विकसित हो जाने से दोबारा संक्रमण नहीं होगा?
आईसीएमआर में एपिडेमियोलॉजी एंड कम्यूनिकेबल डिजीज डिपार्टमेंट में डॉ. निवेदिता गुप्ता कहती हैं, 'इस बात के अभी बहुत अधिक प्रमाण तो नहीं हैं कि दोबारा संक्रमित हो सकते हैं या नहीं, लेकिन इससे जो स्पष्ट तौर पर बात सामने आती है वो यह कि ये लोग एक बार संक्रमित हो चुके हैं और उन्होंने एक इम्यून विकसित कर लिया है।'
वो कहती हैं, 'हम उम्मीद तो कर रहे हैं कि वे आने वाले कुछ समय तो सुरक्षित रहेंगे, लेकिन दोबारा संक्रमित हो सकते हैं या नहीं, दुनियाभर में इससे जुड़े बेहद कम प्रमाण हैं। ऐसे में प्रमाणिक तौर पर कुछ भी कहा नहीं जा सकता।' सीरो सर्वे से जो नतीजे आए हैं 'उससे सिर्फ ये पता चल रहा है कि वे संक्रमित हुए थे और अभी ठीक हो चुके हैं।'
पीएमएसएफ (प्रोग्रेसिव मेडिकोज एंड साइंटिस्ट फोरम) के नेशनल प्रेसिडेंट डॉ. हरजीत सिंह भट्टी कहते हैं कि पहले तो ये समझना जरूरी है कि संक्रमण है क्या? वो कहते हैं, 'संक्रमण का मतलब है कि शरीर के भीतर किसी ऐसे रोगवाहक या बाहरी तत्व का प्रवेश जो शरीर के अंगों और शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है। ऐसे में जब आपने उसका प्रोटेक्शन मैकेनिज्म विकसित कर लिया है तो वो शरीर को नुकसान नहीं करेगा।'
हरजीत सिंह कहते हैं, 'जिन लोगों के शरीर में एंटीबॉडी विकसित हो चुकी है, उन्हें संक्रमण होगा ही नहीं, क्योंकि उनके शरीर में पहले से एंटीबॉडी बनी हुई है और ऐसे में हमला होते ही प्रोटेक्टिव मैकेनिज्म एक्टिवेट हो जाएगा और वह तुरंत उसके प्रवेश को रोक देगा।'
दुनिया के 180 से अधिक देशों में अपने पैर पसार चुके कोरोना वारस के बारे में अब तक जो जानकारी सामने आई है, उसके अनुसार ये वायरस तेजी से अपना स्वरूप बदलता है यानी म्यूटेट होता है। तो क्या अगर कोरोना म्यूटेट होकर अपना रूप बदल ले, तब भी यह एंटीबॉडी इंसान की रक्षा करने में सक्षम होंगे? इस सवाल के जवाब में डॉ. निवेदिता कहती हैं कि अभी तो कोरोना वायरस कितना अधिक म्यूटेट हो रहा है, इस बात के भी पूरे प्रमाण नहीं हैं।