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रांची: 78 साल पुरानी रावण दहन की परंपरा, इस बार 70 फीट का रावण और दो मंजिला सोने की लंका होंगे आकर्षण
Sun, 18 Oct 2026 09:11 AM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Sun, 18 Oct 2026 09:11 AM IST
सार
रांची में रावण दहन की परंपरा करीब आठ दशक पुरानी है। वर्ष 1948 में 12 फीट ऊंचे रावण के पुतले से शुरू हुआ यह आयोजन आज मोरहाबादी मैदान में भव्य रूप ले चुका है। इस वर्ष यहां 70 फीट ऊंचे रावण, 65 फीट के कुंभकर्ण और 60 फीट के मेघनाथ के पुतलों का दहन किया जाएगा। साथ ही दो मंजिला सोने की लंका भी आकर्षण का केंद्र रहेगी।
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रावण का पुतला तैयार करता कारीगर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
राजधानी रांची में दशहरा के अवसर पर होने वाला रावण दहन करीब आठ दशक पुरानी परंपरा है। इसकी शुरुआत वर्ष 1948 में हुई थी। उस समय रांची कॉलेज के पास महात्मा गांधी मार्ग स्थित डाकघर के सामने परिसर में 12 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया गया था। समय के साथ यह आयोजन लोगों के बीच लोकप्रिय होता गया और आज मोरहाबादी मैदान में रावण दहन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटते हैं।
शरणार्थी शिविर में बनते थे रावण के पुतले
वर्ष 1950 से 1955 के बीच रावण के पुतलों का निर्माण रेलवे स्टेशन के पास खजुरिया तालाब स्थित शरणार्थी शिविर में किया जाता था। उस समय बारी पार्क, वर्तमान टाउन हॉल के समीप रावण दहन का आयोजन होता था। बाद में पंजाबी हिंदू बिरादरी के सदस्यों ने डोरंडा स्थित राम मंदिर में पुतलों का निर्माण शुरू किया।
1960 में मोरहाबादी मैदान में शुरू हुआ आयोजन
आयोजन में बढ़ती भीड़ को देखते हुए वर्ष 1960 से रावण दहन के लिए मोरहाबादी मैदान का चयन किया गया। इसके बाद हर वर्ष आयोजन का स्वरूप और भव्य होता गया तथा पुतलों की ऊंचाई भी बढ़ती गई।
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70 फीट ऊंचे रावण के पुतले का होगा दहन
इस वर्ष मोरहाबादी मैदान में 70 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। वहीं, 65 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 60 फीट ऊंचे मेघनाथ के पुतले भी तैयार किए जाएंगे। कार्यक्रम को आकर्षक बनाने के लिए 30×30 फीट की दो मंजिला सोने की लंका भी बनाई जाएगी।
विभिन्न समुदायों की भागीदारी पर जोर
पंजाबी हिंदू बिरादरी हर वर्ष इस आयोजन को भव्य बनाने के साथ विभिन्न समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास करती है। रांची का यह रावण दहन आज शहर के प्रमुख दशहरा आयोजनों में शामिल है और वर्षों से लोगों की आस्था व उत्साह का केंद्र बना हुआ है।
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शरणार्थी शिविर में बनते थे रावण के पुतले
वर्ष 1950 से 1955 के बीच रावण के पुतलों का निर्माण रेलवे स्टेशन के पास खजुरिया तालाब स्थित शरणार्थी शिविर में किया जाता था। उस समय बारी पार्क, वर्तमान टाउन हॉल के समीप रावण दहन का आयोजन होता था। बाद में पंजाबी हिंदू बिरादरी के सदस्यों ने डोरंडा स्थित राम मंदिर में पुतलों का निर्माण शुरू किया।
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1960 में मोरहाबादी मैदान में शुरू हुआ आयोजन
आयोजन में बढ़ती भीड़ को देखते हुए वर्ष 1960 से रावण दहन के लिए मोरहाबादी मैदान का चयन किया गया। इसके बाद हर वर्ष आयोजन का स्वरूप और भव्य होता गया तथा पुतलों की ऊंचाई भी बढ़ती गई।
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70 फीट ऊंचे रावण के पुतले का होगा दहन
इस वर्ष मोरहाबादी मैदान में 70 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। वहीं, 65 फीट ऊंचे कुंभकर्ण और 60 फीट ऊंचे मेघनाथ के पुतले भी तैयार किए जाएंगे। कार्यक्रम को आकर्षक बनाने के लिए 30×30 फीट की दो मंजिला सोने की लंका भी बनाई जाएगी।
विभिन्न समुदायों की भागीदारी पर जोर
पंजाबी हिंदू बिरादरी हर वर्ष इस आयोजन को भव्य बनाने के साथ विभिन्न समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास करती है। रांची का यह रावण दहन आज शहर के प्रमुख दशहरा आयोजनों में शामिल है और वर्षों से लोगों की आस्था व उत्साह का केंद्र बना हुआ है।