फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jharkhand ›   Lumpy skin disease infecting cattle in Jharkhand

Lumpy Skin Disease: झारखंड में मवेशियों को संक्रमित कर रहा लंपी चर्म रोग, सभी 24 जिलों को एडवाइजरी जारी

Mon, 12 Sep 2022 03:39 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, रांची।
पीटीआई, रांची। Published by: देव कश्यप Updated Mon, 12 Sep 2022 03:39 AM IST
सार

लंपी चर्म रोग एक संक्रामक वायरल रोग है जो मवेशियों में मच्छरों, मक्खियों, जूं और ततैया के सीधे संपर्क में आने से और दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलता है। इस रोग के कारण बुखार और त्वचा पर गांठें पड़ जाती हैं, जो घातक हो सकता है। 

विज्ञापन
Lumpy skin disease infecting cattle in Jharkhand
लंपी चर्म रोग। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

झारखंड में 1,000 से अधिक सूअरों की जान लेने वाले अफ्रीकी स्वाइन फ्लू के बाद, पूर्वी राज्य में लंपी चर्म रोग (Lumpy Skin Disease) के बढ़ते मामले मवेशियों को संक्रमित कर रहे हैं। इससे पशुपालन विभाग की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, वायरल संक्रमण के कारण अभी तक जिलों में गौजातीय मवेशियों की मौत नहीं हुई है। एक अधिकारी ने रविवार को यह जानकारी दी।

विज्ञापन


लंपी चर्म रोग एक संक्रामक वायरल रोग है जो मवेशियों में मच्छरों, मक्खियों, जूं और ततैया के सीधे संपर्क में आने से और दूषित भोजन और पानी के माध्यम से फैलता है। इस रोग के कारण बुखार और त्वचा पर गांठें पड़ जाती हैं, जो घातक हो सकता है। पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन संस्थान के निदेशक विपिन बिहारी मेहता ने बताया कि रांची और देवघर जिलों से हमें लंपी चर्म रोग के कुछ मामले मिले हैं।

विज्ञापन


सभी 24 जिलों को एडवाइजरी जारी
उन्होंने बताया कि इस बीमारी को फैलने से रोकने के लिए पशुपालन विभाग ने सभी 24 जिलों को एडवाइजरी जारी कर कहा है कि यदि उनके संबंधित क्षेत्रों में लंपी त्वचा रोग का कोई मामला सामने आता है तो वे नमूने भेजें। राज्य में पिछले साल भी यह बीमारी सामने आई थी। लेकिन, बहुत कम मामले थे। इस साल मामले बढ़ रहे हैं। हमने डेयरी किसानों को बीमारी के लक्षण दिखाने वाले मवेशियों को आइसोलेशन में रखने को कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये हैं लंपी चर्म रोग के लक्षण
मेहता ने कहा कि लक्षणों में लगभग दो से पांच सेंटीमीटर की त्वचा की गांठ, तेज बुखार, दूध उत्पादन में कमी, भूख न लगना और आंखों से पानी आना शामिल हैं। केंद्र ने हाल ही में कहा था कि गुजरात, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश में फैली इस बीमारी के कारण अब तक लगभग 57,000 मवेशियों की मौत हो चुकी है। उन्होंने कहा कि सबसे अच्छी बात यह है कि अब हमारे पास बीमारी को नियंत्रित करने के लिए एक टीका है।


वहीं, अफ्रीकन स्वाइन फ्लू (एएसएफ) के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और राज्य में मृत्यु दर में भी कमी आई है। रांची में कांके स्थित सरकारी सुअर प्रजनन फार्म में, एएसएफ के प्रकोप से पहले लगभग 1,100 सूअर थे। एक अधिकारी ने कहा कि अभी इस प्रजनन फार्म में केवल 300 सुअर हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed