डेढ़ दशक पहले ने शुरू की थी शौचालय की लड़ाई, केंद्रीय मंत्रालय ने किया आमंत्रित

amarujala.com- Presented by: अभिषेक मिश्रा Updated Sun, 01 Oct 2017 11:44 AM IST
she was fighting for toilet for 15 years, invited by the Union ministry
खुले में शौच - फोटो : AFP
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वच्छ भारत अभियान के तहत लोगों से कई बार अपील कर चुके हैं कि वह खुले में शौच के लिए न जाएं। बल्कि शौच के लिए शौचालय का इस्तेमाल करें, लेकिन पीएम मोदी के इस अभियान से कई वर्ष पहले ही एक महिला टीचर ने इसकी शुरुआत की थी।
झारखंड की रहने वाली 72 साल की दोरोथिया कर्केता एक रिटायर टीचर और बेसेन पंचायत की पूर्व मुखिया हैं। रांची के लगभग 150 किमी दूर सिमडेगा जिले में दोरोथिया एक जाना पहचाना नाम है। उन्होंने अपने जिले में स्वच्छता का संदेश पहुंचाने के लिए लगभग 15 साल पहले खुले में शौच के खिलाफ जंग छेड़ी थी। 

पढ़ें: मध्य प्रदेश: खुले में शौच पर 75 हजार जुर्माना

जिस वक्त उन्होंने इस मिशन की शुरुआत की थी वह महज एक स्कूल टीचर थी। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि मुझे अपने गांव की महिलाओं को खुले में शौच करते देखकर बहुत दुख होता था। मैंने इस बारे में लोगों से बात करने की कोशिश की लेकिन वह मेरी बात सुनना ही नहीं चाहते थे।

उन्होंने बताय कि शुरुआत में महिलाओं के इज्जत, प्राइवेसी और स्वास्थ्य संबंधी बातों को लेकर उन्हें लोगों की आलोचनाओं का सामना करना पड़ा। इन सब के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी लड़ाई जारी रखी। इसके बाद 2010 में उन्हें इलाके का मुखिया चुना गया। 
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केंद्रीय मंत्रालय ने दो अक्तूबर को किया आमंत्रित

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