शिक्षा मित्रों को सुप्रीम कोर्ट ने दिया बड़ा झटका, जानिए क्या है ये
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उत्तर प्रदेश में शिक्षा मित्रों को सहायक अध्यापक बनाए जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की अध्यक्षता वाली पीठ ने दोटूक कहा कि बगैर टीईटी पास किए शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक बनाना गलत है।
ऐसा करना नेशनल कौंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई) के नियमों के विरुद्ध है। साथ ही पीठ ने इस संबंध में यूपी सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए कहा है।
अदालत ने राज्य सरकार से पूछा कि कितने शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक बनाया जा चुका है। कोर्ट को बताया गया कि कि करीब 1.76 लाख शिक्षा मित्रों को सहायक शिक्षक के तौर पर नियुक्त किया जा चुका है। मालूम हो कि सहायक शिक्षक लिए टीईटी पास करना जरूरी है।
पीठ ने राज्य सरकार द्वारा शैक्षिक पृष्ठभूमि के आधार पर निर्धारित की जाने वाले क्वालिटेटिव प्वाइंट या करियर प्वाइंट को प्रमुखता देने पर भी आपत्ति जताई। पीठ ने कॅरियर प्वाइंट को खतरनाक बताया है। पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि आप पूरे करियर ग्राफ को ले रहे है जबकि यह उच्च शिक्षा होना चाहिए।
करियर ग्राफ हमें तर्कसंगत नहीं लगता। हालांकि पीठ ने कहा कि राज्य को इसमें जोड़ने व घटाने का अधिकार है। पीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को एक रिपोर्ट दाखिल कर यह बताने के लिए कहा है कि दूसरे राज्यों को इसे लेकर क्या नियम कानून है।
हाजिर हों नहीं तो होगी कार्रवाई
पीठ ने बेसिक शिक्षा सचिव और विशेष सचिव को सुनवाई की अगली तारीख 27 जुलाई को निजी तौर पर अदालत में हाजिर होने के लिए कहा है। गैर हाजिर रहने पर उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई भी हो सकती है।
मामले को पेचीदा बना रही यूपी सरकार
पीठ ने इस मसले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश्ा सरकार दिशानिर्देशों से इतर नहीं जा सकती है। वह इस मामले को पेचीदा बना रही है।
कब कितने शिक्षा मित्र अध्यापक बनाए गए
58,826 शिक्षा मित्रों को पहले चरण में अगस्त 2014 में सहायक अध्यापक बनाया गया।
91,104 शिक्षा मित्रों को दूसरे चरण में 30 जून 2015 तक सहायक अध्यापक बनाना था।
73,000 शिक्षा मित्रों को ही समायोजित किया जा सका पद कम होने के कारण दूसरे चरण में।