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Jharkhand News: 'छात्रों के न्यायपूर्ण आंदोलन के साथ', हिमंत बिस्वा सरमा ने JPSC आंदोलन को दिया समर्थन
Tue, 04 Aug 2026 05:00 PM IST
आशुतोष प्रताप सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: आशुतोष प्रताप सिंह
Updated Tue, 04 Aug 2026 05:00 PM IST
सार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने झारखंड में जेपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों को नैतिक समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि झामुमो सरकार अगर समय रहते छात्रों की शिकायतों पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता से कार्रवाई करती तो यह स्थिति नहीं बनती।
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
झारखंड में जेपीएससी और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन को अब दूसरे राज्यों से भी समर्थन मिलने लगा है। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने आंदोलनरत छात्रों को अपना "नैतिक समर्थन" देते हुए झारखंड की झामुमो सरकार से उनकी जायज मांगों को तुरंत स्वीकार करने और उन्हें न्याय देने की अपील की है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का अन्याय स्वीकार नहीं किया जा सकता।
छात्रों के दर्द और गुस्से को करीब से देखा: हिमंत सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें जेएसएससी-सीजीएल अभ्यर्थियों की पीड़ा, गुस्से और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंताओं को करीब से समझने का मौका मिला था। उन्होंने कहा कि आज जो छात्र अपने भविष्य और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, उनकी भावनाओं को वह अच्छी तरह समझते हैं।
'सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई होती तो यह स्थिति नहीं आती'
हिमंत सरमा ने दावा किया कि यदि झामुमो सरकार ने समय रहते छात्रों की शिकायतों पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की होती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप लगातार बढ़ते गए, जिसके कारण आज लाखों युवाओं का भविष्य संकट में पड़ गया है।
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'छात्रों के न्यायपूर्ण आंदोलन को मेरा नैतिक समर्थन'
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह झारखंड के छात्रों और युवाओं के इस न्यायपूर्ण आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन देते हैं। उन्होंने झारखंड सरकार से अपील करते हुए कहा कि छात्रों की सभी जायज मांगों को तत्काल स्वीकार किया जाए और उन्हें जल्द न्याय दिया जाए।
'युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय स्वीकार नहीं'
हिमंत सरमा ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाएं और युवाओं का विश्वास कायम रखें।
29 जुलाई से जारी है छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
अब रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों के पैनल से जांच की मांग
मंगलवार को आंदोलनकारी छात्रों ने अपनी मांग और आगे बढ़ाते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से कराई जाए। छात्रों का आरोप है कि राज्य सरकार सीआईडी को जांच सौंपकर पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।
पहले CBI और ED जांच की कर चुके हैं मांग
आंदोलनकारी इससे पहले पूरे मामले की सीबीआई जांच के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से भी जांच कराने की मांग कर चुके हैं। छात्रों का दावा है कि कथित भर्ती घोटाले में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन हुआ है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
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छात्रों के दर्द और गुस्से को करीब से देखा: हिमंत सरमा
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि झारखंड विधानसभा चुनाव के दौरान उन्हें जेएसएससी-सीजीएल अभ्यर्थियों की पीड़ा, गुस्से और भर्ती प्रक्रिया को लेकर उनकी चिंताओं को करीब से समझने का मौका मिला था। उन्होंने कहा कि आज जो छात्र अपने भविष्य और न्याय की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, उनकी भावनाओं को वह अच्छी तरह समझते हैं।
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'सरकार ने संवेदनशीलता दिखाई होती तो यह स्थिति नहीं आती'
हिमंत सरमा ने दावा किया कि यदि झामुमो सरकार ने समय रहते छात्रों की शिकायतों पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई की होती, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोप लगातार बढ़ते गए, जिसके कारण आज लाखों युवाओं का भविष्य संकट में पड़ गया है।
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'छात्रों के न्यायपूर्ण आंदोलन को मेरा नैतिक समर्थन'
मुख्यमंत्री ने कहा कि वह झारखंड के छात्रों और युवाओं के इस न्यायपूर्ण आंदोलन को अपना नैतिक समर्थन देते हैं। उन्होंने झारखंड सरकार से अपील करते हुए कहा कि छात्रों की सभी जायज मांगों को तत्काल स्वीकार किया जाए और उन्हें जल्द न्याय दिया जाए।
'युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय स्वीकार नहीं'
हिमंत सरमा ने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाएं और युवाओं का विश्वास कायम रखें।
29 जुलाई से जारी है छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन
झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और अन्य भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक के विरोध में छात्र 29 जुलाई से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन धरना दे रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
अब रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों के पैनल से जांच की मांग
मंगलवार को आंदोलनकारी छात्रों ने अपनी मांग और आगे बढ़ाते हुए कहा कि पूरे मामले की जांच झारखंड से बाहर के सेवानिवृत्त हाईकोर्ट न्यायाधीशों के स्वतंत्र पैनल से कराई जाए। छात्रों का आरोप है कि राज्य सरकार सीआईडी को जांच सौंपकर पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।
पहले CBI और ED जांच की कर चुके हैं मांग
आंदोलनकारी इससे पहले पूरे मामले की सीबीआई जांच के साथ-साथ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) से भी जांच कराने की मांग कर चुके हैं। छात्रों का दावा है कि कथित भर्ती घोटाले में बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन हुआ है, जिसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।