पीठ का दर्द बन सकता है रोग की बड़ी वजह, ऐसे करें बचाव
जब रीढ़ या स्पाइन सही अवस्था में नहीं रहती तो पीठ की मांसपेशियां, लिगमेंट्स और डिस्क पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। मजबूत मांसपेशियां रीढ़ को उचित सीध में रखती हैं और पीठ दर्द से बचाती हैं। रीढ़ के किसी भी हिस्से पर दबाव पडऩे से पीठ में दर्द हो सकता है। यह दर्द गर्दन से लेकर कमर के निचले हिस्से तक हो सकता है।
रीढ़ कि हड्डी में दर्द होने के कई कारण हैं। खराब जीवनशैली, उठने-बैठने का गलत पोस्चर, उम्र बढ़ना और आनुवंशिक कारण। सिर्फ पीठ का दर्द ही नहीं बल्कि स्लिप डिस्क जैसी समस्याएं भी होती हैं।स्टडी के मुताबिक, ऑफिस में एक ही अवस्था में गलत पोस्चर में ज्यादा समय तक बैठने से पीठ, कमर या गर्दन के दर्द से जूझना पड़ सकता है। गलत कुर्सी, टाइपिंग की गलत टेक्नीक, मॉनिटर की पॉजीशन ठीक न होने, ठीक ढंग से खड़े न होने या बैठने से भी पीठ का दर्द हो सकता है।
-रीढ़ और गर्दन को सीधा रखें। लगातार झुक कर काम करने से दर्द हो सकता है।
-की-बोर्ड या टाइपराइटर पर काम करते हों तो कलाइयां सीधी रखें। कलाइयां मुडने से नसों में रक्त-संचार धीमा हो सकता है और उस पर दबाव पडने लगता है। एलबो लगभग 60 डिग्री पर मोड़ कर रखें।
-कुर्सी की ऊंचाई इतनी रखें कि पैर फर्श पर आसानी से टिकें। घुटनों को 90 डिग्री तक मोड़ कर रखें।
-हर दो घंटे में 5-10 मिनट का ब्रेक लें। एक ही अवस्था में देर तक बैठने से पीठ, गर्दन व अंगुलियों पर अधिक दबाव पड़ता है।
-नियमित व्यायाम करें। दर्द के लिए फिजियोथेरेपी करा रहे हों तो डॉक्टर की हर सलाह मानें। पीठ दर्द में वॉकिंग सबसे अच्छी एक्सरसाइज है।
-छह-सात घंटे लगातार डेस्क जॉब के बीच कम से कम दो बार खड़े होकर बांहें फैलाएं और उन्हें आगे-पीछे करते रहें।