अगर यह कानून पास हुआ तो कभी भी जा सकती है आपकी नौकरी
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मजदूर संगठनों ने श्रम मंत्रालय के प्रस्तावित इंडस्ट्रियल रिलेशन बिल 2015 के प्रस्तावों के खिलाफ बांहें चढ़ा ली हैं। भाजपा का मजदूर संगठन भारतीय मजदूर संघ (बीएमएस) भी विरोध करने वालों की कतार में खड़ा है।
मंत्रालय का प्रस्ताव मान लिया गया तो तीन सौ कर्मचारियों तक की कंपनियों को छंटनी के लिए सरकार की अनुमति नहीं लेनी होगी। श्रम मंत्रालय ने औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947, ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926 और औद्योगिक नियोजन अधिनियम 1946 को मिलाकर ड्राफ्ट तैयार किया है। मजदूर संगठनों में इसके कई प्रावधानों को लेकर नाराजगी है। बीएमएस के जोनल सांगठनिक सचिव पवन कुमार ने बताया कि अभी जिन कंपनियों में सौ या अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं, वहां छंटनी के पहले सरकार से अनुमति लेनी पड़ती है।
इस कानून को खत्म करने का प्रस्ताव है। इसी तरह नए कानून के बाद मजदूर संगठन बनाना और कठिन हो जाएगा। उन्होंने बताया कि संगठन के अध्यक्ष बीएन राय छह मई को होने वाली त्रिकोणीय वार्ता में शामिल होंगे। संगठन सरकार के प्रस्ताव के विरोध में एकजुट है। अखिल भारतीय कांग्रेस मजदूर संगठन के सचिव डीएल सचदेव का सुझाव है कि सरकार को बिल के अध्ययन के लिए कर्मचारियों, नियोक्ता के प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों की एक समिति बनानी चाहिए।
कठिन हो जाएगा ट्रेड यूनियन बनाना
अभी यूनियन के पंजीकरण के लिए केवल सात सदस्यों की जरूरत पड़ती है। वहीं ड्राफ्ट में प्रस्ताव है कि यूनियन के पंजीकरण के लिए कम से कम 10 फीसदी कर्मचारी होने चाहिए।
जहां 10 फीसदी सात से कम हो वहां कम से कम सात कर्मचारियों का होना जरूरी है। इसी तरह यदि 10 प्रतिशत का आंकड़ा सौ से ऊपर जा रहा हो तो संगठन के पंजीकरण के लिए सौ कर्मचारी पर्याप्त हैं।
यदि यह प्रस्ताव मान लिया गया तो ट्रेड यूनियन बनाना बेहद कठिन हो जाएगा। हिंद मजदूर सभा के सचिव एडी नागपाल ने बताया कि राजस्थान सरकार ने भी इस तरह के कानून वाला बिल राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा था।
तब श्रम मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने विश्वास दिलाया था कि ऐसा नहीं होगा पर अब वे केंद्रीय कानून में संशोधन करना चाहते हैं, जिसका असर पूरे देश पर पड़ेगा।