झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: शिक्षक भर्ती में स्नातक अभ्यर्थियों को राहत, चार सप्ताह में नियुक्ति का आदेश
झारखंड हाईकोर्ट ने संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों के स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक अभ्यर्थियों को राहत दी है। अदालत ने उम्मीदवारी रद्द करने वाले आदेश निरस्त कर चार सप्ताह में नियुक्ति और सभी परिणामी लाभ देने का निर्देश दिया।
विस्तार
झारखंड हाईकोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक नियुक्ति मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषयों में स्नातक डिग्री के आधार पर अभ्यर्थियों को शिक्षक पद पर नियुक्त किया जाएगा। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए अभ्यर्थियों की उम्मीदवारी निरस्त करने वाले आदेशों को रद्द कर दिया। न्यायालय ने राज्य सरकार, शिक्षा विभाग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के भीतर अभ्यर्थियों को नियुक्ति प्रदान करें और सभी परिणामी लाभ दें।
अदालत ने फैसले में कहा कि जब राज्य सरकार ने स्वयं नियमों के तहत संबंधित विषयों में निर्धारित अंकों के साथ स्नातक अर्हता को स्वीकार किया था और चयन आयोग ने संशोधित विज्ञापन में इसे शामिल किया था, तब बाद में स्नातकोत्तर या आचार्य की उपाधि न होने के आधार पर अभ्यर्थियों का चयन रद्द करना अनुचित है। इस निर्णय से उन अभ्यर्थियों को राहत मिली है, जिनकी उम्मीदवारी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद खारिज कर दी गई थी।
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भर्ती प्रक्रिया और योग्यता में संशोधन
राज्य सरकार ने वर्ष 2015 में उच्च प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति और सेवा शर्तों से संबंधित नियमावली तैयार की थी। इसके बाद कर्मचारी चयन आयोग ने 28 दिसंबर 2016 को विज्ञापन संख्या 21/2016 जारी कर विभिन्न विषयों में स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों के 17,786 पदों पर नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की। इसमें संस्कृत, उर्दू, फारसी और अरबी विषय शामिल थे। इन विषयों की शैक्षणिक अर्हता को लेकर स्थिति स्पष्ट न होने पर आयोग ने सरकार को संशोधन का प्रस्ताव भेजा था।
राज्य सरकार ने 11 और 13 जनवरी 2017 को पत्र जारी कर नियमावली के नियम 16 के तहत पात्रता स्पष्ट की। इसके बाद आयोग ने संशोधित विज्ञापन जारी किया, जिसमें संस्कृत विषय के लिए न्यूनतम 45 प्रतिशत अंकों के साथ स्नातक और बीएड की योग्यता तय की गई। अन्य भाषा विषयों के लिए भी संशोधित पात्रता निर्धारित की गई। अभ्यर्थियों ने इसी संशोधित विज्ञापन के आधार पर आवेदन जमा किए थे।
परीक्षा में चयन के बाद उम्मीदवारी खारिज
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि उन्होंने संशोधित विज्ञापन की शर्तों के अनुसार आवेदन किया था। वे परीक्षा में सफल हुए और आयोग ने उन्हें प्रमाण पत्रों के सत्यापन के लिए भी बुलाया। इसके बावजूद 21 जून 2023 को नोटिस जारी कर उनकी उम्मीदवारी इस आधार पर खारिज कर दी गई कि आवेदन की अंतिम तिथि तक उनके पास स्नातकोत्तर या आचार्य की डिग्री नहीं थी। अभ्यर्थियों ने इसे पूर्व निर्धारित पात्रता के विपरीत बताया। वहीं राज्य सरकार और आयोग ने तर्क दिया कि मूल नियमावली में स्नातकोत्तर या आचार्य की डिग्री निर्धारित थी और विज्ञापन नियमों से ऊपर नहीं हो सकता।
सरकार के तर्क खारिज
हाईकोर्ट ने सरकार के तर्कों को अस्वीकार करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने नियम 16 के तहत कठिनाइयों को दूर करने के लिए जो स्पष्टीकरण दिया था, वह नियमावली का ही हिस्सा बन गया था। इसे केवल विज्ञापन की शर्त बताकर खारिज नहीं किया जा सकता। अदालत ने माना कि चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूर्व निर्धारित पात्रता से अलग शर्त लागू करना अनुचित है। अदालत ने रद्द करने वाले आदेशों को निरस्त करते हुए चार सप्ताह में नियुक्ति की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।