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कागज के ठोंगे बना कर परिवार का पेट पाल रही ओलंपिक में देश को गोल्ड मेडल दिलाने वाली खिलाड़ी
Mon, 11 Feb 2019 05:16 PM IST
Nilesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमशेदपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जमशेदपुर
Published by: Nilesh Kumar
Updated Mon, 11 Feb 2019 05:16 PM IST
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ओलंपिक में गोल्ड मेडल विनर शटलर गंगाबाई
- फोटो : Social Media
झारखंड के जमशेदपुर जिला में एक छोटा-सा गांव है-सोनारी। साल 2011 में यह गांव उस समय अचानक चर्चा में आ गया था, जब इस गांव की एक बेटी ने ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड मेडल समेत तीन पदक दिलाया था। आज वही गंगाबाई कागज के ठोंगे बनाकर परिवार का पेट पालने को मजबूर है। जान कर दु:ख होगा, लेकिन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी की आर्थिक तंगी की यही सच्चाई है।
जमशेदपुर के सोनारी की रहने वाली नि:शक्त गंगाबाई ने साल 2011 में एथेंस स्पेशल ओलंपिक में देश को एक गोल्ड एवं दो सिल्वर मेडल दिलाया था। जीत के कुछ ही महीनों बाद से गंगाबाई गुमनामी के अंधेरे में जाती रही। घर की स्थिति तब और दयनीय होने लगी, जब परिवार चलाने में आर्थिक दिक्कत आने लगी।
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गंगाबाई की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक सामाजिक संस्था ने उसे ठोंगा बनाने का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा। संस्थान के अध्यक्ष अवतार सिंह का कहना है कि सरकार को ऐसे खिलाड़ियों की मदद करनी चाहिए।
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जमशेदपुर के सोनारी की रहने वाली नि:शक्त गंगाबाई ने साल 2011 में एथेंस स्पेशल ओलंपिक में देश को एक गोल्ड एवं दो सिल्वर मेडल दिलाया था। जीत के कुछ ही महीनों बाद से गंगाबाई गुमनामी के अंधेरे में जाती रही। घर की स्थिति तब और दयनीय होने लगी, जब परिवार चलाने में आर्थिक दिक्कत आने लगी।
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सरकार या प्रशासन ने नहीं की मदद
स्पेशल बैडमिंटन में पदक जीत चुकी गंगाबाई बेहद गरीब परिवार से आती है। परिवार में उसके अलावे उसके बूढ़े मां—बाप हैं। खबरों के मुताबिक सरकार ने या स्थानीय प्रशासन ने उसकी मदद की पहल नहीं की। गनीमत यह रहा कि उसे निजी संगठनों से मदद मिल रही है।
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गंगाबाई की खराब आर्थिक स्थिति को देखते हुए एक सामाजिक संस्था ने उसे ठोंगा बनाने का प्रशिक्षण देकर रोजगार से जोड़ा। संस्थान के अध्यक्ष अवतार सिंह का कहना है कि सरकार को ऐसे खिलाड़ियों की मदद करनी चाहिए।