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झारखंड: गंगा की मिट्टी से संवरेगी उलिहातू में भगवान बिरसा मुंडा की गाथा, 15 नवंबर को होगा उद्घाटन

Thu, 29 Oct 2026 06:41 AM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Thu, 29 Oct 2026 06:41 AM IST
सार

खूंटी के उलिहातू स्थित बिरसा मुंडा म्यूजियम में गंगा की मिट्टी से बनी 12 म्यूरल पेंटिंग्स के जरिए धरती आबा के जीवन, संघर्ष और उलगुलान की गाथा दर्शाई जाएगी। 15 नवंबर को इनका उद्घाटन होगा।

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Jharkhand: The saga of Bhagwan Birsa Munda in Ulihatu to be brought to life using soil from the Ganga
बिरसा मुंडा म्यूजियम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

खूंटी जिले के उलिहातू स्थित म्यूजियम में धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा के जीवन और संघर्ष की कहानी को कलाकृतियों के माध्यम से उकेरा जा रहा है। यहां लगने वाली 12 म्यूरल पेंटिंग्स के जरिये लोग उनके बचपन, सामाजिक सुधार प्रयासों और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ उलगुलान के इतिहास को करीब से समझ सकेंगे। साहिबगंज के प्रसिद्ध म्यूरल पेंटिंग कलाकार श्याम विश्वकर्मा ने गंगा की मिट्टी से इन 12 कलाकृतियों को तैयार किया है। करीब 20 लाख रुपये की लागत से तैयार हो रही इन कृतियों का औपचारिक उद्घाटन 15 नवंबर को बिरसा मुंडा की जयंती और झारखंड स्थापना दिवस के अवसर पर किया जाएगा। इन कलाकृतियों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को धरती आबा के विचारों, आंदोलनों और आदिवासी अस्मिता से जोड़ना है।

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उलगुलान और सामाजिक अभियानों का चित्रण

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आठ गुणा पांच फीट आकार की प्रत्येक कलाकृति में भगवान बिरसा मुंडा के जीवन से जुड़े अलग-अलग महत्वपूर्ण प्रसंगों को दर्शाया गया है। इन चित्रों में उनके बचपन, पढ़ाई, बकरी चराने और मिशनरी में शिक्षा हासिल करने जैसे प्रसंगों को उकेरा गया है। इसके अलावा आदिवासी समाज को संगठित करने, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अभियान चलाने, महाजनी शोषण, जमींदारी व्यवस्था और शराबखोरी के खिलाफ उनके संघर्षों को भी स्थान दिया गया है। पेंटिंग्स में जल, जंगल और जमीन के प्रति उनके लगााव के साथ अंग्रेजों के खिलाफ चले उलगुलान आंदोलन, बिरसा मुंडा की गिरफ्तारी तथा ब्रिटिश शासन द्वारा उन पर किए गए अत्याचारों की गाथा को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।

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गंगा की मिट्टी से निर्मित पारंपरिक कला

इन म्यूरल पेंटिंग्स की सबसे बड़ी खासियत निर्माण सामग्री और तकनीक है। कलाकार ने गंगा की मिट्टी को आग में पकाकर पारंपरिक म्यूरल तकनीक से इन कृतियों को गढ़ा है। कलाकार श्याम विश्वकर्मा अपनी चार सदस्यीय टीम के साथ बुधवार को उलिहातू के लिए रवाना हुए हैं। उनकी टीम गुरुवार से चार नवंबर तक म्यूजियम में सभी कलाकृतियों की स्थापना का काम पूरा करेगी। श्याम विश्वकर्मा की बनाई कलाकृतियां इससे पहले झारखंड मंत्रालय, राज्य सचिवालय, झारखंड उच्च न्यायालय परिसर, भारतीय रिजर्व बैंक, नई दिल्ली स्थित झारखंड भवन और विभिन्न जिलों के सरकारी कार्यालयों में भी स्थापित हो चुकी हैं।

भव्य मुख्य द्वार और आदमकद प्रतिमा
उलिहातू के म्यूजियम परिसर को अधिक दर्शनीय और आकर्षक बनाने के लिए कुछ अन्य निर्माण भी प्रस्तावित हैं। योजना के अनुसार, बिरसा मुंडा के जीवन पर आधारित 30 फीट ऊंचा और 22 फीट चौड़ा एक भव्य मुख्य द्वार बनाया जाएगा। इसके साथ ही परिसर में भगवान बिरसा मुंडा की 10 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा भी स्थापित की जाएगी। इन सभी निर्माणों से म्यूजियम आने वाले दर्शकों को उस दौर के ऐतिहासिक संघर्ष और आदिवासी अधिकारों की लड़ाई को बेहतर ढंग से समझने का अवसर मिलेगा।

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