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विज्ञान: टूटे हुए उपकरण अब खुद कर लेंगे अपनी मरम्मत, वैज्ञानिकों ने बनाया खास कार्बनिक पदार्थ

Mon, 19 Jul 2021 08:09 PM IST
प्रतिभा ज्योति न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकता।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकता। Published by: प्रतिभा ज्योति Updated Mon, 19 Jul 2021 08:09 PM IST
सार

अभी आपके हाथ से मोबाइल टूट कर गिर जाता है  तो आप घबरा जाते हैं। लेकिन भारतीय अनुसंधानकर्ताओं ने जो नया कार्बनिक पदार्थ  बनाने में सफलता पाई है उससे बना हुआ मोबाइल जमीन पर गिरेगा और टूटेगा, तो भी चिंता की बात नहीं, क्योंकि मोबाइल अपने आप खुद को दुरुस्त  कर लेगा और पहले की तरह हो जाएगा।
 

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IISER Kolkata and IIT Kharagpur invented a material that will repair itself
मोबाइल फोन - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

आपको शायद हमारी बात पर यकीन नहीं हो रहा होगा। लेकिन यह कहानी सच होने वाली है।  भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) कोलकाता तथा आईआईटी खड़गपुर के बनाए गए एक पदार्थ से बनी कोई भी चीज जैसे मोबाइल या कोई और वस्तु गिर कर टूटे तो वह अपने आप ठीक हो जाएगी। यहां के विशेषज्ञों ने ऐसे पदार्थ का अविष्कार किया है जो पलक झपकते ही अपने अंदर हुई टूट की खुद ही मरम्मत लेगा।  अमेरिका स्थित प्रतिष्ठित विज्ञान (एएएएस) जर्नल में यह शोध प्रकाशित हुआ है। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के स्वत: मरम्मत से लेकर ऑप्टिकल उद्योग में इस नए पदार्थ के कई अनुप्रयोग हो सकते हैं।

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नए और पुराने पदार्थ में क्या है अंतर
शोधकर्ताओं ने कहा कि पहले जो अपने आप ठीक होने वाली सामग्री विकसित की गई थीं उनका इस्तेमाल एरोस्पेस, अभियांत्रिकी और स्वचालन में किया जाता है। नए पदार्थ और पहले से इस्तेमाल किए जा रहे में अंतर यह है कि उन्होंने अब ठोस पदार्थ के एक नए वर्ग को संश्लेषित किया है जो उनके दावे के मुताबिक अन्य प्रतिस्पर्धी सामग्री की तुलना में 10 गुना सख्त है। पूर्व में विकसित सामग्री इसके विपरीत नरम और अनाकार (बिना किसी स्पष्ट परिभाषित आकार के) थी और उसे खुद की मरम्मत करने में प्रकाश, उष्मा या एक रसायन की आवश्यकता होती है। हालांकि नया पदार्थ सख्त है और अपने विद्युत आवेशों का इस्तेमाल स्वत:उपचार के लिये करता है।
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इतनी सटीकता से खुद की मरम्मत करता है कि पहले और बाद में अंतर मुश्किल
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान खड़गपुर के प्रोफेसर भानू भूषण खातुआ ने सोमवार को बताया, “मरम्मत के दौरान, खंडित टुकड़े त्वरण के साथ मधुमक्खी के पंख जैसी गति के साथ बढ़ते हैं। भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा 2015 में प्रतिष्ठित स्वर्ण जयंती फैलोशिप प्राप्त कर चुके प्रोफेसर सी मल्ला रेड्डी और उनके दल ने आईआईएसईआर कोलकाता में ठोस पदार्थ की नई श्रेणी का संश्लेषण किया। वैज्ञानिकों ने कहा कि अध्यधिक क्रिस्टलीय सामग्री जब खंडित हो जाती है तो पलक झपकते ही स्वयं को आगे बढ़ा सकती है और फिर से जुड़ सकती है तथा खुद की इतनी सटीकता के साथ मरम्मत कर सकती है कि अखंडित सामग्री और उसमें भेद करना मुमकिन नहीं होता।

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