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मन के फितूर को कीजिए दूर, जानिए सच में क्या चाहती हैं औरतें?

Sat, 09 Jul 2016 06:25 PM IST
रैचेल नूवर/ बीबीसी
रैचेल नूवर/ बीबीसी Updated Sat, 09 Jul 2016 06:25 PM IST
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Every woman wants something different
women - फोटो : BBC

औरतें क्या चाहती हैं? सदियों से ये सवाल आम आदमी से लेकर, मनोवैज्ञानिकों, वैज्ञानिकों तक को तंग करता रहा है। सिगमंड फ्रायड जैसे महानतम मनोवैज्ञानिक हों या हॉलीवुड के अभिनेता मेल गिब्सन, सब इस सवाल को लेकर परेशान रहे हैं। इस पहेली के बारे में हजारों किताबें, लेख, ब्लॉग पोस्ट लिखे जा चुके हैं।

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लाखों बार इस मसले पर बहस हो चुकी है। मर्द ही क्यों, खुद महिलाएं भी इस मसले पर अक्सर चर्चा करती पाई जाती हैं। मगर, इस पर लंबी चौड़ी चर्चाओं, हजारों किताबों, बरसों की रिसर्च के बावजूद औरतों की ख्वाहिश की कोई एक परिभाषा, कोई एक दायरा तय नहीं हो पाया है और न ही ये तय हो पाया है कि आखिर उनके अंदर ख्वाहिश जागती कैसे है? उन्हें किस तरह से संतुष्ट किया जा सकता है?
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हालांकि बरसों की मेहनत बर्बाद हुई हो, ऐसा भी नहीं है। आज हम काफी हद तक महिलाओं की सेक्स संबंधी ख्वाहिशों को समझ सकते हैं। महिलाओं की कामेच्छा के बारे में पहले के बंधे-बंधाए ख्यालों के दायरे से बाहर आ रहे हैं। पहले कहा जाता था कि महिलाओं की चाहत कभी पूरी नहीं की जा सकती। वो सेक्स की भूखी हैं। उनमें जबरदस्त काम वासना है।

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सेक्स की ख्वाहिश के अलग दौर पाए जाते हैं

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women - फोटो : BBC

लेकिन, अब वैज्ञानिक मानने लगे हैं कि औरतों की सेक्स की चाहत को किसी एक परिभाषा के दायरे में नहीं समेटा जा सकता। ये अलग-अलग औरतों में  अलग-अलग होती है। और कई बार तो एक ही स्त्री के अंदर, सेक्स की ख्वाहिश के अलग दौर पाए जाते हैं।

अमरीका की रटगर्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर बेवर्ली व्हिपल कहती हैं, 'हर औरत कुछ अलग चाहती है।' तमाम नए रिसर्च से अब ये भी साफ हो चला है कि सेक्स के मामले में औरतों और मर्दों की चाहतों और जरूरतों में कोई खास फर्क नहीं होता। जबकि पहले ये माना जाता था कि मर्दों को, औरतों के मुकाबले सेक्स की ज्यादा चाहत होती है।

लेकिन, अब तमाम रिसर्च से ये साफ हो चला है कि कुछ मामूली हेर-फेर के साथ औरतों और मर्दों में सेक्स की ख्वाहिशें कमोबेश एक जैसी होती हैं। पहले जब ये सवाल किया जाता था कि महीने में आपको कितनी बार सेक्स की जरूरत महसूस हुई? तो जवाब ऐसे मिलते थे जिनसे लगता था कि मर्दों को ज्यादा बार जरूरत महसूस हुई।

मगर जब यही सवाल घुमाकर किया गया कि कुछ खास मौकों पर, साथी से नजदीकी पर, बातचीत के दौरान, आपको कितनी बार सेक्स की ख्वाहिश हुई? तो, औरतों और मर्दों के जवाब कमोबेश एक बराबर चाहत जाहिर करने वाले थे।

औरतों को सेक्स में कम दिलचस्पी होती है

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women - फोटो : BBC

 ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेस लोरी ब्रॉटो कहती हैं कि इससे हमारी ये धारणा टूटती है कि औरतों को सेक्स में कम दिलचस्पी होती है। हां, उनकी ख्वाहिशें अलग तरह की होती हैं। एक और बात जो अब बेहतर ढंग से समझी जा रही है वो ये कि औरतों के अंदर सेक्स की चाहत उनके मासिक धर्म के हिसाब से बढ़ती घटती रहती है।

मासिक धर्म शुरू होने से कुछ पहले उन्हें सेक्स की ज्यादा जरूरत महसूस होती है। वर्जिनिया यूनिवर्सिटी की मनोवैज्ञानिक एनिटा क्लेटन कहती हैं कि, सेक्स हमारी बुनियादी जिम्मेदारी, यानी बच्चे पैदा करने का जरिया है। इसीलिए जब महिलाओं के अंदर अंडाणु बनने लगते हैं तो उन्हें सेक्स की ज्यादा जरूरत महसूस होती है।

