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SSC: 'यह रोक क्यों...?', प्रश्न पत्र विश्लेषण रोकने पर हाईकोर्ट ने एसएससी से मांगा जवाब; नवंबर में होगी सुनवाई

Wed, 08 Oct 2025 04:03 PM IST
आकाश कुमार जॉब्स डेस्क, अमर उजाला
जॉब्स डेस्क, अमर उजाला Published by: आकाश कुमार Updated Wed, 08 Oct 2025 04:03 PM IST
सार

SSC: दिल्ली हाईकोर्ट ने SSC द्वारा पहले से हुई परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों को सोशल मीडिया पर चर्चा या साझा करने पर रोक लगाने वाली नोटिफिकेशन को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया। मामले की सुनवाई नवंबर में होगी।
 

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Delhi HC issues notice on SSC notification banning social media discussion of conducted exam papers
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Adobe Stock

विस्तार

दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक याचिका पर नोटिस जारी किया है। याचिका में एसएससी के उस नोटिफिकेशन को चुनौती दी गई है, जिसमें सोशल मीडिया पर पहले से हुई एसएससी परीक्षा के प्रश्न पत्रों की चर्चा, विश्लेषण या साझा करने को रोकता है।

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इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने की। अदालत ने केंद्र सरकार और एसएससी से जवाब मांगा। मामले की सुनवाई नवंबर में की जाएगी।

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नोटिस में दी गई थी ये चेतावनी

नोटिफिकेशन 8 सितंबर को जारी किया गया था। इसमें कहा गया कि कोई भी व्यक्ति या सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एसएससी परीक्षा के प्रश्न पत्रों या उनके कंटेंट पर चर्चा या साझा करने में शामिल न हो। उल्लंघन करने पर 2024 के "पब्लिक एग्जामिनेशन्स (अनफेयर मीन्स की रोकथाम) एक्ट" के तहत सख्त कार्रवाई होगी।

सुनवाई में याचिकाकर्ता के वकील ने बताया कि उनकी शिकायत केवल इस बात पर है कि नोटिफिकेशन पहले से हुई परीक्षा के प्रश्न पत्रों की चर्चा और साझा करने पर रोक लगाता है। अदालत ने प्रतिवादी पक्ष के वकील को नोटिस स्वीकार करने के लिए कहा।

सुनवाई के दौरान, पीठ ने इस तरह के प्रतिबंध के पीछे के औचित्य पर सवाल उठाया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि परीक्षा के बाद प्रश्नपत्रों पर चर्चा करना एक आम बात है और कहा कि ऐसी गतिविधि 2024 अधिनियम की धारा 3 के दायरे में नहीं आती है।

अदालत ने टिप्पणी की, "आप इस तरह के गैग ऑर्डर नहीं दे सकते। ऐसा क्या है कि आप प्रश्नपत्रों पर चर्चा नहीं कर सकते?"

नोटिस को बताया अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन

याचिका में कहा गया है कि यह नोटिफिकेशन पहले से आयोजित परीक्षा प्रश्न पत्रों की चर्चा और साझा करने पर अनावश्यक रोक लगाता है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन करता है।

याचिका में यह भी बताया गया कि 2024 के “अनफेयर मीन्स एक्ट” का मकसद परीक्षा खत्म होने के बाद चर्चा या विश्लेषण को रोकना नहीं था। इसलिए यह नोटिफिकेशन कानून के दायरे में नहीं आता।

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