फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   jharkhand-high-court-strict-cctv-installation-delay-police-stations-officials-summoned

झारखंड: प्रदेश के थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, अधिकारियों को फिर किया तलब

Thu, 29 Oct 2026 02:43 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी Updated Thu, 29 Oct 2026 02:43 PM IST
सार

झारखंड के पुलिस थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की परियोजना में देरी पर झारखंड हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। राज्य सरकार की ओर से बजट आवंटित किए जाने के बावजूद काम की धीमी रफ्तार पर अदालत ने संबंधित अधिकारियों को फिर तलब किया है।

विज्ञापन
jharkhand-high-court-strict-cctv-installation-delay-police-stations-officials-summoned
झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

झारखंड के पुलिस थानों में सुरक्षा, मानवाधिकार संरक्षण और पारदर्शी कार्यशैली सुनिश्चित करने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की परियोजना में लगातार देरी पर झारखंड उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। उच्च न्यायालय ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना में हीलाहवाली और विभागीय स्तर पर काम आगे न बढ़ने के कारण संबंधित अधिकारियों को एक बार फिर से तलब किया है।
विज्ञापन


राज्य सरकार की ओर से प्रशासनिक स्तर पर फैसले लेने और आवश्यक बजटीय राशि आवंटित करने के बाद भी क्रियान्वयन की सुस्त रफ्तार के कारण अदालत में तारीख-दर-तारीख पड़ती जा रही है। न्यायालय को संतुष्ट करने में विफलता के कारण अधिकारियों और सरकार को लगातार असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
विज्ञापन


उच्च न्यायालय की सख्ती और निगरानी
सर्वोच्च न्यायालय ने झारखंड ही नहीं, बल्कि पूरे देश के थानों में सीसीटीवी कैमरे स्थापित करने का आदेश जारी किया था। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की मूल मंशा थानों के हर कोने में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, आम नागरिकों के मानवाधिकारों की रक्षा करने और पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता लाने की है। इस व्यवस्था के अंतर्गत थानों के संपूर्ण परिसर को नाइट विजन तथा ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग क्षमता वाले कैमरों से कवर किया जाना अनिवार्य है। झारखंड उच्च न्यायालय सर्वोच्च न्यायालय के इसी आदेश के आलोक में पूरे मामले की निगरानी कर रहा है। अदालत लगातार जानकारी मांग रही है कि थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने में विलंब की वास्तविक वजह क्या है, लेकिन विभागीय स्तर पर संतोषजनक प्रगति न होने से स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


बजटीय मंजूरी के बाद भी फंसा मामला
राज्य सरकार ने थानों में कैमरे लगाने के लिए प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी प्रदान की है। राज्य कैबिनेट ने जनवरी में ही प्रदेश के 606 थानों में कुल 8,854 सीसीटीवी कैमरे लगाने के लिए 134 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी थी। थानों में नाइट विजन व ऑडियो-वीडियो कैमरे लगाए जाने हैं।

राज्य सरकार ने इस पूरी परियोजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी झारखंड एजेंसी फॉर प्रमोशन ऑफ इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (जैप-आईटी) को सौंपी है। हालांकि, जैप-आईटी की बेहद धीमी रफ्तार के कारण परियोजना लंबे समय से लंबित है। सरकार की कोशिशों के बावजूद कैमरों के इंस्टॉलेशन का काम अब तक पूरा नहीं हो सका है और एजेंसी की शिथिलता के कारण अदालत में सरकार की किरकिरी हो रही है।

तकनीकी पेंच और निविदा का रद्द होना
परियोजना की राह में प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनें लगातार बाधा बन रही हैं। प्रशासनिक स्वीकृति मिलने के बाद जैप-आईटी ने 7 फरवरी को पहली निविदा जारी की थी, लेकिन बाद में इसे तकनीकी कारण बताकर रद्द कर दिया गया था। तब यह बात सामने आई थी कि सरकारी परियोजनाओं में तकनीकी बदलावों को शामिल करने, कंपनियों के साथ आयोजित प्री-बिड मीटिंग में आए सुझावों को जोड़ने और नियमों को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए ही निविदा रद्द की गई थी। हालांकि, इस निविदा के रद्द होने के बाद से विभाग ने पूरे मामले को तकनीकी पेंच में उलझाकर रखा है। इसके चलते निविदा प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी और योजना का काम ठप पड़ गया।


ये भी पढ़ें- धनबाद में एटीएम ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश: बिहार के दो आरोपी गिरफ्तार; दुकानों में की हजारों की खरीदारी

परामर्शदाता भुगतान और प्रशासनिक स्वीकृति
सीसीटीवी कैमरों के अधिष्ठापन को सही ढंग से पूरा करने के लिए परामर्शदाता की सेवाएं ली गई थीं। राज्य के सभी थानों में कैमरों के अधिष्ठापन के लिए 2 मार्च, 2022 के विभागीय स्वीकृत्यादेश के आलोक में झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड ने मेसर्स अर्नस्ट एंड यंग एलएलपी को परामर्शदाता बनाया था। राज्य कैबिनेट ने इसी 27 अक्तूबर को उक्त परामर्शदाता के लंबित भुगतान के लिए कुल 1,17,52,800 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति भी दे दी है। इसके बावजूद अंतर-विभागीय समन्वय की कमी और एजेंसी की ढिलाई के कारण थानों में कैमरे लगाने का कार्य धरातल पर नहीं उतर पा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed