Coronavirus: कैसे पता चलेगा कोरोना महामारी की रफ्तार धीमी हो रही है या नहीं? जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ
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देखने से ऐसा लग रहा है कि महामारी का प्रभाव कम हो रहा है, लेकिन कई जानकारों का मानना कि इन संख्याओं को एहतियात के साथ पढ़ना चाहिए। उनका मानना है संख्या में कमी आना एक सकारात्मक सिग्नल है, लेकिन ये कहना महामारी खत्म हो रही है, जल्दबाजी होगी, क्योंकि सिर्फ टेस्ट का बढ़ना और मामलों का गिरना ही किसी महामारी को समझने के लिए काफी नहीं है। हर दिन होने वाले कुल टेस्ट में से आधे रैपिड एंटीजेन तकनीक से किए जा रहे हैं। इससे नतीजे जल्दी आ रहे है, ये तकनीक किफायती भी है, लेकिन कई मामलों में ये सटीक नतीजे नहीं देती, कई बार 50 प्रतिशत तक नतीजे गलत होते हैं।
वहीं पीसीआर तकनीक से नतीजे आने में समय भी ज्यादा लगता है और ये महंगा भी है। देश के जाने माने वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील के मुताबिक, 'संक्रमण के मामलों में कमी रैपिट टेस्टिंग के गलत नतीजों के कारण है या सही में मामले कम हो रहे हैं, ये कहना मुश्किल है।' उनके मुताबिक इसका पता तभी लगाया जा सकता है जब सरकार डेटा जारी कर बताए कि कितने पीसीआर टेस्ट और कितने एंटीजेन टेस्ट किए जा रहे हैं। तभी हर दिन आने वाले मामलों से तुलना की जा सकती है।
पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. श्रीनाथ रेड्डी के मुताबिक, भारत में 'ऑन डिमांड टेस्टिंग' शुरू हो गई है जिसके कारण मुमकिन है कि बिना लक्षण वाले लोगों की टेस्टिंग में इजाफा हुआ हो। हालांकि कई एंटीबॉडी सर्वे और दूसरी रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भारत में रिपोर्ट नहीं किए गए मामलों की संख्या बहुत अधिक है। मिशिगन विश्वविद्यालय के ब्र्हामर मुखर्जी, जो इस महामारी को ट्रैक कर रहे हैं, बताते हैं कि भारत में संक्रमित हो चुके लोगों की संख्या 12 से 13 करोड़ तक हो सकती है, जो कि आबादी का करीब 10 फीसदी है।
देशभर में हुए एंटीबॉटी टेस्ट बताते हैं कि करीब 9 करोड़ लोग संक्रमित चुके हैं, जो कि आधिकारिक आंकड़ों से 15 गुना अधिक है। फिर ये कैसे पता चलेगा कि महामारी की रफ्तार धीमी हो रही है या नहीं। डॉक्टर रेड्डी के मुताबिक, मौत के आंकड़ों को ट्रैक करने से ये जानकारी मिल सकती है। 'अगर थोड़े कम मामले भी रिपोर्ट किए जा रहे हैं, तब भी मरने वाले के सात दिन का मूविंग एवरेज बता सकता है ट्रेंड गिर रहा है या नहीं। हमें इसपर ध्यान रखना होगा।'