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Jharkhand: लोको पायलट ने सूझबूझ से बचाई एक दर्जन हाथियों की जान, स्थानीय लोगों ने की तारीफ

Sat, 27 Aug 2022 01:23 PM IST
संजीव कुमार झा पीटीआई, मेदिनीनगर
पीटीआई, मेदिनीनगर Published by: संजीव कुमार झा Updated Sat, 27 Aug 2022 01:23 PM IST
सार

12 से अधिक हाथियों की जान बचाने वाले लोको पायलटों की हर जगह तारीफ हो रही है। रेलवे के बड़े अधिकारियों ने अन्य लोको पायलटों से भी इसी तरह की सतर्कता बरतने की अपील की है।

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Loco pilots timely action saves lives of 12 elephants of Palamu Tiger Reserve in Jharkhand
लोको पायलट की सूझबूझ से बची हाथियों की जान - फोटो : PTI

विस्तार

झारखंड में दो लोको पायलटों की सूझबूझ से पलामू टाइगर रिजर्व के एक दर्जन हाथियों की जान बच गई। बताया जा रहा है कि शुक्रवार शाम करीब  छह बजे एक ट्रेन 70 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पलामू टाइगर रिजर्व होते हुए बंगाल की ओर जा रही थी। तभी लोकोमोटिव पायलटों ने अचानक हाथियों के झुंड को चिपदोहर और हेहेगरा रेलवे स्टेशनों के बीच पटरियों को पार करते देखा। इसके बाद सहायक लोको पायलट रजनीकांत चौबे और लोको पायलट एके विद्यार्थी ने तेजी से आपातकालीन ब्रेक खींचा और ट्रेन झुंड से करीब 60 मीटर दूर रुक गई। 

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'कॉशन लाइन' के बाद ट्रेन की गति सीमा 25 किमी प्रति घंटे थी
लोको पायलट चौबे ने कहा कि जहां घटना हुई उस हिस्से पर गति की कोई सीमा नहीं थी, लेकिन 500 मीटर दूर 'कॉशन लाइन' के बाद गति सीमा 25 किमी प्रति घंटे थी। वहीं पलामू टाइगर रिजर्व के एक अधिकारी ने कहा कि मौजूदा डबल-लाइन रिजर्व के मुख्य क्षेत्र में छिपादोहर और हेहेगरा के बीच 11 किलोमीटर की दूरी से होकर गुजरती है। 1129.93 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले इस रिजर्व में स्तनधारियों की 47 प्रजातियां और पक्षियों की 174 प्रजातियां हैं। रिजर्व में करीब 250 हाथी हैं।
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पलामू टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर लोको पायलट का शुक्रिया अदा किया
स्थानीय लोगों के साथ पलामू टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर कुमार आशुतोष ने कहा कि 12 हाथियों की जान बचाने के लिए हम लोको पायलटों का शुक्रिया अदा करते हैं। उन्होंने कहा कि घने जंगल के बीच से ट्रेनों की लगातार आवाजाही से रिजर्व में वन्यजीवों को खतरा है। उन्होंने कहा कि इस खंड में अतीत में कई हाथी मारे गए थे। मैं अन्य लोको पायलटों से चौबे और विद्यार्थी की तरह सतर्क रहने का आग्रह करूंगा। 

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