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Jharkhand: 10 साल से बदाहाल स्थिति में डैम, सूख रहे खेत; आखिर कब मिलेगा किसानों को सिंचाई के लिए पानी?
Wed, 06 May 2026 10:30 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Wed, 06 May 2026 10:30 PM IST
सार
Jharkhand News: चतरा का जयप्रकाश डैम एक दशक से टूटा गया है, जिससे किसानों की सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है। खेती मानसून पर निर्भर हो गई है और भूजल स्तर गिर रहा है। ग्रामीणों ने जल्द मरम्मत या पुनर्निर्माण की मांग की है। पढ़ें पूरी खबर...
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बदहाल स्थिति में जयप्रकाश डैम
- फोटो : Amar Ujala
विस्तार
चतरा जिले के प्रतापपुर स्थित यादव नगर टंडवा का जयप्रकाश डैम पिछले लगभग एक दशक से बदहाल स्थिति में है। वर्ष 2016 में डैम टूटने के बाद से अब तक इसके पुनर्निर्माण या मरम्मत की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है, जिसका सीधा असर स्थानीय किसानों की आजीविका पर पड़ रहा है।
12 गांवों के हजारों एकड़ जमीन की सिंचाई होती थी
कभी यह डैम क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा माना जाता था। इसके माध्यम से आसपास के करीब 12 गांवों की हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई होती थी, जिससे धान, गेहूं, दलहन और तिलहन जैसी फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती थीं। लेकिन डैम के टूटने के बाद पूरी सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है और कृषि कार्य अब पूरी तरह मानसून पर निर्भर हो गया है।
करोड़ों रुपये में हुई थी मरम्मत
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2013-14 में करोड़ों रुपये की लागत से इस डैम की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब रही। परिणामस्वरूप, कुछ ही वर्षों में डैम दोबारा टूट गया। इसके बाद कई बार विभागीय स्तर पर निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार की गई, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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ये भी पढ़ें- Jharkhand 12th Result: झारखंड बोर्ड 12वीं का रिजल्ट जारी, आर्ट्स संकाय का परिणाम रहा अव्वल; कौन बना टॉपर
ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि डैम की जल्द से जल्द मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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12 गांवों के हजारों एकड़ जमीन की सिंचाई होती थी
कभी यह डैम क्षेत्र के किसानों के लिए जीवनरेखा माना जाता था। इसके माध्यम से आसपास के करीब 12 गांवों की हजारों एकड़ भूमि की सिंचाई होती थी, जिससे धान, गेहूं, दलहन और तिलहन जैसी फसलें बड़े पैमाने पर उगाई जाती थीं। लेकिन डैम के टूटने के बाद पूरी सिंचाई व्यवस्था चरमरा गई है और कृषि कार्य अब पूरी तरह मानसून पर निर्भर हो गया है।
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करोड़ों रुपये में हुई थी मरम्मत
ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2013-14 में करोड़ों रुपये की लागत से इस डैम की मरम्मत कराई गई थी, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहद खराब रही। परिणामस्वरूप, कुछ ही वर्षों में डैम दोबारा टूट गया। इसके बाद कई बार विभागीय स्तर पर निरीक्षण और रिपोर्ट तैयार की गई, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हो सकी।
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ग्रामीणों ने सरकार से मांग की है कि डैम की जल्द से जल्द मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि किसानों को राहत मिल सके। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी ठोस कदम नहीं उठाया गया तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।