झारखंड: रांची विश्वविद्यालय की दो संविदा कर्मचारियों की सेवा होगी नियमित, हाईकोर्ट ने तय की समयसीमा
झारखंड हाईकोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय और डोरंडा कॉलेज में लंबे समय से संविदा पर कार्यरत प्रियंका कुमारी और अनुराधा कुमारी की सेवा छह सप्ताह में नियमित करने का आदेश दिया। प्रियंका के बकाया मानदेय का भुगतान चार सप्ताह में करना होगा।
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झारखंड हाईकोर्ट ने रांची विश्वविद्यालय और डोरंडा कॉलेज में लंबे समय से संविदा पर कार्यरत दो महिला कर्मचारियों को राहत देते हुए उनकी सेवा नियमित करने का निर्देश दिया है। अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन को सहायक लाइब्रेरियन के पद पर कार्यरत प्रियंका कुमारी और कंप्यूटर ऑपरेटर अनुराधा कुमारी की सेवा छह सप्ताह के भीतर नियमित करने का आदेश दिया है। इसके साथ ही प्रियंका कुमारी के जुलाई 2015 से अप्रैल 2018 तक के बकाया मानदेय का भुगतान चार सप्ताह के भीतर करने का निर्देश दिया गया है।
न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि स्थायी प्रकृति के आवश्यक कार्य लंबे समय तक संविदा कर्मचारियों से कराना और फिर उनकी सेवा नियमित करने से इनकार करना शोषणकारी रवैया है।
एक दशक से अधिक समय से कर रही थीं काम
याचिकाकर्ता प्रियंका कुमारी और अनुराधा कुमारी डोरंडा कॉलेज में एक दशक से अधिक समय से कार्यरत हैं। प्रियंका कुमारी को जुलाई 2015 में ग्रेड-3 के पद पर नियुक्त किया गया था। बाद में उन्हें सहायक लाइब्रेरियन की जिम्मेदारी सौंपी गई। वहीं, अनुराधा कुमारी ने अप्रैल 2013 में कॉलेज में योगदान दिया था। बाद में उन्हें कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर काम सौंपा गया।
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रांची विश्वविद्यालय ने संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए कॉलेजों से सूची मांगी थी। डोरंडा कॉलेज ने नवंबर 2020 और जनवरी 2021 में विश्वविद्यालय को जो सूची भेजी थी, उसमें दोनों कर्मचारियों के नाम शामिल थे। इसके बावजूद विश्वविद्यालय ने सितंबर 2021 में अन्य कर्मचारियों को नियमित कर दिया, जबकि इन दोनों के मामले में कोई निर्णय नहीं लिया गया।
कॉलेज प्रशासन के रुख पर अदालत ने जताई नाराजगी
सुनवाई के दौरान डोरंडा कॉलेज के प्राचार्य ने याचिकाकर्ता के शुरुआती नियुक्ति पत्र के रिकॉर्ड में नहीं मिलने के आधार पर उनकी नियुक्ति पर संदेह जताया। हालांकि, विश्वविद्यालय की ओर से पेश दस्तावेजों में दोनों कर्मचारियों के नाम और उनके योगदान की तारीख दर्ज थी। रिकॉर्ड की जांच किए बिना इस तरह का दावा किए जाने पर अदालत ने नाराजगी जताई।
अदालत ने टिप्पणी की कि 15 हजार से अधिक विद्यार्थियों वाले कॉलेज में पुस्तकालय और कंप्यूटर संचालन का काम रोजमर्रा की शैक्षणिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है और यह स्थायी प्रकृति का कार्य है। ऐसे में केवल संविदा कर्मचारी होने के आधार पर उन्हें नियमितीकरण से वंचित नहीं रखा जा सकता।
छह सप्ताह में नियमितीकरण और अन्य लाभ देने का आदेश
हाईकोर्ट ने दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए रांची विश्वविद्यालय, कुलपति, रजिस्ट्रार और कॉलेज प्रशासन को निर्देश दिया कि प्रियंका कुमारी को सहायक लाइब्रेरियन और अनुराधा कुमारी को कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर छह सप्ताह के भीतर नियमित किया जाए। अदालत ने दोनों कर्मचारियों को नियमानुसार अन्य लाभ देने का भी आदेश दिया। इसके अलावा, प्रियंका कुमारी के जुलाई 2015 से अप्रैल 2018 तक के बकाया मानदेय का समायोजन कर चार सप्ताह के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया गया है।