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इटली के उदाहरण से समझें- हर्ड इम्यूनिटी से कोरोना पर नियंत्रण संभव नहीं, वैज्ञानिकों ने भी चेताया

Fri, 23 Oct 2020 08:54 PM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार
Updated Fri, 23 Oct 2020 08:54 PM IST
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Coronavirus may not control by herd immunity, Lockdown and Curfew again in Italy,  WHO Scientist says Covid vaccine is only option
कोरोना के खिलाफ कारगर नहीं, बल्कि खतरनाक है हर्ड इम्यूनिटी - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला ग्राफिक्स

कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित होने वाले देशों में शामिल इटली एक बार फिर से लॉकडाउन की ओर अग्रसर हो चला है। यहां के उत्तरी लोम्बार्डी क्षेत्र में एक बार फिर से कर्फ्यू लगाने की तैयारी चल रही है। देशव्यापी लॉकडाउन खत्म होने के बाद कर्फ्यू जैसा सख्त कदम उठाया जाना एक बड़ा और सख्त फैसला है।

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यह वही इटली है, जहां के एक शहर बर्गामो के बारे में जून में सामने आई एक रिपोर्ट में कहा जा रहा था कि यहां की 57 फीसदी आबादी में कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित हो गई है और शहर हर्ड इम्यूनिटी की ओर बढ़ रहा है। इसके बाद वहां लॉकडाउन में काफी हद तक ढील दी जाने लगी।
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वैज्ञानिकों से लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेषज्ञ यूं ही हर्ड इम्यूनिटी को कोरोना से निपटने की खतरनाक रणनीति करार नहीं दे रहे है। इसके पीछे कई सारे तर्क हैं। 
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इटली के उदाहरण पर लौटते हैं। आंकड़ों पर गौर करेंगे तो इन दिनों कोरोना संक्रमण की रफ्तार वहां बढ़ी है। इटली के उत्तरी लोम्बार्डी क्षेत्र में गुरुवार रात से तीन सप्ताह के लिए लगाई गई रात्रि कर्फ्यू के दौरान रात 11 बजे से सुबह पांच बजे तक कर्फ्यू रहेगा, जबकि सप्ताहांत में मध्यम और बड़े शॉपिंग मॉल बंद रहेंगे।

लोम्बार्डी में कोविड-19 के मामलों में नया उछाल देखे जाने के लिए उसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। 2020 के शुरुआती महीनों में वायरस की पहली लहर के दौरान इटली में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र था। लोम्बार्डी के स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्टो श्पेरन्जा ने इस प्रतिबंध पर सहमति दी है। 

Coronavirus may not control by herd immunity, Lockdown and Curfew again in Italy,  WHO Scientist says Covid vaccine is only option
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इटली में कोरोना संक्रमण के मामले बीच में कम होने लगे थे। मई से जून और जून से जुलाई में कुल मामलों पर गौर करेंगे तो महज सात हजार मामले प्रति महीने की बढ़त दिखेगी। वहीं, अगस्त में मामले कुछ ज्यादा बढ़े और फिर अगस्त के बाद सितंबर और अक्तूबर में कोरोना मामलों की संख्या अप्रत्याशित गति से बढ़ी। 
  • आंकड़ों में देखें: 
कब तक कुल कितने मामले
30 अप्रैल 2,05,449
31 मई 2,33,000
30 जून 2,40,599
31 जुलाई 2,47,537
31 अगस्त 2,69,217
30 सितंबर 3,14,861
21 अक्तूबर 4,49,648
(स्रोत: Worldometer)

हर्ड इम्यूनिटी है क्या? 
किसी बीमारी के खिलाफ अगर टीकाकरण की मदद से बड़ी आबादी इम्यून यानी प्रतिरक्षित हो जाती है, तब बाकी बचे लोग भी बीमारी से सुरक्षित हो जाते हैं। इसका मतलब कि लोगों के शरीर में बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित हो गई हो। हर्ड इम्यूनिटी की एक स्थिति और होती है। 

अगर कोई बीमारी जनसंख्या के बड़े हिस्से में फैल जाती है तो बाकी बचे लोग इससे सुरक्षित हो जाते हैं, यानी जनसमूह की रोग प्रतिरोधक क्षमता उस बीमारी से लड़ने में संक्रमित लोगों की मदद करती है। इस स्थिति में भी लोगों में बीमारी से लड़ने के लिए एंटीबॉडी विकसित हो चुकी होती है। इटली के बर्गामो की स्थिति जून में इसी ओर अग्रसर बताई जा रही थी। 

