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बड़ी खबर: 20 हजार दरोगाओं के डिमोशन पर रोक

Sat, 06 Jun 2015 09:06 AM IST
Updated Sat, 06 Jun 2015 09:06 AM IST
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high court stop demotion of sub inspector in uttar pradesh

हेड कांस्टेबल, कांस्टेबल से प्रोन्नत वेतनमान देकर सहायक उपनिरीक्षक बनाए गए सूबे के करीब 20 हजार पुलिसकर्मियों को पदावनत करने के आदेश पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है।

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इन सहायक उपनिरीक्षकों को पदावनत करने का डीजीपी ने 21 फरवरी 2015 को सर्कुलर जारी किया था। इसके अनुपालन में एसपी मैनपुरी ने 20 मई 2015 को पदावनति आदेश जारी कर दिया। कोर्ट ने इस आदेश पर भी रोक लगा दी है।
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मैनपुरी के राधाकृष्ण और 20 अन्य ने याचिका दाखिल कर दोनों आदेशों को चुनौती दी है। याचीगण के वकील विजय गौतम का कहना था कि पदावनत करने का आदेश एकतरफा है और याचीगण का पक्ष सुने बिना आदेश जारी कर दिया गया।

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याचिका पर जुलाई में होगी सुनवाई

high court stop demotion of sub inspector in uttar pradesh

डीजीपी ने अपने सर्कुलर में कहा है कि आरक्षी और मुख्य आरक्षी सेवा नियमावली 2008 में सहायक उपनिरीक्षक के पद पर प्रोन्नति का कोई प्रावधान नहीं है।

मुख्य आरक्षी प्रोन्नत वेतन का भी कोई प्रावधान नियमावली में नहीं है। सर्कुलर में यह भी साफ किया गया कि 1997 में जारी शासनादेश का इन मुख्य आरक्षियों को कोई लाभ नहीं मिलेगा।

याचीगण की दलील थी कि उनको सहायक सब इंस्पेक्टर पद का वेतनमान मिल रहा है। लघु अपराधों की विवेचना भी उनके द्वारा की जा रही है इसलिए पदावनत करने का एकपक्षीय निर्णय नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है। कोर्ट ने पदावनत करने के आदेश पर रोक लगाते हुए प्रदेश सरकार से जवाब तलब किया है। याचिका पर जुलाई में सुनवाई होगी।

डबल स्टार लगा बन गए दरोगा

high court stop demotion of sub inspector in uttar pradesh

हेडकांस्टेबल और कांस्टेबल से सहायक उपनिरीक्षक के पद पर ऐसे आरक्षियों को प्रोन्नत किया गया, जिनका वेतनमान 4600 से 4200 के बीच था तथा जो 24 से 26 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके थे।

फरवरी 2014 में ऐसे करीब 20 हजार पुलिसकर्मियों को प्रोन्नति दी गई। इनको लाल-नीली पट्टी लगाने और लघु अपराधों की विवेचना का अधिकार भी दे दिया गया। दो माह का विशेष प्रशिक्षण भी दिलाया गया।

फलत: सिंगल स्टार लगाने का अधिकार मिलने के बाद बहुत से लोग डबल स्टार लगाकर दरोगा बन गए। अफसरों को इसकी जानकारी होने के बाद डीजीपी ने इसे नियमविरुद्ध मानते हुए सभी को पदावनत करने का आदेश जारी कर दिया।

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