क्लेटन कहती हैं कि ये तो आज के दौर का चलन है कि सेक्स और बच्चे पैदा करने को अलग-अलग किया जा रहा है। कुदरती तौर पर तो दोनों एक ही हैं। पहले डॉक्टर ये भी मानते थे कि मर्दों का हारमोन टेस्टोस्टेरान, महिलाओं में यौनेच्छा जगाता है।

इसीलिए जब महिलाएं सेक्स की कम ख्वाहिश की परेशानी लेकर डॉक्टरों के पास जाती थीं तो उन्हें टेस्टोस्टेरान लेने का नुस्खा बताया जाता था। बल्कि बहुत से डॉक्टर आज भी यही इलाज कम यौनेच्छा महसूस करने वाली महिलाओं को सुझा रहे हैं।

सेक्स की इच्छा से टेस्टोस्टेरेान का कोई ताल्लुक नहीं

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women - फोटो : BBC

जबकि तमाम रिसर्च के बाद ये कहा जाने लगा है कि महिलाओं में सेक्स की इच्छा से टेस्टोस्टेरेान का कोई ताल्लुक नहीं। मिशिगन यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सारी वान एंडर्स कहती हैं कि, सेक्स की चाहत के असर से हारमोन का बहाव तेज होता है। और लोग समझते उल्टा हैं। उन्हें लगता है कि हारमोन के ज्यादा रिसाव से सेक्स की चाहत पैदा होती है।

बल्कि वो तो ये भी कहती हैं कि सेक्स की इच्छा का हारमोन से कोई ताल्लुक ही नहीं। सेक्स के दौरान भी महिलाओं को अलग-अलग एहसास होते हैं। वो मर्दों की तरह उत्तेजना, चरमोत्कर्ष और तसल्ली के एहसास से रूबरू हों, ऐसा जरूरी नहीं।

महिलाओं के मामले में सेक्स बंधी-बंधाई लकीर पर चलने वाली चीज नहीं। सब कुछ उलट-पुलट हो जाता है। कई बार ऐसा भी हो सकता है कि उन्हें ऑर्गैज्म पहले महसूस हो और साथी के छुअन की जरूरत बाद में।

उन्हें उत्तेजित करने के लिए हर बार यौन अंगों से छेड़खानी करनी पड़े, ऐसा भी जरूरी नहीं। कई बार इसके ख्याल से ही उन्हें तसल्ली हो जाती है। उनके  लिए सेक्स एक दिमागी तजुर्बा है। मर्दों के मामले में ऐसा हमेशा नहीं होता।

महिलाओं की ख्वाहिश हर बार सेक्स करके पूरी हो

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women - फोटो : BBC

जरूरी नहीं कि महिलाओं की ख्वाहिश हर बार सेक्स करके पूरी हो। हर औरत अलग तरह से तसल्ली महसूस करती है। अलग-अलग वक्त में एक औरत भी कई तरह के एहसास से गुजरती है। कई बार उन्हें हस्तमैथुन से ही तसल्ली मिल जाती है।

कइयों को सिर्फ सेक्स के ख्याल से ही ऑर्गैज्म हो जाता है। कइयों को पूरी तरह तसल्ली के लिए साथी की जरूरत होती है। कई बार महिलाएं, साथी के साथ होकर भी उसके साथ सेक्स के बगैर यौन सुख महसूस कर लेती हैं। औरतों में सेक्स की ख्वाहिश जगाने के जरिए भी कई तरह के होते हैं।

जैसे किसी को यौन अंगों से छेड़-छाड़ के बाद सेक्स की जरूरत लगती है। किसी को किस करने से उत्तेजना हो जाती है। कुछ अपने साथी पर हावी होकर तसल्ली महसूस करती हैं। इसका दायरा भी बहुत व्यापक है।

अब तो पोर्न उद्योग भी औरतों के हिसाब से पोर्न फिल्में बनाने लगा है। पहले ऐसी फिल्में सिर्फ मर्दों के लिए बनायी जाती थीं। अब तो औरतों की ख्वाहिशों को ध्यान में रखकर पोर्न फिल्में बन रही हैं।

नहीं पता कि औरतों के अंदर सेक्स की चाहत कैसे जगती है

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women - फोटो : BBC

मनोवैज्ञानिक स्तर पर बात करें तो हमें अब भी नहीं पता कि औरतों के अंदर सेक्स की चाहत कैसे जगती है? बल्कि हमें तो ये भी नहीं पता कि ये चाहत होती कैसी है? ये दिमाग से शुरू होती है या शरीर के किसी और खास हिस्से से? हालांकि सेक्स की जरूरत न महसूस होने की कुछ वजहें तो अब पक्के तौर पर मालूम हो चुकी हैं।