जून में घटी थी कोरोना की रफ्तार 
इटली के बर्गामो में 23 अप्रैल से तीन जून के बीच करीब 10 हजार लोगों के ब्लड टेस्ट किए गए थे। इसके परिणाम ने विशेषज्ञों को चौंका दिया। देखा गया कि करीब 57 फीसदी लोगों में कोरोना से लड़ने केा एंटीबॉडी विकसित हो चुके हैं। 

बर्गामो के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, एंटीबॉडी टेस्ट के लिए रैंडम सैंपल लिए गए थे। अधिकारियों ने सैंपल को काफी व्यापक बताया और इस टेस्ट के परिणाम के बारे में कहा कि यह भरोसे वाला संकेत है। 

इटली के बर्गामो शहर में फरवरी में कोरोना का पहला मामला सामने आया था। इसके बाद शहर में सख्त लॉकडाउन की घोषणा की गई थी। लंबे समय तक सख्त लॉकडाउन के बाद इटली में जून के पहले हफ्ते में काफी हद तक ढील दे दी गई थी, जोकि बाद के महीनों में महंगी पड़ी और कोरोना के मामले बढ़ गए। 

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Coronavirus prevention - फोटो : iStock

बिहार के भागलपुर शहर के बायोलॉजी के प्रोफेसर रह चुके डॉ. विवेकानंद मिश्र कहते हैं कि इटली ने उस वक्त भी आधिकारिक तौर पर हर्ड इम्यूनिटी की बात नहीं स्वीकारी थी। तभी यह भी स्पष्ट नहीं था कि रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना की एंटीबॉडी जिन लोगों में बनी दिख रही है, वे कितने लंबे समय तक इस वायरस से सुरक्षित रह सकते हैं।

हाल के दिनों में तो कोरोना के दोबारा संक्रमण के मामले भी सामने आए हैं। हांगकांग में आए दोबारा कोरोना संक्रमण के पहले मामले के आधार पर पहले यह कहा जा रहा था कि कोरोना से उबरने के बाद शरीर में बनी एंटीबॉडी चार महीने तक रह सकती है।

भारत में आईसीएमआर यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद ने दोबारा संक्रमण की समय सीमा 100 दिन तय की है। यानी 100 दिन के बाद अगर किसी को दोबारा संक्रमण होता है तो वह नया मामला माना जाएगा। तर्क है कि औसतन करीब इतने ही दिनों तक मानव शरीर में कोरोना से उबरने के बाद एंटीबॉडी बनी रह सकती है। 

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हर्ड इम्यूनिटी है खतरनाक रणनीति - फोटो : Amar Ujala

वैज्ञानिकों का खुला खत- हर्ड इम्यूनिटी है खतरनाक
हाल ही में दुनियाभर के 80 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने चेताया है कि हर्ड इम्यूनिटी की रणनीति कोरोना के मामले में बहुत जानलेवा साबित हो सकती है। हेल्थ रिसर्च जर्नल लैंसेट में प्रकाशित एक खुले खत के जरिए अंतरराष्ट्रीय स्तर के 80 वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं ने इसको लेकर अपनी राय जाहिर की है।

पत्र में लिखा है कि कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए हर्ड इम्यूनिटी की रणनीति अपनाने का विचार वैज्ञानिक प्रमाणों द्वारा असमर्थित है और यह एक तरह की खतरनाक सोच है। विशेषज्ञों के मुताबिक, हर्ड इम्यूनिटी की बजाय निर्णायक और तत्काल कार्य करना महत्वपूर्ण है।

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay

लैंसेट जर्नल के मुताबिक, वैज्ञानिकों ने स्वीकार किया है कि लॉकडाउन, समारोहों पर रोक जैसे मौजूदा प्रतिबंधों से व्यापक तौर पर लोगों में कम भरोसा पैदा हुआ है। साथ ही कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के डर से लोगों के अंदर हर्ड इम्यूनिटी को लेकर दिलचस्पी भी पैदा हुई है। हालांकि सभी वैज्ञानिकों ने इस बात पर जोर दिया है कि कोरोना संक्रमण से प्रतिरक्षा पर निर्भर हर्ड इम्यूनिटी जैसी कोई भी महामारी प्रबंधन रणनीति त्रुटिपूर्ण है।

डब्ल्यूएचओ ने भी खतरनाक बताया
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भी हर्ड इम्यूनिटी की रणनीति को खतरनाक बताया है। पोलियो और खसरा बीमारी का उदाहरण देते हुए कहा है कि डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि हर्ड इम्यूनिटी किसी वायरस से इंसान की सुरक्षा करके हासिल की जाती है, ना कि उनकी जान जोखिम में डालकर।

विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि हर्ड इम्यूनिटी के कॉन्सेप्ट का इस्तेमाल टीकाकरण में सही होता है। एक सीमा तक लोगों का टीकाकरण हो जाने के बाद ही पूरी आबादी को बीमारी से बचाया जा सकता है।  

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