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झारखंड: बैद्यनाथ राम राज्यसभा पहुंचे, ब्रजमोहन राम बने राज्यपाल; राज्य में सियासी चर्चा तेज

Wed, 14 Oct 2026 11:58 AM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: राँची ब्यूरो Updated Wed, 14 Oct 2026 11:58 AM IST
सार

झारखंड की राजनीति में अनुसूचित जाति समुदाय के प्रतिनिधित्व को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। झारखंड मुक्ति मोर्चा ने लातेहार के पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजा है, जबकि भाजपा के पलामू के पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया है।

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Talk of 'Two Rams' in Jharkhand politics: JMM secures a Rajya Sabha seat, while BJP appoints a Governor
झारखंड में दो राम के जरिए सियासी संदेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड की राजनीति में अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय को प्रतिनिधित्व देने और इस वर्ग के मतदाताओं के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कवायद तेज होती दिख रही है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने लातेहार के पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पलामू के पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाया गया है। दोनों नेताओं को मिली नई जिम्मेदारियों को झारखंड में अनुसूचित जाति समुदाय के राजनीतिक प्रतिनिधित्व के नजरिये से देखा जा रहा है। खासकर पलामू प्रमंडल में इन फैसलों के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

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पलामू प्रमंडल क्यों है राजनीतिक रूप से अहम?

पलामू प्रमंडल झारखंड की राजनीति में खास महत्व रखता है। यहां अनुसूचित जाति समुदाय के मतदाता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। एक समय इस क्षेत्र में कांग्रेस का प्रभाव था, लेकिन वर्ष 2014 के बाद भाजपा ने यहां अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत की। पलामू लोकसभा सीट पर भाजपा का दबदबा बना हुआ है। ऐसे में इस क्षेत्र में अपने जनाधार को बनाए रखना और उसका विस्तार करना राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

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बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजकर झामुमो ने दिया प्रतिनिधित्व का संदेश

वर्ष 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए झामुमो भी पलामू प्रमंडल में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की रणनीति पर काम करता दिखाई दे रहा है। लातेहार के पूर्व विधायक बैद्यनाथ राम को राज्यसभा भेजने के फैसले को इसी रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। इस कदम के जरिए पार्टी ने अनुसूचित जाति समुदाय को राजनीतिक प्रतिनिधित्व देने के साथ अपने पुराने और अनुभवी नेताओं को सम्मान देने का संदेश भी दिया है।

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ब्रजमोहन राम को राज्यपाल बनाकर भाजपा ने भी साधा राजनीतिक संदेश

दूसरी ओर, भाजपा ने पलामू के पूर्व सांसद ब्रजमोहन राम को ओडिशा का राज्यपाल बनाकर अपनी ओर से भी राजनीतिक संदेश दिया है। पार्टी इस नियुक्ति को अनुसूचित जाति समुदाय के सम्मान और प्रतिनिधित्व से जोड़कर पेश कर रही है। ऐसे में दोनों नेताओं को मिली नई जिम्मेदारियों के बाद झारखंड में झामुमो और भाजपा के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

2029 के चुनाव में क्या होगा इन फैसलों का असर?

झारखंड की सियासत में बैद्यनाथ राम और ब्रजमोहन राम की नियुक्तियां केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनके राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। खासकर पलामू प्रमंडल में दोनों दलों की रणनीति और अनुसूचित जाति समुदाय के बीच उनकी राजनीतिक पहुंच को लेकर इन फैसलों पर नजर रहेगी। अब देखना होगा कि दोनों दलों के ये कदम आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनावों के समीकरणों तथा पलामू प्रमंडल में उनके जनाधार को किस तरह प्रभावित करते हैं।

 

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