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एस-2 रिसेप्टर कम सक्रिय होने से बच्चों पर हावी नहीं हो पाता कोरोना

Mon, 03 Aug 2020 10:57 AM IST
योगेश साहू अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली।
अमर उजाला रिसर्च टीम, नई दिल्ली। Published by: योगेश साहू Updated Mon, 03 Aug 2020 10:57 AM IST
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Coronavirus cannot dominate children due to less active S-2 receptor
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI

कोरोना संकट के कारण अधिकतर देशों में स्कूल बंद हैं। हालांकि अध्ययनों के मुताबिक बड़ों की तुलना में बच्चों में संक्रमण की दर कम है। अब खुलासा हुआ है कि बच्चों में एस-2 नामक रिसेप्टर कम सक्रिय होने से उनका संक्रमण से बचाव होता है।


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बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की पीडियाट्रिक इन्फेक्शियस डिसीज विभाग की प्रो. एलिजाबेथ बार्नेट का कहना है कि दस साल से कम उम्र के बच्चों के संक्रमण की गिरफ्त में कम आने का सीधा संबंध एस-2 रिसेप्टर से है, जो वायरस का वाहक है। वायरस के स्पाइक प्रोटीन इसी एस-2 रिसेप्टर पर चिपककर शरीर के भीतर प्रवेश करता है और कोशिकाओं को संक्रमित कर अपना कुनबा बढ़ाता है।

बच्चों के श्वास नलिका में एस-2 अधिक
वैज्ञानिकों का अनुमान है कि बच्चों के श्वास नलिका के ऊपरी हिस्से में एस-2 रिसेप्टर अधिक होता है। वयस्कों में एस-2 रिसेप्टर फेफड़ों में अधिक होता है, जिस कारण वो श्वसन तंत्र पर हावी हो जाता है। चार साल से 60 वर्ष तक के 305 लोगों पर हुए अध्ययन में पता चला है कि दस साल से कम उम्र के बच्चों में एस-2 इंजाइम्स कम सक्रिय होते हैं। संभव है कि कोरोना इसी कारण बच्चों पर हावी नहीं हो पाता है।

बच्चों की कम लंबाई भी रोकती है प्रसार 
वैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चों से दूसरों को संक्रमण का खतरा कम क्यों हैं? वैज्ञानिकों का तर्क है कि बच्चे बड़ों की तुलना में कम तेजी से खांसते या छींकते हैं, जिससे वायरस कम मात्रा में निकलता है। बच्चों की लंबाई कम होने से वायरस जल्दी जमीन पर गिर जाता है। इससे वायरस के फैलने की संभावना कम है। बच्चे थोड़ा भी अस्वस्थ होते हैं तो उनका घूमना फिरना बंद हो जाता है, पर बड़ों के साथ ऐसा नहीं है।

जन्मजात इम्यून सिस्टम बन रहा रक्षक...
यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास हेल्थ सेंटर की नियोनेटोलॉजिस्ट डॉ. अलवारो मोरेरिया का कहना है कि इम्यून सिस्टम और मेमोरी सेल वायरस को रोकते हैं। बच्चों में मेमोरी सेल्स तब बनती है, जब जन्म के बाद वे संक्रमण की चपेट में आते हैं। जन्मजात मिला रोग प्रतिरोधक तंत्र बच्चों की रक्षा करता है। वयस्कों की तुलना में बच्चों में साइटोकाइन स्टॉर्म का अधिक सक्रिय न होना भी बच्चों के अधिक सुरक्षित होने का कारण है।

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