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Jharkhand: झारखंड में SIR प्रक्रिया तेज; 2003 की मतदाता सूची से 26.75% वोटरों का नहीं हुआ मिलान
Sun, 24 May 2026 04:21 PM IST
राँची ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: राँची ब्यूरो
Updated Sun, 24 May 2026 04:21 PM IST
सार
Jharkhand: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान को तेज कर दिया गया है। निर्वाचन विभाग के अनुसार राज्य के 26.75 प्रतिशत यानी 70 लाख 84 हजार 802 मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा पाया है।
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मतदान केंद्र पर पहुंचे लोग
विस्तार
झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। राज्य के सभी मतदान केंद्रों पर विधानसभावार अनमैप्ड मतदाताओं की सूची प्रदर्शित कर दी गई है, जहां मतदाता अपना नाम जांच कर बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) से संपर्क कर मैपिंग की प्रक्रिया पूरी करा सकते हैं। यह सूची अगले दो सप्ताह तक संबंधित मतदान केंद्रों पर उपलब्ध रहेगी।
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मतदान केंद्रों पर पहुंच रहे मतदाता
राजधानी रांची के कई मतदान केंद्रों पर मतदाता सूची से मिलान कराने के लिए लोग पहुंचे। जिनका नाम तकनीकी कारणों से कट गया था, उनके नाम जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की गई। मतदान केंद्रों पर अरगोड़ा, हरमू, कडरू और किशोरगंज से आए कई लोगों ने चुनाव आयोग की इस पहल का स्वागत किया। लोगों का कहना है कि इससे मतदान के दिन होने वाली परेशानियों से बचा जा सकेगा।
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70 लाख से अधिक मतदाता अनमैप्ड
निर्वाचन विभाग के अनुसार राज्य में कुल 2 करोड़ 64 लाख 87 हजार 659 मतदाता हैं। इनमें से 70 लाख 84 हजार 802 मतदाताओं का नाम वर्ष 2003 की मतदाता सूची से मेल नहीं खा सका है। यह संख्या कुल मतदाताओं का 26.75 प्रतिशत है। विभाग ने ऐसे मतदाताओं की सूची सार्वजनिक कर दी है, ताकि वे अपने नाम की जांच कर आवश्यक सुधार करा सकें।
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किन मतदाताओं को देना होगा दस्तावेज
निर्वाचन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं का नाम अनमैप्ड सूची में नहीं है, उन्हें एसआईआर प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार का दस्तावेज जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं, जिनका नाम सूची में दर्ज है, उन्हें निर्धारित 11 दस्तावेजों में से किसी एक दस्तावेज को प्रस्तुत करना होगा।
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2003 की सूची को बनाया गया आधार
बताया गया कि वर्ष 2003 में राज्य में अंतिम बार एसआईआर कराया गया था। उसी समय की मतदाता सूची को आधार बनाकर वर्तमान मतदाताओं की मैपिंग की जा रही है। निर्वाचन विभाग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक शुद्ध और अद्यतन बनाना है, ताकि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और त्रुटिरहित हो सके।