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माध्यमिक आचार्य नियुक्ति विवाद: तकनीकी गड़बड़ी का कारण नहीं बता सका आयोग, 26 नवंबर को अगली सुनवाई

Tue, 13 Oct 2026 04:17 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 13 Oct 2026 04:17 PM IST
सार

झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के ‘यूजर डज नॉट एक्जिस्ट’ मामले में 20 याचिकाकर्ताओं के लिए सीटें सुरक्षित रखने का आदेश दिया है। तकनीकी गड़बड़ी का कारण स्पष्ट नहीं हो सका। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।

 

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Next hearing on November 26 regarding technical irregularities in the secondary-level Acharya appointment
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड हाईकोर्ट ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा से जुड़े ‘यूजर डज नॉट एक्जिस्ट’ मामले में 20 याचिकाकर्ताओं के लिए सीटें सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने विकास पांडेय एवं अन्य की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को निर्धारित की गई है।

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20 याचिकाकर्ताओं को मिली राहत
माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा के दौरान ‘यूजर डज नॉट एक्जिस्ट’ का संदेश आने से अभ्यर्थियों को तकनीकी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस गड़बड़ी के कारणों को स्पष्ट करने और राहत की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।

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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता चंचल जैन, अभिजीत इंद्र गुरु और अभिषेक कुमार ने पक्ष रखा। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने 20 याचिकाकर्ताओं के लिए सीटें सुरक्षित रखने का निर्देश दिया। इस आदेश से मामले के अंतिम निपटारे तक संबंधित अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा का रास्ता खुला है।

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आयोग ने सरकार को भेजी अनुशंसा, नियुक्ति पत्र जारी नहीं
सुनवाई के दौरान झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि आयोग नियुक्ति के लिए अपनी अनुशंसा राज्य सरकार को भेज चुका है। हालांकि, राज्य सरकार की ओर से अब तक अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किए गए हैं। ऐसे में 20 याचिकाकर्ताओं के लिए सीटें सुरक्षित रखने का अदालत का आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

तकनीकी गड़बड़ी का कारण अब तक स्पष्ट नहीं
इस मामले में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग पहले ही शपथपत्र दाखिल कर अपना पक्ष रख चुका है। आयोग ने अपने जवाब में आशंका जताई थी कि अभ्यर्थियों की ओर से ई-मेल आईडी या पासवर्ड सही तरीके से दर्ज नहीं किए जाने के कारण ‘यूजर डज नॉट एक्जिस्ट’ का संदेश आया होगा।

हालांकि, तकनीकी समस्या के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए अदालत ने आयोग के आईटी विशेषज्ञ को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था। सुनवाई के दौरान आयोग के अधिवक्ता ने बताया कि आउटसोर्सिंग एजेंसी का कंप्यूटर विशेषज्ञ नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े एक अन्य मामले में न्यायिक हिरासत में है। इस कारण वह अदालत में उपस्थित नहीं हो सका। विशेषज्ञ की अनुपस्थिति के कारण तकनीकी गड़बड़ी के वास्तविक कारणों पर स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई। अब 26 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में इस मुद्दे पर आगे की कार्रवाई होगी।

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