फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Ranchi News ›   Elephant Rampage in Dhurki Crops Across 150 Acres Destroyed Villagers Live in Fear

धुरकी में हाथियों का तांडव: 150 एकड़ में पककर तैयार धान-मक्के की फसल रौंदी, 10 दिन से दहशत में ग्रामीण

Fri, 18 Sep 2026 07:09 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Fri, 18 Sep 2026 07:09 PM IST
सार

धुरकी के कनहर तटीय क्षेत्र में हाथियों के झुंड ने कदवा गांव में 100 से 150 एकड़ में लगी धान, मक्का, तिल और अरहर की फसल को रौंद दिया। ग्रामीणों के अनुसार, पिछले 10 दिनों से हाथी लगातार गांवों और खेतों में नुकसान पहुंचा रहे हैं।

विज्ञापन
Elephant Rampage in Dhurki Crops Across 150 Acres Destroyed Villagers Live in Fear
हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

धुरकी के कनहर तटीय क्षेत्र के कदवा गांव में गुरुवार रात हाथियों के झुंड ने जमकर उत्पात मचाया। धान की फसल पककर तैयार होने से ठीक पहले हाथियों ने भंडार पंचायत के इस गांव में 100 से 150 एकड़ में लगी धान, मक्का, तिल और अरहर की फसल को पूरी तरह रौंद दिया। असमय बारिश के कारण खेती के लिए पर्याप्त वर्षा नहीं होने के बावजूद किसानों ने कड़ी मेहनत से फसल तैयार की थी। हाथियों के इस हमले से किसानों की पूरी मेहनत पर पानी फिर गया है। पिछले 10 दिनों से हाथियों का यह समूह कनहर नदी के तटीय गांवों में दो समूहों में बंटकर लगातार फसलों को तबाह कर रहा है।
विज्ञापन


फसलों का नुकसान और ग्रामीणों में दहशत
हाथियों के इस हमले से रामप्रवेश प्रसाद गुप्ता, दयानंद प्रसाद गुप्ता, विकेश कोरवा, मंदिर सिंह, बसंत सिंह, ललन कोरवा, भिखारी शाह, अमर प्रसाद गुप्ता, अवधेश प्रसाद गुप्ता और बंसीधर गुप्ता सहित कई किसान गंभीर रूप से प्रभावित हुए हैं।
विज्ञापन


हाथियों के झुंड में एक दर्जन से अधिक छोटे-बड़े हाथी शामिल
ग्रामीणों के अनुसार, हाथियों के झुंड में एक दर्जन से अधिक छोटे-बड़े हाथी शामिल हैं। शाम ढलते ही ये हाथी जंगलों से निकलकर गांवों में घुस जाते हैं और खेतों में खड़ी फसल को पूरी तरह कुचल देते हैं। जंगल से सटे गांवों में हाथियों ने कई कच्चे मकानों को भी नुकसान पहुंचाया है। हाथियों के भय से ग्रामीण शाम होते ही अपने घरों में दुबकने को विवश हैं। अब लोगों को अपनी फसलों के साथ-साथ जान-माल की सुरक्षा की भी गहरी चिंता सता रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तीन वर्षों में पांच लोगों की मौत का दावा
ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के लगातार हो रहे हमलों के कारण पिछले तीन वर्षों के दौरान क्षेत्र में पांच लोगों की जान जा चुकी है। इसके साथ ही हाथियों ने चार दर्जन से अधिक पशुओं को मार डाला है और दो दर्जन से अधिक कच्चे घरों को पूरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया है। लगातार पांच वर्षों से फसलें नष्ट होने के कारण किसानों की आर्थिक स्थिति बिगड़ चुकी है। हाथियों के डर से कई किसान खेती छोड़ने के लिए भी मजबूर हो रहे हैं। वन विभाग ने कनहर तटीय क्षेत्र की चार पंचायतों- खाला, अंबाखोरया, भंडार और खुटिया—को पहले ही हाथी जोन घोषित कर रखा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बाद भी वन विभाग ने हाथियों को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया।


ये भी पढ़ें-   झारखंड: सीएम हेमंत सोरेन की मां रूपी सोरेन की फिर बिगड़ी तबीयत, सांस लेने में तकलीफ के बाद अस्पताल में भर्ती

सुरक्षा सामग्री वितरण और मुआवजे का आश्वासन
हाथियों की बढ़ती गतिविधियों पर वनपाल प्रमोद कुमार ने बताया कि क्षेत्र में हाथियों का झुंड लगातार सक्रिय है। ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए विभाग ने उन्हें टॉर्च और पटाखे उपलब्ध कराए हैं। इसके साथ ही अधिकारियों ने ग्रामीणों को हिदायत दी है कि वे हाथियों को बिल्कुल न भड़काएं और बिना वजह जंगल की तरफ न जाएं। वन विभाग ने प्रभावित किसानों से क्षतिपूर्ति के लिए आवेदन जमा करने को कहा है। सरकार के नियमों के अनुसार पीड़ित किसानों को जल्द से जल्द मुआवजा राशि दी जाएगी।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed