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अस्पतालों के चक्कर काटने में चली गई जान

Tue, 12 Feb 2013 10:45 AM IST
देवघर/इंटरनेट डेस्क
देवघर/इंटरनेट डेस्क Updated Tue, 12 Feb 2013 10:45 AM IST
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woman died due to lack of health facilities

राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की हालत का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक महिला की प्रसव के बाद तीन अस्पतालों के चक्कर लगाते-लगाते मौत हो गई। कहीं डॉक्टर नहीं थे तो कहीं बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिलीं।

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मामला करौं प्रखंड के ठेंगाडीह गांव की 27 वर्षीय भवानी देवी से जुड़ा है। जानकारी के अनुसार, रविवार को व्यास महतो की पत्नी भवानी देवी का प्रसव घर में ही परिजनों ने करा दिया। उसने स्वस्थ बच्चे को जन्म तो दिया लेकिन बच्चे की नाभ प्रसूति के पेट में ही रह गई। इस कारण प्रसव के बाद महिला की हालत गंभीर हो गयी।
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ऐसे में परिजन हड़बड़ी में भवानी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करौं लेकर गये। लेकिन केंद्र में उन्हें कोई चिकित्सक नहीं मिला। तब एएनएम ने पीड़िता को एक इंजेक्शन देकर बेहतर इलाज के लिये मधुपूर ले जाने को कहा। मधुपुर में भी महिला को भर्ती नहीं किया गया। वहां चिकित्सक ने महिला की स्थिति नाजुक बताते हुये उसे इलाज के लिये देवघर जाने को कहा। लेकिन, देवघर पहुंचने तक बहुत देर हो गई और रास्ते में ही पीड़िता की मृत्यु हो गई।
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इस घटना से यहां प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करौं में चिकित्सा व्यवस्था पर सवाल खड़ा होता है। इन केंद्रों पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा और चिकित्सकों के भी न होने से ग्रामीणों को जान का जोखिम बना रहता है। गर्भवती स्त्रियां और उसके परिजन इलाज के लिये भटकते रहते हैं। ग्रामीणों ने कई बार चिकित्सा व्यवस्था की इस बुरी हालत का विरोध भी किया है।


इतना ही नहीं क्षेत्र में गर्भवती को सुरक्षित प्रसव के लिये सरकार द्वारा कई कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। यहां ममता वाहन कॉल सेंटर सहित बासा (घरेलू माहौल जैसा स्वास्थ्य केंद्र) की शुरुआत की गई है। लेकिन फिर भी गर्भवती और प्रसूती की मृत्यु दर कम नहीं हो रही हैं। सरकार द्वारा चलाये जा रहे बासा जैसे कार्यक्रम भी महज दिखावा बनकर रह गये हैं। गर्भवती व आदिवासी महिलाओं को इसका लाभ नहीं मिल पाता।

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