बाप-बेटे की एक गलती और 17 साल की सजा
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"ठेठ गांव का आदमी हूं। ताउम्र किसी से तू-तू, मैं-मैं नहीं किया। अब इसे तक़दीर का हिस्सा ही मानें। जुर्म हत्या का। सज़ा आजीवन कारावास। 17 साल से अधिक वक़्त जेल की दीवारों के भीतर गुज़र गई। अकेले नहीं बेटे के साथ। अब जितने बरस जी सकूं, भूल कर भी ये हाथ नहीं उठे और बाल-बच्चों की हालत जीने लायक़ हो जाए।"
यह सब कहते हुए गोथर महतो का गला भर आता है। गोथर महतो की उम्र 86 साल है और बेटे खेदन महतो की 60।
दोनों निरक्षर हैं और बिल्कुल ग़रीब। वैसे गोथर महतो का दावा है कि वे 90 पार कर चुके हैं। अपने एक रिश्तेदार की हत्या के आरोप में पिता-पुत्र को आजीवन कारावास की सज़ा मिली थी।
22 फ़रवरी को दोनों रांची केंद्रीय कारागार से रिहा हुए हैं। अपने जुर्म का ज़िक्र करते ठेठ गंवई अंदाज़ में गोथर सफ़ाई देते हैं, "ग़ुस्से में बस एक ही डंडा तो मारा था बाबू, अब ऊ मर ही गए, तो क्या बताएं।"
आंदोलन का असर
गोथर महतो जैसे कुछ और भी क़ैदियों के क़िस्से हैं जिन्होंने झारखंड की जेलों से रिहा होने के लिए भूख हड़ताल का आंदोलन चला रखा था।
30 जनवरी से पांच फ़रवरी तक राज्य की अलग-अलग जेलों में क़ैदियों ने भूख हड़ताल की थी। वजह यह कि जिन क़ैदियों ने आजीवन कारावास की मियाद पूरी कर ली है, सरकार उन्हें रिहा नहीं कर रही।
तब झारखंड हाईकोर्ट ने इस मामले पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार से जवाब-तलब किया।
छह फ़रवरी को कोर्ट ने सरकार से पूछा था कि क़ैदियों के अनशन को ख़त्म कराने के लिए क्या क़दम उठाए गए हैं।
फिर सात फ़रवरी को मुख्य न्यायाधीश आर भानुमति और न्यायाधीश एस चंद्रशेखर की खंडपीठ ने क़ैदियों की रिहाई के मामले में सरकार से गाइड लाइन बताने को कहा था।
सरकार का फ़ैसला
सरकार ने ऐसे 53 क़ैदियों को रिहा करने का फ़ैसला किया। गोथर और उनके बेटे खेदन भी इन्हीं लोगों में शामिल हैं।
21 फ़रवरी को हाईकोर्ट ने इस मामले पर फिर सुनवाई की और 53 क़ैदियों को तत्काल रिहा करने के आदेश दिए।
फ़िलहाल रांची केंद्रीय कारा से आठ और हज़ारीबाग़ केंद्रीय कारा से 10 क़ैदी रिहा कर दिए गए हैं।
रांची केंद्रीय कारा के अधीक्षक डीके प्रधान बताते हैं कि 22 फ़रवरी को आठ क़ैदी अपने घरों को चले गए और दो क़ैदियों को रिहा किया जाना है। उन्होंने अपना जुर्माना नहीं भरा है।
जेल अधीक्षक के मुताबिक़ सज़ा के दौरान गोथर महतो और उनके पुत्र का आचरण अच्छा रहा। खेदन महतो के बारे में फ़ैसला लिया गया है कि अगले एक साल तक उनकी गतिविधियों की समीक्षा होगी।
इस दौरान उन्हें नियमानुसार हाज़िरी भी देनी होगी।
'बहुत कुछ खोया'
झारखंड की राजधानी रांची से 45 किलोमीटर दूर बुढ़मू थाना के सुदूर कंडेर नवाड़ी गांव के रहने वाले हैं गोथर महतो।
हम सुबह ही उनके गांव पहुंचे थे। वे घर के बाहर जानवरों को घास-फूस खिलाते मिले।
छोटा सा मिट्टी का खपरैल घर। अभाव भरी ज़िंदगी। हमारे सवाल पर पिता-पुत्र एक साथ बोले, "जेल से बाहर आए, तो काफ़ी ख़ुश थे, लेकिन घर, खेत-बारी और परिजनों का हाल देखकर काफ़ी देर तक रोते रहे।"
गोथर महतो की पुत्रवधू अथनी देवी (खेदन की पत्नी) बताती हैं कि 17-18 बरस कैसे गुज़ारे हैं, बताने की हिम्मत नहीं है। ऐसे भी मौक़े आए जब घर का चूल्हा नहीं जला।
पहले से ही ज़मीन कम थी, केस-मुक़दमे लड़ने में खेत, गहने, बर्तन भी बिके।
बेटा शिवचरण महतो शहर में मज़दूरी कर किसी तरह परिवार चलाता रहा।
खेदन महतो हताश होते दिखे। कहने लगे महज़ बीस डिसमिल ज़मीन है, कमाने का वक़्त जेल में गुज़र गया। सामने एक बेटी भी है।
'सज़ा के पैसे कब मिलेंगे?'
बेटे को हताश देख पिता गोथर महतो उनके कंधे पर हाथ रखते हैं। कहते हैं जेल में भी इन्हें हम ही हिम्मत दिलाते थे।
वो बताते हैं कि जेल के भीतर जब वे अनशन पर बैठे, तो एक महिला पुलिसकर्मी ने कहा, "बाबा खाना खा लो, आपको तो छूटना ही है।"
बुज़ुर्ग गोथर के सवाल और भी हैं। पूछते हैं कि जेल की सज़ा काटी है, तो मेहनताने के पैसे कब मिलेंगे।
ये पैसे मिल जाएं, तो बाप- बेटे को बड़ा सहारा मिल जाएगा। खेती में जी जान से जुट जाएंगे।
वे उम्मीद करते हैं कि इससे दुख भरे दिन ख़त्म हो सकते हैं।
ग़लती की सज़ा
हमने हत्या के जुर्म में सज़ा पूरी करने के बाद जेलों से रिहा होने वाले और भी क़ैदियों से बात की। इनमें अधिकतर लोग ग्रामीण इलाक़े के हैं और आदिवासी हैं।
चाईबासा के गुमदी बानरा कहते हैं, "उन्हें ग़लती की सज़ा मिल गई है।"
हज़ारीबाग़ जेल से रिहा हुए पाकुड़ के रहने वाले पत्थर मज़दूर सिराजुल शेख कहते हैं कि आवेश में ग़लती हो गई।
सिराजुल के बारे में जेल के अधिकारी बताते हैं कि उन्होंने बड़ी संजीदगी से सज़ा काटी है। जेल से रिहा पर उन्होंने वादा भी किया कि मज़दूर का ये हाथ अब सिर्फ़ पत्थर फोड़ने में जुटेगा।
पूर्वी सिंहभूम के हरचन टुडू कहते हैं, "जेल से रिहा होने की ख़ुशी है, लेकिन चिंता यह भी कि समाज जुर्म व सज़ा पर सवाल ही खड़ा करेगा।"