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झारखंड: खनन परियोजनाओं को कड़ी शर्तों के साथ मिली मंजूरी, हर छह महीने में देनी होगी सुरक्षा मानकों की रिपोर्ट
Wed, 28 Oct 2026 04:34 PM IST
शबाहत हुसैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: शबाहत हुसैन
Updated Wed, 28 Oct 2026 04:34 PM IST
सार
झारखंड में सिया ने कई लघु खनन परियोजनाओं को कड़ी पर्यावरणीय शर्तों के साथ मंजूरी दी है। पौधारोपण, धूल नियंत्रण, श्रमिकों की सुरक्षा और डिजिटल निगरानी अनिवार्य की गई है। नियमों के उल्लंघन पर स्वीकृति रद्द होगी।
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सांकेतिक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड में राज्य स्तरीय पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (सिया) ने खनन गतिविधियों और पर्यावरण संतुलन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए राज्य भर की कई लघु खनिज परियोजनाओं को कड़ी शर्तों के साथ स्वीकृति दी है। प्राधिकार ने हर छह महीने में जिओ-टैग तस्वीरों के साथ सुरक्षा मानकों की रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य किया है।
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प्राधिकार ने झारखंड उच्च न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित करते हुए हरित क्षेत्र के विस्तार, कर्मचारियों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और डिजिटल निगरानी को अनिवार्य बनाया है। इन नियमों का उल्लंघन करने पर परियोजनाओं की स्वीकृति तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएगी।
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विभिन्न जिलों में खनन परियोजनाओं को मिली मंजूरी
प्राधिकार ने दुमका जिले के शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र स्थित लोवापारा गांव में मेसर्स लक्ष्मी स्टोन वर्क्स की 1.963 हेक्टेयर भूमि पर फैले पत्थर खनन प्रोजेक्ट को नियम और शर्तों की समीक्षा के बाद 'टर्म्स ऑफ रेफरेंस' (टीओआर) की स्वीकृति प्रदान की है। प्राधिकार ने वन क्षेत्र से 912 मीटर की दूरी की पुष्टि होने के बाद यह निर्णय लिया है। प्रोजेक्ट प्रमोटर को प्रस्तावित सीमा के 500 मीटर के दायरे में रहने वाली आबादी के संरक्षण के लिए एक विस्तृत पर्यावरण प्रबंधन योजना तैयार करके उसे ईआइए रिपोर्ट में शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं।
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इसी प्रकार, लातेहार जिले के चंदवा थाना क्षेत्र स्थित लतदाग मौजा में मेसर्स टॉप ब्रिक्स की 0.32 हेक्टेयर क्षेत्र की ईंट मिट्टी खनन परियोजना को पर्यावरण मंजूरी दी गई है। साहिबगंज जिले के बरहरवा और कोटलपोखर तथा आसपास के क्षेत्रों में चार प्रमुख मिट्टी खनन परियोजनाओं को स्वीकृति मिली है। इनमें मेसर्स किसान ब्रिक्स फील्ड, मेसर्स सोनी ब्रिक्स फील्ड, मेसर्स जय जवान और मेसर्स डायमंड ब्रिक्स शामिल हैं। इसके अतिरिक्त साहिबगंज के मांडरो अंचल स्थित पकारिया गांव में मेसर्स जय मां तारा स्टोन वर्क्स की 2.934 हेक्टेयर की स्टोन माइनिंग परियोजना को भी मंजूरी मिली है, जो वन सीमा से 400 मीटर से अधिक दूर है।
हरित क्षेत्र विस्तार और पौधारोपण के कड़े नियम
पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए प्राधिकार ने सभी स्वीकृत परियोजनाओं पर विशेष और कठोर शर्तें लागू की हैं। भारत सरकार के निर्देशानुसार हरित क्षेत्र में पौधे लगाने का काम अनिवार्य किया गया है। परियोजना के कुल प्रस्तावित हरित क्षेत्र का 10% हिस्सा एक पेड़ मां के नाम अभियान के लिए आरक्षित रहेगा। परियोजना संचालकों को इससे संबंधित संपूर्ण डेटा 'मेरी लाइफ' पोर्टल पर अपलोड करना होगा।
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इसके साथ ही खदान सुरक्षा क्षेत्र के लिए निर्धारित पौधारोपण क्षेत्रफल से दोगुना क्षेत्रफल में कम से कम दो मीटर ऊंचे उपयुक्त प्रजाति के पौधे खदान के पास उपलब्ध बाहरी भूमि पर लगाने होंगे। खनन कंपनियों को इन नए रोपे गए पौधों का न्यूनतम तीन वर्षों तक उचित रखरखाव करना होगा और समय-समय पर जिओ-टैग की गई तस्वीरों के साथ अपनी प्रगति रिपोर्ट प्राधिकार को सौंपनी होगी।
श्रमिकों के स्वास्थ्य और धूल नियंत्रण के अनिवार्य मानक
खदानों और आसपास के क्षेत्रों में धूल के प्रभाव को कम करने के लिए कंपनियों को समर्पित वाटर टैंकर रखना अनिवार्य होगा। इस टैंकर का उपयोग केवल सड़कों पर पानी का छिड़काव करके धूल दबाने और नए पौधों की सिंचाई के लिए किया जाएगा। खनन क्षेत्र की सड़कों को हर समय नम रखना अनिवार्य किया गया है।
श्रमिकों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के मामले में प्राधिकार ने कड़ा रुख अपनाया है। खनन कार्य में लगे सभी कर्मचारियों को 3एम मेक या उसके समतुल्य गुणवत्ता वाले सुरक्षा उपकरण जैसे हेलमेट, सुरक्षात्मक चश्मा और विशेष कपड़े देना अनिवार्य है। कार्य शुरू करने से पहले और उसके बाद प्रत्येक वर्ष कर्मचारियों का स्वास्थ्य परीक्षण कराया जाएगा। खदानों के जोखिम वाले संवेदनशील हिस्सों को मानवरहित रखा जाएगा और कर्मचारियों की ड्यूटी रोटेशन प्रणाली के आधार पर लगाई जाएगी।