फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Ranchi News ›   gumla albert ekka son vincent ekka tractor rotavator returned agricultural mechanization scheme subsidy

झारखंड: परमवीर चक्र विजेता अल्बर्ट एक्का के बेटे को मिला ट्रैक्टर वापस, जानें क्या है पूरा मामला

Sat, 03 Oct 2026 11:17 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: आशुतोष प्रताप सिंह Updated Sat, 03 Oct 2026 11:17 AM IST
सार

परमवीर चक्र विजेता शहीद लांस नायक अल्बर्ट एक्का के पुत्र विंसेंट एक्का को कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत अनुदान पर मिला ट्रैक्टर और रोटावेटर 30 अगस्त को कंपनी ने वापस ले लिया। 9.25 लाख रुपये के वाहन में 50 प्रतिशत राशि सरकारी अनुदान और बाकी रकम लाभुक की हिस्सेदारी थी।

विज्ञापन
gumla albert ekka son vincent ekka tractor rotavator returned agricultural mechanization scheme subsidy
परमवीर चक्र विजेता शहीद अल्बर्ट एक्का के बेटे को मिला ट्रैक्टर-रोटावेटर कंपनी ने वापस लिया - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

परमवीर चक्र विजेता शहीद लांस नायक अल्बर्ट एक्का के पुत्र विंसेंट एक्का को कृषि यंत्रीकरण योजना के तहत अनुदान पर दिया गया ट्रैक्टर और रोटावेटर कंपनी ने वापस ले लिया है। लाभुक की ओर से तय हिस्से की राशि जमा नहीं होने के कारण भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में कंपनी के प्रतिनिधियों ने यह कार्रवाई की। ट्रैक्टर और रोटावेटर की कुल कीमत करीब 9.25 लाख रुपये बताई गई है।

विज्ञापन


योजना के नियमों के मुताबिक वाहन की कुल लागत का 50 प्रतिशत हिस्सा सरकार की ओर से अनुदान के रूप में दिया जाना था, जबकि बाकी 50 प्रतिशत राशि लाभुक को जमा करनी थी। विंसेंट एक्का की ओर से यह रकम जमा नहीं होने पर 30 अगस्त को भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में स्वराज कंपनी के प्रतिनिधि जारी गांव पहुंचे और ट्रैक्टर व रोटावेटर वापस ले गए।

विज्ञापन

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद मिला था ट्रैक्टर

विंसेंट एक्का ने इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर कृषि कार्यों के लिए ट्रैक्टर उपलब्ध कराने का अनुरोध किया था। इसके बाद मुख्यमंत्री के निर्देश पर गुमला उपायुक्त को शहीद के पुत्र को ट्रैक्टर उपलब्ध कराने की बात कही गई थी। भूमि संरक्षण विभाग की पहल पर 23 दिसंबर 2024 को स्वराज कंपनी के प्रतिनिधि दीपक अग्रवाल जारी गांव पहुंचे और विंसेंट एक्का को ट्रैक्टर व रोटावेटर सौंपा। वाहन देते समय विंसेंट ने अपनी हिस्सेदारी की राशि जमा करने में असमर्थता जताई थी। उस समय उपायुक्त की ओर से कथित तौर पर कहा गया था कि लाभुक के हिस्से की रकम का भुगतान उपायुक्त फंड से किया जाएगा।

विज्ञापन
विज्ञापन

कंपनी प्रतिनिधि दीपक अग्रवाल का कहना है कि इस आश्वासन के बावजूद कंपनी को लाभुक की हिस्सेदारी की कोई राशि नहीं मिली।

कई बार भुगतान का आश्वासन, फिर वापस लिया वाहन

दीपक अग्रवाल के मुताबिक, बकाया रकम के भुगतान के लिए उन्होंने कई बार उपायुक्त और भूमि संरक्षण विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया। हर बार भुगतान का आश्वासन दिया गया, लेकिन कंपनी को राशि प्राप्त नहीं हुई। कंपनी ने वाहन वापस लेने से करीब 10 दिन पहले उपायुक्त को लिखित आवेदन देकर भी जानकारी दी थी कि बकाया भुगतान नहीं होने की स्थिति में ट्रैक्टर और रोटावेटर वापस ले लिया जाएगा। इसके बाद 30 अगस्त को विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में दोनों वाहन वापस ले लिए गए। भूमि संरक्षण पदाधिकारी राम प्रकाश कुमार ने कहा कि लाभुक से लगातार उनकी हिस्सेदारी की राशि जमा करने का आग्रह किया गया था, लेकिन रकम जमा नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि निर्धारित राशि जमा होने के बाद ट्रैक्टर वापस कर दिया जाएगा।

विंसेंट बोले- सरकार को देनी थी हिस्सेदारी की रकम

वहीं, विंसेंट एक्का का कहना है कि उनके हिस्से की राशि का भुगतान भी सरकार की ओर से किया जाना था। उन्होंने अधिकारियों पर दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। विंसेंट के मुताबिक उन्होंने इस मामले में मंत्री और विधायक से भी पैरवी करवाई, लेकिन इसके बावजूद राशि का इंतजाम नहीं हो सका।
इस मामले में कंपनी का कहना है कि निर्धारित हिस्सेदारी की राशि नहीं मिलने के कारण वाहन वापस लेना पड़ा, जबकि विंसेंट का दावा है कि रकम सरकार की ओर से उपलब्ध कराई जानी थी। फिलहाल ट्रैक्टर और रोटावेटर विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में कंपनी को वापस सौंपे जा चुके हैं।

1971 के युद्ध में शहीद हुए थे अल्बर्ट एक्का

लांस नायक अल्बर्ट एक्का 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में अदम्य साहस और पराक्रम दिखाने वाले भारतीय सैनिकों में शामिल थे। उनका जन्म 1942 में गुमला जिले में हुआ था और वह सेना की ब्रिगेड ऑफ द गार्ड्स में तैनात थे। 3 दिसंबर 1971 को गंगासागर की लड़ाई के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने दुश्मन के कई बंकरों को नष्ट किया और साथी सैनिकों की मदद की। इसी वीरतापूर्ण कार्रवाई के दौरान वह शहीद हो गए। देश के लिए उनके सर्वोच्च बलिदान और अदम्य साहस के लिए उन्हें मरणोपरांत भारत के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed