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झारखंड: टाटा स्टील ने विकसित किया नया अग्निरोधक स्टील, 600 डिग्री में तीन घंटे तक रहेगा मजबूत

Tue, 06 Oct 2026 02:30 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: शबाहत हुसैन Updated Tue, 06 Oct 2026 02:30 PM IST
सार

टाटा स्टील ने 600 डिग्री सेल्सियस तापमान में तीन घंटे तक सामान्य क्षमता का दो-तिहाई हिस्सा बनाए रखने वाला फायर-रेजिस्टेंट ई350 स्टील विकसित किया है। बीआईएस प्रमाणित इस स्टील का इस्तेमाल इमारतों, पुलों और औद्योगिक ढांचों में किया जा सकेगा।

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Jharkhand: Tata Steel develops new fire-resistant steel; remains strong for three hours at 600 degrees
सांकेतिक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

टाटा स्टील ने इमारतों को भीषण आग से सुरक्षित रखने के लिए नया हॉट-रोल्ड फायर-रेजिस्टेंट ई350 स्ट्रक्चरल स्टील विकसित किया है। कंपनी के अनुसार, यह स्टील 600 डिग्री सेल्सियस के तापमान में भी सामान्य तापमान पर अपनी क्षमता का दो-तिहाई हिस्सा तीन घंटे तक बनाए रख सकता है। भारतीय मानक ब्यूरो ने इसे भारतीय मानक आईएस 15103 के तहत प्रमाणित किया है।

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कंपनी के मुताबिक, आग लगने की स्थिति में यह स्टील इमारत के ढांचे को अचानक कमजोर होकर ढहने से बचाने में मदद करेगा। इससे इमारत में फंसे लोगों को बाहर निकलने और राहत-बचाव कार्य के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा।

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सूक्ष्म अलाइंग तकनीक से तैयार किया गया
टाटा स्टील ने इस स्टील को विशेष अलॉय डिजाइन और माइक्रोस्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग के जरिए विकसित किया है। इसमें सूक्ष्म अलाइंग तत्वों का इस्तेमाल किया गया है, जो अत्यधिक तापमान में भी स्टील की मजबूती बनाए रखने में मदद करते हैं। कंपनी के अनुसार, यही तकनीक इसे सामान्य स्ट्रक्चरल स्टील से अलग बनाती है।

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इस उत्पाद का इस्तेमाल प्री-इंजीनियर्ड भवनों, औद्योगिक शेड, वेयरहाउस, व्यावसायिक इमारतों के मुख्य ढांचे, हॉलो सेक्शंस और ट्यूब्स, बड़े पिलर, पुलों तथा अन्य जटिल इंफ्रास्ट्रक्चर में किया जा सकता है। शॉपिंग मॉल, अस्पताल, हवाई अड्डे और बहुमंजिला इमारतों जैसे स्थानों पर भी इसका उपयोग किया जा सकता है, जहां अग्नि सुरक्षा महत्वपूर्ण है।

अग्नि सुरक्षा के नए मानक स्थापित करने की उम्मीद
टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (टेक्नोलॉजी, आरएंडडी, न्यू मटीरियल बिजनेस एवं ग्राफीन) सुबोध पांडेय ने कहा कि आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के डिजाइन में अग्नि सुरक्षा का महत्व लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में नई तकनीकों और उन्नत सामग्रियों का विकास जरूरी है। उन्होंने कहा कि कंपनी का नया उत्पाद आधुनिक निर्माण की जरूरतों को पूरा करने के साथ अग्नि सुरक्षा के नए मानक स्थापित करने में मदद करेगा। कंपनी के अनुसार, इस उत्पाद से उसके वैल्यू-एडेड स्टील पोर्टफोलियो को मजबूती मिलेगी और देश में सुरक्षित तथा आधुनिक निर्माण को बढ़ावा मिलेगा।

घरेलू मांग से बढ़ेगी स्टील की खपत
टाटा स्टील के मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक टीवी नरेंद्रन ने नई दिल्ली में इंडियन फाउंडेशन फॉर क्वालिटी मैनेजमेंट की संगोष्ठी के बाद मीडिया से बातचीत में कहा कि भारत में मजबूत घरेलू मांग के कारण आने वाले वर्षों में स्टील की खपत सात से आठ प्रतिशत या उससे अधिक दर से बढ़ने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि जीएसटी सुधारों से ऑटोमोबाइल क्षेत्र को गति मिली है। औद्योगिक परियोजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निर्माण कार्यों में भी स्टील की मांग मजबूत बनी हुई है। शहरी और ग्रामीण दोनों बाजारों में संतुलित वृद्धि देखने को मिल रही है, जिससे अगले तीन से चार वर्षों में स्टील उद्योग की संभावनाएं बेहतर दिखाई दे रही हैं।

लोकल सप्लाई चेन मजबूत करने पर जोर
वैश्विक स्तर पर बढ़ते टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों पर टीवी नरेंद्रन ने कहा कि दुनिया भर की कंपनियां अब केवल लागत कम करने के बजाय अपनी आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत और सुरक्षित बनाने पर ध्यान दे रही हैं। ऐसे में भारत में मैन्युफैक्चरिंग निवेश बढ़ाना और स्थानीय सप्लाई चेन को मजबूत करना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि भारत के बड़े और बढ़ते बाजार का लाभ उठाने वाली विदेशी कंपनियों को देश में निवेश करना चाहिए। उन्हें भारत में रोजगार के अवसर पैदा करने और स्थानीय ग्राहकों को देश के भीतर रहकर सेवाएं देने पर ध्यान देना चाहिए।

ग्रीन स्टील के लिए नीतिगत सहयोग जरूरी
भारत की ग्रीन स्टील पहल पर नरेंद्रन ने कहा कि देश अभी इस बदलाव के शुरुआती चरण में है। यूरोप जैसे विकसित बाजारों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने के लिए सरकार के नीतिगत सहयोग की जरूरत होगी। उन्होंने कहा कि ग्रीन स्टील के लिए अधिक कीमत चुकाने को तैयार ग्राहक और उद्योग जगत की ओर से बड़े पैमाने पर निवेश भी जरूरी होगा।

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