कोरोना वायरस को इस दुनिया में आए नौ महीने से ऊपर हो गए और इन नौ महीनों में उसने पूरी दुनिया में तबाही मचा दी है। इस तबाही में अब तक सात लाख 73 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इसके वैक्सीन का काम लगातार जारी है और समय-समय पर इसको लेकर नई-नई चीजें भी निकलकर सामने आ रही हैं। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि लोगों को इसके बारे में वो सबकुछ पता हो, जिससे वो सुरक्षित रहें, स्वस्थ रहें। अभी हाल ही में एक रिपोर्ट आई थी कि कोरोना वायरस हवा से भी फैल सकता है। ऐसे में यह जानना सबसे जरूरी हो जाता है कि घर की छत पर जाना सुरक्षित है या नहीं। ऐसे ही कुछ और भी जरूरी सवाल हैं, जिनका जवाब जानना बेहद ही जरूरी है। आइए जानते हैं इस बारे में विशेषज्ञ क्या कहते हैं।
वायरस अगर हवा से भी फैलता है, तो छत पर जाना सुरक्षित है या नहीं? जानें क्या कहते हैं विशेषज्ञ
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- क्या बिना जुकाम के बलगम आने पर कोरोना का लक्षण मान सकते हैं?
दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टर ए. के. वार्ष्णेय का कहना है, 'अगर किसी को पहले से बलगम आता है तो उसका कारण कुछ और हो सकता है, क्योंकि कई बार लोग स्मोकिंग करते हैं, तो उन्हें ऐसी परेशानी होती है। लेकिन अगर ये इस वक्त शुरू हुआ है और परेशानी ज्यादा है तो डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं।'
- क्या लगातार काढ़ा का सेवन सेहत के लिए हानिकारक है?
डॉक्टर वार्ष्णेय के मुताबिक, 'कोई भी चीज कितनी ही फायदेमंद क्यों न हो, जरूरत से ज्यादा लें तो हानिकारक होती है। इसी तरह काढ़ा भी एक आयुर्वेदिक औषधि है, जिसमें हर चीज का एक विशिष्ट अनुपात होता है। दूसरी बात, कई लोग सोचते हैं कि एक दिन में चार बार काढ़ा पीने से वायरस से बच जाएंगे, जबकि ऐसा नहीं है। विशेषज्ञ जितना बता रहे हैं, उतना ही सेवन करें। अपने मन से न तो उसमें कोई चीज अधिक या अतिरिक्त मिलाइए और न ही अधिक पीजिए।'
- क्या पोस्ट-कोविड क्लीनिक सेवा की शुरुआत हो रही है?
इस बारे में डॉक्टर वार्ष्णेय कहते हैं, 'कोविड के कई मरीजों में ठीक होने के बाद कुछ लक्षण देखे गए हैं। फेफड़ों में वायरस का हमला होने पर, ठीक होने के बाद भी कई बार सांस लेने में दिक्कत आती है। उन्हें दबाव महसूस होता है। जब जांच की गई तो कुछ मरीजों के फेफड़े क्षतिग्रस्त पाए गए। इसके अलावा कई मरीजों को मानसिक तनाव, कई में बोलने में परेशानी, आवाज लड़खड़ाने के मामले पाए गए। कोरोना वायरस से पूरी तरह ठीक होने में वक्त लग रहा है। वायरस नया है, इसलिए ऐसे लोगों के लिए पोस्ट-कोविड क्लीनिक शुरू की गई है।'
- संक्रमण को कैसे कम कर सकते हैं?
डॉक्टर वार्ष्णेय के मुताबिक, 'देश में सभी व्यावसायिक गतिविधियां खोल दी गई हैं। देश धीरे-धीरे अनलॉक हो रहा है, लेकिन अभी भी रेल, अंतरराष्ट्रीय विमान, स्कूल आदि पूरी तरह से नहीं खोले गए हैं, क्योंकि संक्रमण बढ़ने का डर है। ऐसे में अब संक्रमण बड़े शहरों से होकर छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंच रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि वहां लोगों को लग रहा है कि उनके यहां वायरस नहीं आएगा। लेकिन जब तक देश के किसी भी कोने में कोरोना का एक भी केस है और वैक्सीन नहीं आई है, तब तक सभी को नियमों का पालन करना है।'