कामकाजी महिलाएं अक्सर कम यौनेच्छा की शिकायत करती हैं। घर और दफ्तर का तनाव उनकी ख्वाहिशों पर हावी हो जाता है। इसी तरह बच्चे पैदा होने पर भी महिलाओं को सेक्स की कम जरूरत महसूस होने लगती है। महिलाओं के ऊपर आस-पास के माहौल का बहुत असर पड़ता है।

अगर तनाव है तो उनके अंदर सेक्स की चाहत कम होना तय है। अमरीका और ब्रिटेन में पचास फीसद औरतें, साल में कई बार कम सेक्स की चाहत की शिकायत करती हैं। ऐसा अक्सर दुनियावी फिक्र की वजह से होता है लेकिन, ये स्थायी भाव नहीं।

इस परेशानी को माहौल बदलकर, औरतों को रिलैक्स महसूस कराकर दूर किया जा सकता है। उनके अंदर फिर से सेक्स की इच्छा जगायी जा सकती है। इसके लिए साथी को रिश्तों में नयापन लाने के तरीके तलाशने होंगे। रोजाना कुछ नया करके, जिस्मानी रिश्तों का ठंडापन दूर किया जा सकता है।

कम यौनेच्छा की वजह से तनाव की शिकायत करती हैं

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women - फोटो : BBC

वैसे पंद्रह फीसदी औरतें ऐसी भी हैं जो कम यौनेच्छा की वजह से तनाव की शिकायत करती हैं। इनमें से कई तो अपने साथी का मन रखने के लिए सेक्स करती हैं। जो उनके लिए बहुत तकलीफदेह होता है।

सेक्स के दौरान भी उनका ध्यान किसी और बात में होता है। जैसे कि कहीं उनका साथी उन्हें छोड़कर चला ना जाए। महिलाओं में सेक्स की कम इच्छा की परेशानी दूर करने के कई इलाज आज उपलब्ध हैं। हालांकि इनमें से कोई भी कामयाबी की सौ फीसद गारंटी नहीं देता।

आज मनोवैज्ञानिक तरीक़े से भी महिलाओं में ख्वाहिशों को फिर से जिंदा किया जा रहा है। ध्यान और योग के जरिए उनकी दिमागी सेहत बेहतर की जाती है। ऐसे ही मेडिटेशन की क्लास में उन महिलाओं को उनकी खूबियों के बारे में बताया जाता है। उनके शरीर के उन खास हिस्सों के बारे में रूबरू कराया जाता है, जहां छूने से उन्हें उत्तेजना हो सकती है।

कई लोग महिलाओं में सेक्स की इच्छा जगाने के लिए फीमेल वियाग्रा की भी सिफारिश करते हैं। 'एडी' नाम की इस दवा को अमरीकी सरकार से भी हरी झंडी मिल गई है। लेकिन, वैज्ञानिक और डॉक्टर, दोनों मानते हैं कि 'एडी', महिलाओं में सेक्स की इच्छा जगाने में बहुत कारगर नहीं। क्योंकि ये औरतों की कामेच्छा के सिर्फ एक पहलू को टारगेट करती है।

औरत के अंदर सेक्स की ख्वाहिश के कई पहलू होते हैं

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women - फोटो : BBC

जबकि किसी औरत के अंदर सेक्स की ख्वाहिश के कई पहलू होते हैं। जबकि इस दवा के कई साइड इफेक्ट हैं। इसे लेने से उन्हें उल्टी, थकान, सिरदर्द, नींद न आने की शिकायत हो सकती है। वो ये दवा लेने के बाद शराब भी नहीं पी सकतीं।

जानकार सलाह देते हैं कि महिलाओं के अंदर ख्वाहिश जगाने के लिए मनोवैज्ञानिक पहलू पर काम करना ज्यादा बेहतर तरीका है। उनके आस-पास के माहौल को बेहतर किया जाना चाहिए। उनके तनाव की वजह को दूर किया जाना चाहिए। वो अच्छा महसूस करेंगी तो उनके अंदर ख्वाहिश खुद ब खुद जगेगी।

वैसे महिलाएं अपने अंदर सेक्स की कम चाहत को तब तक परेशानी के तौर पर नहीं देखतीं, जब तक वो किसी रिश्ते में नहीं बंधतीं। उसके बाद साथी की मांग का दबाव उन्हें सेक्स की कम इच्छा की दिक्कत का एहसास कराता है। जरूरी नहीं कि साथी की इच्छा के बराबर ही महिलाओं को भी सेक्स की चाहत महसूस हो।

बेहतर होगा कि दोनों मिल-बैठकर इस बारे में बात करें और एक दूसरे की जरूरतों और ख्वाहिशों को समझने की कोशिश करें। जहां तक ख्वाहिशों की बात है, इसका कोई ओर-छोर नहीं। ये अलग-अलग इंसानों में ही नहीं, कई बार एक ही इंसान के अंदर अलग-अलग होती है। किसी में कम होती है या ज्यादा होती है, ये कहना भी गलत है। क्योंकि कम कितना है, ज्यादा कितना है, इसका भी कोई पैमाना नहीं।

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